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UP: प्रधान डाकघर की भव्य इमारत...डरा रही यहां की छत, दिनभर दहशत में रहते हैं कर्मचारी और उपभोक्ता
Fri, 22 Aug 2025 02:17 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 22 Aug 2025 02:17 PM IST
सार
प्रधान डाकघर के कर्मचारी हो या फिर उपभोक्ता, जिसकी नजर भी छत की ओर जाती है, वो डरने लगता है। वजह है कि छत का जर्जर हुआ प्लास्टर, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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प्रधान डाकघर आगरा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा का सबसे पुराने प्रतापपुरा डाकघर की दर-ओ-दीवार दरक रही है। बाहर से ये इमारत जितनी भव्य लगती है। अंदर से उतनी ही बदहाल है। मुख्य इमारत की छत से प्लास्टर गिर रहा है। सरिया तक निकल आई हैं। ऐसे में यहां काम करने वाले कर्मचारी और उपभोक्ताओं के साथ दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
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माल रोड पर स्थित प्रतापपुरा प्रधान डाकघर में रोजाना करीब 300 से ज्यादा उपभोक्ता डाक से संबंधित कार्यों के लिए आते हैं। इसके साथ ही यहां काम करने वाले करीब 80 कर्मचारी भी हैं। जो सुबह से शाम तक यहां बैठकर काम करते हैं। बरसात के मौसम में सीलन के चलते प्लास्टर गिरने का खतरा और बढ़ गया है।
हालत ये हैं कि कर्मचारी और उपभोक्ताओं की एक नजर काम पर और दूसरी छत पर रहती है। डाकघर में कई स्थानों पर प्लास्टर गिरने से सरिया तक निकल आई हैं। इसके अलावा कई जगह प्लास्टर गिरासु है। छत से गिरते हुए प्लास्टर को रोकने के लिए डाक विभाग ने नेट लगा दिया है। लेकिन ये नेट प्लास्टर के बड़े टुकड़े से बचाव के लिए नाकाफी है।
हालत ये हैं कि कर्मचारी और उपभोक्ताओं की एक नजर काम पर और दूसरी छत पर रहती है। डाकघर में कई स्थानों पर प्लास्टर गिरने से सरिया तक निकल आई हैं। इसके अलावा कई जगह प्लास्टर गिरासु है। छत से गिरते हुए प्लास्टर को रोकने के लिए डाक विभाग ने नेट लगा दिया है। लेकिन ये नेट प्लास्टर के बड़े टुकड़े से बचाव के लिए नाकाफी है।
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छत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
112 साल पुराना है डाकघर
प्रतापपुरा डाकघर शहर का सबसे पुराना डाकघर है। इसकी स्थापना 1913 में ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। डाकघर को करीब 112 साल बीत चुके हैं। यह देश के उन गिने-चुने डाकघरों में से एक है जो एक शताब्दी बाद भी प्रयोग में हैं।
प्रतापपुरा डाकघर शहर का सबसे पुराना डाकघर है। इसकी स्थापना 1913 में ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। डाकघर को करीब 112 साल बीत चुके हैं। यह देश के उन गिने-चुने डाकघरों में से एक है जो एक शताब्दी बाद भी प्रयोग में हैं।
मरम्मत को भेजा है प्रस्ताव
प्रतापपुरा प्रधान डाकघर के प्रवर डाकपाल शशिकांत ने बताया कि छत की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। गिरते प्लास्टर से बचाव के लिए नेट लगा रखा है।
प्रतापपुरा प्रधान डाकघर के प्रवर डाकपाल शशिकांत ने बताया कि छत की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। गिरते प्लास्टर से बचाव के लिए नेट लगा रखा है।