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UP: बुजुर्गों में माैत की ये दूसरी सबसे बड़ी वजह, तेजी से बढ़ रहे मामले; जेसीकाॅन में चिकित्सकों ने किया आगाह
Sat, 13 Dec 2025 10:44 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sat, 13 Dec 2025 10:44 PM IST
सार
प्रदूषण के चलते बुजुर्गों में तेजी से स्वास्थ्य समस्या बढ़ रही है। चिकित्सकों की मानें तो 60 से अधिक उम्र के 40 फीसदी लोग अस्थमा-सांस रोग और निमोनिया से जूझ रहे हैं।
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जेसीकाॅन का उद्घाटन करते मंत्री।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बढ़ता प्रदूषण लोगों के फेफड़े खराब कर रहा है। बुजुर्गों पर इसका प्रभाव तीन गुना है। इसके चलते 60 से अधिक उम्र के 40 फीसदी लोग अस्थमा-सांस रोग और निमोनिया से जूझ रहे हैं। मॉल रोड स्थित होटल में जीरियाट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया (जीएसआई) के तीन दिवसीय जेसीकॉन-2025 के दूसरे दिन चिकित्सकों ने बुजुर्गों में मल्टीपल बीमारियों के इलाज और बचाव पर मंथन किया।
कोयंबटूर की डॉ. अनुपमा मूर्ति ने बताया कि 60 से अधिक उम्र के बुजुर्गों में सांस नलिकाएं संकरी, सूजी हुई और संक्रमित मिल रही हैं। इससे अस्थमा, सांस, टीबी, फेफड़ों में संक्रमण, निमोनिया की दिक्कत मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कारखानों, निर्माण स्थलों, खेती कार्य और वाहनों के धुएं से होने वाला प्रदूषण है। हाल ये है कि बुजुर्गों की मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह सांस-अस्थमा है। पहले नंबर पर कार्डियक अरेस्ट और तीसरे नंबर लकवा और चौथे नंबर पर निमोनिया है।
यूके के डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि दुनिया में बुजुर्ग तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में अगले 25 साल में बुजुर्गों की संख्या दोगुना होगी। इनके इलाज के लिए जीरियाट्रिक विशेषज्ञ बढ़ाने और अस्पताल में वार्ड बनाने की जरूरत है। पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने बुजुर्गों से व्यसनों से दूर रहने की अपील की। कहा कि इससे भी बीमारियां पनप रही हैं।
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कार्यशाला के ब्रांड एंबेसडर 71 साल के डॉ. अनिल अग्रवाल और डॉ. वीएन कौशल ने अवसाद-तनाव से दूर रहने के लिए परिस्थितियों में खुश रहने पर जोर दिया। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बुजुर्गाें की बीमारियों पर मंथन की सराहना की। बुजुर्गों के इलाज का प्रशिक्षण पाने वाले 75 चिकित्सकों को प्रमाणपत्र भी दिए। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुनील बंसल, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. बीके अग्रवाल, डॉ. आशीष गौतम, डॉ. कैलाश विश्वानी, डॉ. प्रभात अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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कोयंबटूर की डॉ. अनुपमा मूर्ति ने बताया कि 60 से अधिक उम्र के बुजुर्गों में सांस नलिकाएं संकरी, सूजी हुई और संक्रमित मिल रही हैं। इससे अस्थमा, सांस, टीबी, फेफड़ों में संक्रमण, निमोनिया की दिक्कत मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कारखानों, निर्माण स्थलों, खेती कार्य और वाहनों के धुएं से होने वाला प्रदूषण है। हाल ये है कि बुजुर्गों की मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह सांस-अस्थमा है। पहले नंबर पर कार्डियक अरेस्ट और तीसरे नंबर लकवा और चौथे नंबर पर निमोनिया है।
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यूके के डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि दुनिया में बुजुर्ग तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में अगले 25 साल में बुजुर्गों की संख्या दोगुना होगी। इनके इलाज के लिए जीरियाट्रिक विशेषज्ञ बढ़ाने और अस्पताल में वार्ड बनाने की जरूरत है। पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने बुजुर्गों से व्यसनों से दूर रहने की अपील की। कहा कि इससे भी बीमारियां पनप रही हैं।
