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जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान लापरवाही से जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ी
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मैनपुरी। सौ शैया अस्पताल में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ गई। आनन-फानन दोनों को सौ शैया अस्पताल से रेफर कर दिया गया। शहर के एक निजी अस्पताल में महिला को उपचार दिया गया। जहां जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव के नाम पर पांच हजार रुपये मांगे गए और इलाज में लापरवाही बरती गई।
शहर के मोहल्ला छपट्टी निवासी गणेश कुमार ने पत्नी रुबी को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां शाम 7:06 बजे उसकी पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया। दो घंटे बाद अचानक जच्चा और बच्चा दोनों की हालत बिगड़ने लगी। आरोप है कि गणेश ने इसकी जानकारी अस्पताल के स्टाफ को दी तो उन्होंने मरीज को मेडिकल कॉलेज सैफई ले जाने की सलाह दी, लेकिन रेफर स्लिप नहीं दी। गणेश ने बताया कि उससे लिखवा लिया गया कि वह अपनी मर्जी से मरीज को ले जा रहा है।
हालत बिगड़ने पर गणेश ने पत्नी को शहर के करहल चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गणेश का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ी। गणेश ने उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर अस्पताल में पांच हजार रुपये न देने के कारण उसकी पत्नी को बेहतर इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
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अधिक रक्तस्राव से खून की हुई कमी
परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान करीब दो घंटे तक महिला को ब्लीडिंग होती रही। जब उसका हीमोग्लोबिन मात्र पांच प्वांइट रह गया, तब उसे बाहर ले जाने को कहा गया। जब परिजनों ने सौ शैया में ही ब्लड चढ़ाने की बात कही तो उस पर भी ध्यान नहीं दिया गया। निजी अस्पताल में महिला को ब्लड चढ़ाकर जान बचाई गई।
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इस संबंध में जानकारी मिली है। हालांकि अभी कोई शिकायती पत्र नहीं मिला है, फिर भी मामले की जांच शुरू करा दी गई है। जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एके पचौरी, सीएमएस सौ शैया अस्पताल
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शहर के मोहल्ला छपट्टी निवासी गणेश कुमार ने पत्नी रुबी को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार को पूर्वाह्न 11:30 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां शाम 7:06 बजे उसकी पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया। दो घंटे बाद अचानक जच्चा और बच्चा दोनों की हालत बिगड़ने लगी। आरोप है कि गणेश ने इसकी जानकारी अस्पताल के स्टाफ को दी तो उन्होंने मरीज को मेडिकल कॉलेज सैफई ले जाने की सलाह दी, लेकिन रेफर स्लिप नहीं दी। गणेश ने बताया कि उससे लिखवा लिया गया कि वह अपनी मर्जी से मरीज को ले जा रहा है।
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हालत बिगड़ने पर गणेश ने पत्नी को शहर के करहल चौराहे के पास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गणेश का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ी। गणेश ने उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर अस्पताल में पांच हजार रुपये न देने के कारण उसकी पत्नी को बेहतर इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
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अधिक रक्तस्राव से खून की हुई कमी
परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान करीब दो घंटे तक महिला को ब्लीडिंग होती रही। जब उसका हीमोग्लोबिन मात्र पांच प्वांइट रह गया, तब उसे बाहर ले जाने को कहा गया। जब परिजनों ने सौ शैया में ही ब्लड चढ़ाने की बात कही तो उस पर भी ध्यान नहीं दिया गया। निजी अस्पताल में महिला को ब्लड चढ़ाकर जान बचाई गई।
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इस संबंध में जानकारी मिली है। हालांकि अभी कोई शिकायती पत्र नहीं मिला है, फिर भी मामले की जांच शुरू करा दी गई है। जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एके पचौरी, सीएमएस सौ शैया अस्पताल