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Pitru paksha 2020: नहीं आ सके श्रद्धालु तो पुरोहितों ने स्वयं किया तर्पण
Wed, 16 Sep 2020 11:26 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 16 Sep 2020 11:26 AM IST
सार
कई श्रद्धालुओं ने कोरोना संक्रमण और निजी कारणों से तर्पण के लिए सोरों नहीं पहुंचने की बात बताई। इस पर पुरोहितों ने श्रद्धालुओं के अनुरोध पर स्वयं श्राद्धकर्म कर श्रद्धालुओं के पूर्वजों को तर्पण किया।
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तर्पण करते पुरोहित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तीर्थनगरी सोरों में यूं तो प्रतिदिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों के श्रद्धालु श्राद्धकर्म के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन तमाम श्रद्धालु कोरोना संक्रमण और निजी समस्याओं के कारण सोरों नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं के अनुरोध पर पुरोहित स्वयं पूर्वजों का श्राद्धकर्म कर रहे हैं।
द्वादशी तिथि पर सोमवार को श्राद्धकर्म करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। निजी साधनों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने तीर्थनगरी में मुंडन संस्कार करा अपने पितृों को तर्पण किया।
पुरोहितों ने श्राद्ध पूजा कराई। वहीं कई श्रद्धालुओं ने कोरोना संक्रमण और निजी कारणों से तर्पण के लिए सोरों नहीं पहुंचने की बात बताई। इस पर पुरोहितों ने श्रद्धालुओं के अनुरोध पर स्वयं श्राद्धकर्म कर श्रद्धालुओं के पूर्वजों को तर्पण किया।
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द्वादशी तिथि पर सोमवार को श्राद्धकर्म करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। निजी साधनों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने तीर्थनगरी में मुंडन संस्कार करा अपने पितृों को तर्पण किया।
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पुरोहितों ने श्राद्ध पूजा कराई। वहीं कई श्रद्धालुओं ने कोरोना संक्रमण और निजी कारणों से तर्पण के लिए सोरों नहीं पहुंचने की बात बताई। इस पर पुरोहितों ने श्रद्धालुओं के अनुरोध पर स्वयं श्राद्धकर्म कर श्रद्धालुओं के पूर्वजों को तर्पण किया।
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सूकरक्षेत्र में पितृपक्ष में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु अपने पितृों की श्राद्ध पूजा के लिए आ रहे हैं। हालांकि कई श्रद्धालु आने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं। द्वादशी तिथि पर भी कई श्रद्धालुओं ने आने में असमर्थता जाहिर की और अनुरोध किया कि उनके पितृों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध पूजा करा दी जाए। इसलिए हमने स्वयं श्रद्धालु की भूमिका निभाते हुए उनके पूर्वजों को जल तर्पण किया। - पंडित राधारमण महेरे।
जो श्रद्धालु द्वादशी तिथि पर तर्पण के लिए तीर्थनगरी नहीं आ पाए। उनके पूर्वजों को हमने विधि विधानपूर्वक तर्पण कर दिया है। कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पितृ विसर्जनी अमावस्या पर आकर विधि विधानपूर्वक पूर्वजों के लिए तर्पण करेंगे। श्रद्धा के साथ श्राद्धकर्म कराया जा रहा है। - पंडित दिलीप वशिष्ठ।
जो श्रद्धालु द्वादशी तिथि पर तर्पण के लिए तीर्थनगरी नहीं आ पाए। उनके पूर्वजों को हमने विधि विधानपूर्वक तर्पण कर दिया है। कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पितृ विसर्जनी अमावस्या पर आकर विधि विधानपूर्वक पूर्वजों के लिए तर्पण करेंगे। श्रद्धा के साथ श्राद्धकर्म कराया जा रहा है। - पंडित दिलीप वशिष्ठ।