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कार्यशाला के ब्रांड एंबेसडर 71 साल के डॉ. अनिल अग्रवाल और डॉ. वीएन कौशल ने अवसाद-तनाव से दूर रहने के लिए परिस्थितियों में खुश रहने पर जोर दिया। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बुजुर्गाें की बीमारियों पर मंथन की सराहना की। बुजुर्गों के इलाज का प्रशिक्षण पाने वाले 75 चिकित्सकों को प्रमाणपत्र भी दिए। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुनील बंसल, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. बीके अग्रवाल, डॉ. आशीष गौतम, डॉ. कैलाश विश्वानी, डॉ. प्रभात अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
डिजिटल एप से बुजुर्गों को मिल रहा इलाज
डॉ. मूर्ति ने बताया कि बुजुर्गाें के लिए डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी (डीटीएच) इलाज के लिए बेहतर साधन बन रहा है। इसमें एप डाउनलोड करना पड़ता है, जिसमें 20 से अधिक भाषाओं में जानकारी उपलब्ध है। इसमें फिजियोथेरेपी, काउंसलिंग, बीमारियों की पहचान समेत कई तरह की सुविधा है। इस पर चिकित्सक जुड़े हैं, जिससे उन्हें परामर्श और इलाज मिलता है। बेहद जरूरी होने पर ही उनको अस्पताल-क्लीनिक बुलाया जाता है। इससे बुजुर्ग बार-बार अस्पताल आने की परेशानी से बच जाते हैं।
जंबो टैबलेट से किया जा रहा इलाज
डॉ. विनोद कुमार ने बुजुर्गों में मिल रही मल्टीपल बीमारियों को एबीसीडी के जरिये समझाते हुए बताया कि ए से अल्जाइमर, बी से ब्रेन स्ट्रोक, सी से कैंसर, डी से डायबिटीज ऐसे ही मल्टीपल बीमारियां मिल रही हैं। इसमें अलग-अलग दवाएं दी जाती हैं। ज्यादा दवाएं होने से बुजुर्ग खा नहीं पाते और इलाज बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में जंबो टैबलेट से बुजुर्गों का इलाज कर रहे हैं। इसमें एक ही दवा कई बीमारियों में असर करती है। इससे दवाओं की मात्रा कम होने से बुजुर्गों को आसानी होती है।
ये दिनचर्या अपनाने पर दिया जोर
- जागने के बाद योग, ध्यान लगाएं। स्ट्रेचिंग, व्यायाम और पैदल चलें।
- प्रोटीनयुक्त पौष्टिक भोजन लें और रात आठ बजे सो जाएं।
- भोजन में मोटे अनाज का उपयोग करें, मौसमी फल जरूर खाएं।
- गीत-संगीत समेत अन्य हॉबी में खुद को व्यस्त रखें, तनाव से बचें।
- मित्रों के साथ वार्ता करें। शारीरिक क्षमता के आधार पर टूर पर जाएं।
ये भी पढ़ें-UP: कलयुगी मां की मर गई ममता! एक माह की मासूम के सड़क पर फेंक गई वो...आवारा कुत्तों से राहगीरों ने बचाई जान
डॉ. मूर्ति ने बताया कि बुजुर्गाें के लिए डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी (डीटीएच) इलाज के लिए बेहतर साधन बन रहा है। इसमें एप डाउनलोड करना पड़ता है, जिसमें 20 से अधिक भाषाओं में जानकारी उपलब्ध है। इसमें फिजियोथेरेपी, काउंसलिंग, बीमारियों की पहचान समेत कई तरह की सुविधा है। इस पर चिकित्सक जुड़े हैं, जिससे उन्हें परामर्श और इलाज मिलता है। बेहद जरूरी होने पर ही उनको अस्पताल-क्लीनिक बुलाया जाता है। इससे बुजुर्ग बार-बार अस्पताल आने की परेशानी से बच जाते हैं।
जंबो टैबलेट से किया जा रहा इलाज
डॉ. विनोद कुमार ने बुजुर्गों में मिल रही मल्टीपल बीमारियों को एबीसीडी के जरिये समझाते हुए बताया कि ए से अल्जाइमर, बी से ब्रेन स्ट्रोक, सी से कैंसर, डी से डायबिटीज ऐसे ही मल्टीपल बीमारियां मिल रही हैं। इसमें अलग-अलग दवाएं दी जाती हैं। ज्यादा दवाएं होने से बुजुर्ग खा नहीं पाते और इलाज बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में जंबो टैबलेट से बुजुर्गों का इलाज कर रहे हैं। इसमें एक ही दवा कई बीमारियों में असर करती है। इससे दवाओं की मात्रा कम होने से बुजुर्गों को आसानी होती है।
ये दिनचर्या अपनाने पर दिया जोर
- जागने के बाद योग, ध्यान लगाएं। स्ट्रेचिंग, व्यायाम और पैदल चलें।
- प्रोटीनयुक्त पौष्टिक भोजन लें और रात आठ बजे सो जाएं।
- भोजन में मोटे अनाज का उपयोग करें, मौसमी फल जरूर खाएं।
- गीत-संगीत समेत अन्य हॉबी में खुद को व्यस्त रखें, तनाव से बचें।
- मित्रों के साथ वार्ता करें। शारीरिक क्षमता के आधार पर टूर पर जाएं।
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