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आगरा: पांच-पांच बार शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समस्या का समाधान, ऐसा है जनसुनवाई का हाल

Mon, 08 Mar 2021 02:12 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 08 Mar 2021 02:12 PM IST
सार

  • जनसुनवाई के मामले में 75वीं रैंक के साथ सबसे आखिरी पायदान पर है आगरा
  • तहसील से कलक्ट्रेट तक समस्याएं लेकर भटक रहे आवेदक, जांच न कोई समाधान

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officers ignores  the problems of people in agra
जनसुनवाई

विस्तार

सूबे में 75 जिले हैं। जनसुनवाई में आगरा सबसे आखिरी 75वें पायदान पर है। तहसील दिवस से लेकर थाना दिवस, कलक्ट्रेट तक शिकायतों का पहाड़ हैं। एक-एक शिकायत के लिए पांच-पांच बार चक्कर काटने के बाद भी समस्याएं जस की तस हैं। ये हालात तब हैं, जब डीएम, एसएसपी से लेकर आईजी, डीआईजी तक समाधान दिवस में जनसुनवाई के लिए पहुंच रहे हैं। जनसुनवाई व्यवस्था की हकीकत बयां करती अमर उजाला की रिपोर्ट। 

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केस-एक: 
6 बार फरियाद, नहीं बना नाला धनौली

अजीजपुर में बच्चा जेल के पास दोनों तरफ कच्चा नाला उफनाने से नारकीय हालात हैं। पीड़ित प्रेम सिंह ने बताया कि 13 अक्तूबर को क्षेत्रीय लोगों ने धरना दिया। अफसरों ने 3 महीने में नाला निर्माण का वादा किया। इसके बाद तहसील दिवस 15 दिसंबर से पांच बार फरियाद कर चुके, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। 
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केस- दो: 
हमारे लिए जहर का इंतजाम कर दीजिए

ताजगंज के नंदा बाजार में अमित पोरवाल की रस्सी, निवार की दुकान है। दुकान के बाहर बंद पशु प्याऊ है। इसे हटवाने के लिए उनकी 10 वर्षीय पुत्री अविका ने एसडीएम से 19 जनवरी को गुहार लगाई। साथ ही लिखा कि अगर कुछ नहीं कर सकते हो तो हमारे लिए जहर का इंतजाम कर दीजिए। तीन महीने बाद भी अमित अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।

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केस-तीन: 
बच्चे के प्रवेश के लिए 9 महीने से भटकता पिता

वजीरपुरा निवासी संतोष ने शिक्षा अधिकार के तहत पुत्र आरब का प्री-नर्सरी में प्रवेश के लिए जुलाई 2020 आवेदन किया। जून में सूची में उसे गायत्री स्कूल मिला, लेकिन 9 महीने बाद भी विद्यालय प्रबंधन ने प्रवेश नहीं दिया। तीन महीने में पांच शिकायती पत्र देने के बाद भी संतोष अपने बच्चे के प्रवेश के लिए भटक रहा है।

कागजों में हो रहा निस्तारण
तहसील दिवस में हर महीने 150 से 200 शिकायतें दर्ज होती हैं। 2 मार्च तक 6 तहसील दिवस में 680 और जिलाधिकारी कार्यालय में तीन महीने में 2140 शिकायत दर्ज हुईं। इनमें 80 फीसदी कागजों में निस्तारित हो गईं, लेकिन फरियादी इससे संतुष्ट नहीं हैं। 

140 शिकायतों में 3 से 5 बार तक आवेदकों ने दोबारा शिकायतें कीं। जांच अधिकारी मौका-मुआयना करने तक नहीं गए। बरारा निवासी गौरव ने बताया कि मैं 3 महीने में पांच बार शिकायत कर चुका, लेकिन गांव में तालाब से अवैध कब्जा नहीं हटा। 

सबसे ज्यादा ये शिकायतें
- बच्चों की फीस, प्रवेश की 18 शिकायतें
- बिजली बिल संशोधन की  20 शिकायतें
- गांव में पेयजल किल्लत की 16 शिकायतें
- सीवर व नाला सफाई की 12 शिकायतें
( नोट: दो महीने से पोर्टल पर दर्ज विवरण के आधार पर)

इसी महीने से दिखेगा सुधार, रोज करूंगा समीक्षा- जिलाधिकारी
सवाल : जन शिकायतों पर सुनवाई क्यों नहीं हो रही।
जवाब : सुनवाई होती है, कुछ मामलों में लापरवाही हुई है।
सवाल : फिर एक शिकायत पांच-पांच बार क्यों आती है।
जवाब : आवेदक संतुष्ट नहीं होता तो दोबारा शिकायत करता है।
सवाल : एक बार में गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण क्यों नहीं होता।
जवाब : त्वरित व सही निस्तारण के लिए अब थर्ड पार्टी जांच होगी।
सवाल : जनसुनवाई में 75वीं रैंक के लिए कौन जिम्मेदार है।
जवाब : निश्चित रूप से मैं मानता हूं ये मेरी जिम्मेदारी है।
सवाल : सुधार कैसे करेंगे, क्या कार्य योजना है आपके पास।
जवाब : इसी महीने से रैकिंग में सुधार दिखेगा, मैं रोज समीक्षा करूंगा।
(जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह के जवाब)
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