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पुराने पन्नों से: हनुमान ने अपने राम को ही दे डाली थी चुनौती, बाद में बताया था चौधरी चरण सिंह को रावण

Tue, 30 Apr 2024 02:21 PM IST
अनुज कुमार संजीव सिंह, अमर उजाला, आगरा
संजीव सिंह, अमर उजाला, आगरा Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 30 Apr 2024 02:21 PM IST
सार

चौधरी चरण सिंह को राम और खुद को हनुमान बताने वाले राजनेता राजनारायण ने लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। यह किस्सा 1984 के आम चुनाव का है। 

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purane panno se Lok Sabha Elections 1984 Baghpat seat between chaudhary Charan Singh and Rajnarayan
पुराने पन्नों से - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को राम और खुद को हनुमान बताने वाले राजनेता राजनारायण ने उनके खिलाफ ही ताल ठोक दी थी। चरण सिंह की परंपरागत सीट बागपत से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान करते हुए उन्हें राक्षस बताया। कहा कि चुनाव लड़ने का उद्देश्य राक्षस का वध करना है। यह किस्सा 1984 के आम चुनाव का है।

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अमर उजाला में 24 नवंबर 1984 को प्रकाशित समाचार के अनुसार, उन्होंने नामांकन दाखिल करने के बाद कहा कि वह राम के हनुमान नहीं, बल्कि रावण के घर विभीषण की तरह थे। चरण सिंह को राम और खुद को हनुमान बताकर उन्होंने गलती की। 

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इंदिरा गांधी को मात देने वाले राजनारायण ने कहा कि जिस तरह रावण की गलत नीतियों का विरोध करते हुए विभीषण ने उसका विनाश किया था, उसी तरह वह भी बागपत से चरण सिंह को धूल चटा देंगे। चरण सिंह को लोकतंत्र का दुश्मन बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को मतदान ही नहीं करने दिया जाता।

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राजनारायण ने प्रतिज्ञा की थी कि चरण सिंह को हराने के बाद वह गढ़ के गंगा तट पर अपनी दाढ़ी बनवाएंगे। चरण सिंह को लोकतंत्र और दलितों के सबसे बड़े दुश्मन की संज्ञा देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास उनका प्रचार करेंगे। हालांकि राजनारायण यह चुनाव जीत नहीं पाए और चौधरी चरण सिंह निर्वाचित हुए।

चुनाव चिह्न मिला था हाथी
राजनारायण को बागपत में चरण सिंह के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े होने पर हाथी चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। उन्हें कई पार्टियों का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर राजनारायण निराश हो गए।

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