कोरोना: संक्रमण के बाद अवसाद में लोग, पहुंच रहे मनोचिकित्सक के पास, जानिए क्या कहते हैं चिकित्सक
मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि कोरोना से ठीक हुए लगातार परामर्श ले रहे हैं। कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें नींद की दवा लेनी पड़ रही है। घबराहट व बेचैनी बनी हुई है।
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कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों को नींद न आने, तनाव और बेचैनी जैसी समस्याएं आ रही हैं। लोग मनोचिकित्सकों से संपर्क कर रहे हैं और सलाह ले रहे हैं। वहीं, ऐसे भी मामले पहुंच रहे हैं, जिनके परिवार में कोरोना की वजह से किसी की मौत हो गई। उसे परिवार के बच्चे या महिलाओं में अवसाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि कोरोना से ठीक हुए लगातार परामर्श ले रहे हैं। कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें नींद की दवा लेनी पड़ रही है। घबराहट व बेचैनी बनी हुई है। कोरोना संक्रमण की वजह से जिन परिवारों में मौत हुई है। उसमें महिलाओं व बच्चों के अवसाद में जाने की समस्या आ रही है।
इनको लग रहा है कि सही उपचार मिला होता तो शायद परिवार के सदस्य की मौत न होती। वहीं, लोगों में यह भी भाव घर कर गया है कि मेरे ही साथ ही ऐसा क्यों हुआ, बड़ी संख्या में लोग कोरोना संक्रमित हुए।
केस एक : एक 18 वर्ष की युवती के पिता की कोरोना की वजह से मौत हो गई। इसके बाद से युवती गुमसुम हो गई है। खाना नहीं खाती। उसको लगता है कि पिता को सही उपचार मिलता तो शायद वह बच जाते। उसकी काउंसलिंग की गई।
केस दो : 54 वर्ष की एक महिला मनोचिकित्स के पास पहुंची। बताया कि वह कोरोना संक्रमित थी, अब ठीक है। नींद नहीं आती और घबराहट होती है। उसे नींद की दवाएं लेनी पड़ रहीं हैं। उसे भी समझाया गया कि कुछ दिन समस्या है, यह अपने आप ठीक हो जाएगा।
सलाह
- परिवार का कोई सदस्य अवसाद में हो, खाना न खा रहा हो तो उसे अकेला न छोड़ें।
- चिकित्सकों व काउंसरों से संपर्क कर काउंसिलिंग कराएं। वह बिना दवा के ठीक हो सकता है।
- जो भी अवसादग्रस्त हो, उससे संवाद करते रहें, उसे विभिन्न गतिविधियों में व्यस्त रखें।
डॉ. यूसी गर्ग का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या और कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए सरकार को काउंसिलिंग सेंटर खोलना चाहिए। इन परिस्थितियों में बड़ी संख्या में लोग अवसादग्रस्त हुए हैं। उनको काउंसिलिंग की जरूरत है। टेली हेल्प लाइन नंबर जारी कर लोगों की मदद करनी चाहिए। उच्च शिक्षण संस्थानों के मनोविज्ञान विभाग के शिक्षकों की भी मदद लेनी चाहिए।
समाज का जुड़ाव न होना भी तनाव का कारण : डॉ. दिनेश राठौर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिनेश सिंह राठौर का कहना है कि कोरोना संक्रमण की महामारी में जो लोग कोरोना संक्रमित हुए या फिर जिन परिवारों में कोरोना की वजह से मौत हुई, उनको समाज से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। ऐसा माहौल बन गया कि ज्यादातर परिवार संक्रमण की चपेट में रहे, या अन्य समस्याओं से जूझ रहे थे। संकट की घड़ी में समाज का जुड़ाव न होने से भी कोरोना से ठीक हुए लोग या फिर अपनों को खोने वाले लोग अवसाद में हैं। ऐसे लोगों को सहयोग करने की जरूरत है, फोन पर बात करके व वीडियो कॉलिंग के माध्यम से ढांढस बंधाना चाहिए। नियमित बातचीत करना चाहिए, जिससे उनके मन का गुबार निकल सके।परामर्श: कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं के लिए काम की खबर, चिकित्सक की सलाह संक्रमित है तो घबराएं नहीं...