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UP: पैराट्रूपर की माैत...जंप के दाैरान नहीं खुले दोनों पैराशूट, 2 किमी दूर खेत में मिले; लगा चुके थे 600 छलांग

Sun, 09 Feb 2025 03:35 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sun, 09 Feb 2025 03:35 PM IST
सार

जूनियर वारंट अफसर जीएस मंजूनाथ 11 जवानों को साथ लेकर प्रशिक्षण के लिए एएन-32 से मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में कूदे थे। 11 जवान पहुंच गए, लेकिन मंजूनाथ नहीं पहुंचे। तलाश के बाद वह सुतेड़ी गांव में गेहूं के खेत में पड़े मिले। 

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Paratrooper dies after his parachute doesnot open during jump in Agra
पैराशूट नहीं खुलने की वजह से यहीं गिरे थे पैराट्रूपर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में प्रशिक्षण के दौरान पैराशूट नहीं खुलने से शुक्रवार को कर्नाटक के पैराट्रूपर जीएस मंजूनाथ की मौत हो गई। उनके पास दो पैराशूट थे। जंप के दौरान दोनों ही नहीं खुले। ऐसे में हादसे की वजह पैराशूट में आई तकनीकी खराबी हो सकती है। हालांकि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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वायुसेना ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। विंग कमांडर रोहित दहिया के नेतृत्व में जूनियर वारंट अफसर जीएस मंजूनाथ सुबह 8:30 बजे 11 जवानों को साथ लेकर प्रशिक्षण के लिए एएन-32 से मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में कूदे थे। 11 जवान पहुंच गए, लेकिन मंजूनाथ नहीं पहुंचे। तलाश के बाद वह सुतेड़ी गांव में गेहूं के खेत में पड़े मिले। सैन्य अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

 
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बताया जा रहा है कि मंजूनाथ को 600 उड़ानों का अनुभव था। ऐसे में उनके स्तर से लापरवाही की गुंजाइश नहीं थी। फ्री फॉल डाइव के दौरान उड़ान भरने के दो मिनट बाद पैराशूट खुल जाता है। मंजूनाथ के मामले में ऐसा नहीं हुआ। मुख्य पैराशूट नहीं खुला। आकस्मिक स्थिति के लिए दूसरा पैराशूट भी था, वो भी नहीं खुला। 

दोनों पैराशूट नहीं खुलने के कारण वह आसमान से सीधे जमीन पर आ गिरे। उनकी जान चली गई। 36 वर्षीय जूनियर वारंट अफसर मंजूनाथ कर्नाटक के शिमोगा जिले के संलुरू गांव के रहने वाले थे।

 
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खुद चुनी थी पैरा रेजिमेंट
जीएस मंजूनाथ चार महीने पहले पैरा ट्रेनिंग स्कूल में आए थे। पांच साल हिंडन एयरबेस पर रहे थे। उन्होंने खुद पैरा रेजिमेंट काे चुना था। एएन-32 से उड़ान भरने के बाद उन्हें मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में उतरना था। लेकिन, निर्धारित स्थल से दो किमी दूर सुतेड़ी गांव में वह गिर थे। जीपीएस से उनकी लोकेशन खंगाली गई।

 

इकलौता स्कूल जहां तैयार होते हैं पैरा कमांडो
देश का इकलौता पैरा ट्रेनिंग स्कूल आगरा में है। यहां पैरा कमांडो तैयार किए जाते हैं। पैराशूट से जंप का प्रशिक्षण कोर्स के लिए हर साल यहां 30 हजार से अधिक जवान आते हैं। 40 हजार से अधिक उड़ान होती है। आगरा में एडीआरडीए लैब है, जहां पैराशूट बनाए जाते हैं।
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