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Agra News: दलदल में फंसी ट्रैक्टर-ट्रॉली में चार घंटे तड़पती रही गर्भवती

Fri, 10 Jul 2026 02:40 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Fri, 10 Jul 2026 02:40 AM IST
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Pregnant woman suffered in agony for four hours in a tractor-trolley stuck in a swamp.
बाह: सुंसार गांव में बीहड़ के दलदल में फंसे ट्रैक्टर ट्रॉली, छटपटाती रही गर्भवती
बाह। सुंसार गांव में बृहस्पतिवार तड़के एक प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन ट्रैक्टर-ट्रॉली से बाह सीएचसी ले जा रहे थे। ट्रैक्टर-ट्रॉली कीचड़ और दलदल भरे रास्ते में फंस गई। प्रसूता प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने फावड़े से कीचड़ हटाकर दलदल में फंसी ट्रैक्टर-ट्रॉली को बाहर निकाला।
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घटना सुबह करीब चार बजे की है। रामब्रज की पत्नी कृष्णा को प्रसव पीड़ा हुई। उनका चौथा प्रसव था। प्रसव पीड़ा से छटपटा रही गर्भवती को परिजन ने ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठाया। बारिश से बचने के लिए तिरपाल तान लिया और बाह सीएचसी के लिए निकले। कीचड़ और दलदल में ट्रैक्टर ट्रॉली फंस गई। पति रामब्रज, सोनू राजपूत, छोटू, शशिकांत, शीला देवी आदि ने बताया गांव वाले फावड़े लेकर आए और कीचड़ को हटाकर फिसलन को रोकने के लिए सिल्ट डाली। फिसलन भरे रास्ते पर कई बार ट्रॉली पलटने से बची, जिससे प्रसूता एवं परिवार की महिलाओं की जान बचाने के लाले पड़ गए। करीब 4 घंटे की जद्दोजहद के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली सुबह 8 बजे करीब मंसूरपुरा की सड़क तक पहुंची। दोपहर 2 बजे करीब प्रसव का समय न होने की बात कहकर अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। गर्भवती को परिजन फतेहाबाद के निजी अस्पताल ले गए।
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7 साल में 12 की जा चुकी है जान

गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंचती है। ट्रैक्टर ट्रॉली से मरीज और प्रसूताओं को अस्पताल ले जाना पड़ता है। पूर्व प्रधान पुत्तूलाल ने बताया कि पिछले साल समय से अस्पताल न पहुंचने की वजह से विधवा गुड्डी देवी की माैत हो गई। साढ़े तीन साल पहले माधौ सिंह की पत्नी सरोज को रात में इलाज को ले जाते समय रास्ते में जच्चा बच्चा की मौत हो गई। चार साल पहले बीमार आकाश पुत्र भूपाल सिंह की मौत हो गई। 5 साल पहले प्रसव के लिए ले जाते समय ब्रजेश की पत्नी बसंती ने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चे की मौत हो गई। 6 साल पहले ही शिशुपाल पुत्र श्रीपति ने रास्ते में दम तोड़ दिया। रामलखन के डेढ़ माह के बच्चे की भी मौत हो गई। साढ़े 6 साल पहले प्रिया पुत्री डिप्टी सिंह की जान चली गई। वहीं साइकिल से प्रसव के लिए ले जाते समय कुल्लमनी पत्नी ओम प्रकाश की मौत हो गई। 7 साल पहले रास्ते में रोहन सिंह जान चली गई। रूपा पत्नी कृपाल सिंह और उनके जन्मे बच्चे की भी मौत हो गई। जबकि बारिश के दिनों में रामवरन पुत्र रघुनाथ को इलाज के लिए परिवार वाले ले जाने की हिम्मत नही जुटा पाये और उनकी जान चली गई।
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आजादी के 79 साल बाद भी नहीं बन सकी सुंसार की सड़क
आजादी के 79 साल बाद भी बाह के सुंसार गांव में यमुना के बीहड़ के करीब 4 किमी के रास्ते पर सड़क नहीं बन सकी है। सड़क के लिए 2014 और 2024 में लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया गया। कई आंदोलन किए, नतीजा सिफर रहा है। मंसूरपुरा से गांव तक पहुंचने के लिए बीहड़ी रास्ता है। पूर्व ग्राम प्रधान पुत्तूलाल ने बताया प्रताप सिंह, राजपाल, वीरपाल, श्यामवीर, सत्यपाल, भीकम सिंह, परमसुख, कल्याण सिंह, भीमसेन, राजेश कुमार, शशी कपूर, मदन गोपाल, महेश, कमलेश, लालू, उमेश, लोकनाथ, शांतिलाल, जोगेंद्र, टिंकू, लीलाधर आदि परिवार जरार में बस गए हैं। सांसद राजकुमार चाहर ने गांव में चौपाल लगाई, उसके बाद रास्ते का सर्वे हुआ तो सड़क नसीब होने की उम्मीद जगी थी। पुत्तूलाल, शिवशंकर, बचन सिंह, नानकराम कहते हैं कि सड़क बन जाए तभी यकीन होगा। संवाद
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