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पुलिस की करतूत: बेकसूर युवक को भेजा जेल, कोर्ट ने दिया दो दरोगाओं पर कार्रवाई का आदेश

Thu, 06 Jun 2019 05:11 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 06 Jun 2019 05:11 PM IST
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Police sent innocent young man to jail in agra
यूपी पुलिस
आगरा में चरस रखने के आरोप में जेल भेजे गए रुनकता निवासी चांद को अदालत ने बरी किया। इसके साथ ही पुलिस की करतूत से भी पर्दा उठ गया। चांद को पुलिस ने फंसाया था। जिस दरोगा ने केस दर्ज किया और फिर जिसने विवेचना की, कोर्ट की गवाही में उनके कारनामे की पोल खुल गई। अदालत ने दोनों दरोगाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को खत लिखा है।
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लिखापढ़ी इस तरह से की गई थी कि थाना सिकंदरा के दरोगा सुधीर कुमार ने 20 अक्तूबर 2016 को मुखबिर की सूचना पर आगरा-मथुरा रोड पर पंजाब नेशनल बैंक के पास चांद निवासी व्यापारी मोहल्ला, रुनकता को पकड़ा था। दरोगा ने दावा किया था कि चांद के पास से 465 ग्राम चरस बरामद की है। इस पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था।
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कोर्ट ने माना कि सुधीर कुमार की भूमिका संदिग्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस घटनाक्रम की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। आरोपी को अनुचित लाभ देने के लिए प्रतिकूल बयान दिया है। इसी प्रकार एसआई राजेश पाल की भूमिका भी संदिग्ध है।
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अपर जिला जज अतुल सिंह केस के वादी सुधीर कुमार (हाल तैनात मैनपुरी) और विवेचक एसआई राजेश पाल (हाल तैनात आगरा) के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को आदेश दिया है। उधर, चरस रखने के आरोपी चांद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

ऐसे फर्जी साबित हुई पुलिस की कहानी

- केस की गवाही में दरोगा सुधीर कुमार ने बयान दिया कि चरस दो पैकेट बनाए। एक पैकेट वर्गाकार और दूसरा गोल आकार में था। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में सैंपल गोल वाले से भेजा गया जबकि एफआईआर में वर्गाकार वाले से लेना बताया गया था।
- एसआई राजेश पाल की भूमिका भी संदिग्ध है। उन्होंने जिरह में कहा कि मुल्जिम कहां और किधर से आया, इसके बारे में पता नहीं है। तराजू किसकी थी और कहां से लिया? इस बारे में भी जानकारी से मना कर दिया।

इन दरोगाओं को विवेचना देने पर पुनर्विचार करें

कोर्ट ने इन दोनों दरोगाओं राजेश पाल और सुधीर कुमनार को विवेचना दिए जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों को पुनर्विचार करने की आवश्यकता की भी राय दी है। यह भी टिप्पणी की कि अत्यंत आश्चर्य का विषय है कि एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी इस प्रकार की लचर कार्रवाई कर सकता है।
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