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Pitru Amavasya 2021: भूल गए तिथियां तो अमावस्या पर करें याद, ऋषियों, देवताओं और पितरों का एक साथ करें तर्पण

Wed, 06 Oct 2021 05:05 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क,अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 06 Oct 2021 05:05 PM IST
सार

अश्विन माह की कृष्ण अमावस्या श्राद्ध का अंतिम दिन होता है। इस अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितर पृथ्वी लोक से विदा लेते हैं। इसलिए इस दिन पितरों का स्मरण करके जल अवश्य देना चाहिए।

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Sarva Pitru Amavasya 2021: Pitru Amavasya 2021 Vidhi And Tithi Today News
सर्व पितृ अमावस्या 2021: हरि की पदी सोरों - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अश्विन माह की कृष्ण अमावस्या जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है, आज बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन पितृपक्ष का समापन होगा। इसे विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों, देवताओं और ऋषियों को विधि-विधान पूर्वक तर्पण करें तो विशेष आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। भूली बिसरी तिथियों का तर्पण भी अमावस्या पर बेहद फलदायी माना गया है।

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 वैसे तो प्रत्येक पर्व पर ग्रह-नक्षत्रों का अपना महत्व होता है, लेकिन पितृ अमावस्या पर सिर्फ पितरों को याद करने के लिए विधि-विधान पूर्वक तर्पण किया जाता है। पितृ अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करके पितृ ऋण को उतारा जा सकता है। अगर किसी को अपने पिता की पुण्यतिथि याद नहीं है तो वह सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म कर उन्हें याद कर सकता है। मान्यता है कि इस दिन सोरों में श्राद्ध कर्म करने से व्यक्ति सात पीढ़ियों तक पितरों का उद्धारक बन जाता है।
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पृथ्वी लोक से विदा होते हैं पितर
अश्विन माह की कृष्ण अमावस्या श्राद्ध का अंतिम दिन होता है। इस अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितर पृथ्वी लोक से विदा लेते हैं। इसलिए इस दिन पितरों का स्मरण करके जल अवश्य देना चाहिए। जिन पितरों की पुण्यतिथि की जानकारी न हो उन सभी पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को करना चाहिए। श्राद्ध के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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इस तरह करें तर्पण 
इस दिन देवताओं का तर्पण चावल से, ऋषियों का तर्पण जौ से और पितरों का तर्पण तिल से करना चाहिए। विधि-विधान पूर्वक तर्पण करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

ये बोले ज्योतिषाचार्य 
सोरों के ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल बशिष्ठ ने बताया कि पितृ अमावस्या का दिन पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है जो संताने अपने पितरों की पुण्यतिथि भूल गए हैं। वह इस अमावस्या पर पितरों का तर्पण करें। पितरों के साथ साथ देवता और ऋषियों का भी तर्पण करना चाहिए।

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