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UP: अब 70 के बजाय 50 की उम्र में हिलने लगे दांत...बच्चों के भी मंसूड़े हो रहे खोखले, जानें कैसे खुद को बचाएं
Sun, 06 Apr 2025 02:14 PM IST
अरुन पाराशर
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 06 Apr 2025 02:14 PM IST
सार
दांतों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। मोटा अनाज से दूरी, फल-सलाद को काटकर खाने और कम चबाने की आदत से बच्चों, किशोरों और युवाओं में भी मसूड़े कमजोर मिल रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों ने आगाह किया है।
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कार्यशाला में शामिल चिकित्सक।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
तंबाकू-पान मसाला, शराब, फास्टफूड के शौकीनों के मसूड़े और जबड़े बीमार पड़ रहे हैं। संक्रमण और खोखले होने से 50 की उम्र में ही दांत हिलने लग रहे हैं। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में इंडियन एसोसिएशन कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडोंटिक्स कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताते हुए व्याख्यान दिए।
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महाराष्ट्र के लातूर से आए डॉ. अभिषेक आर. बादाडे ने कहा कि 15-20 साल पहले तक 70 साल से अधिक उम्र में दांत हिलते और गिरते थे। अब हालत ये है कि 50 की उम्र में ही मसूड़े खोखले और जबड़े कमजोर हो जा रहे हैं। 38 फीसदी मरीजों में यह दिक्कत है। ये मरीज तंबाकू-खैनी, पान मसाला, शराब-धूम्रपान, जंक-फास्ट फूड, मीठा और तला भोजन अधिक खाते थे। संक्रमण से नस तक डैमेज होने लगी। घाव पनपने से 5 से 7 दांत खराब हो गए।
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कम चबाना भी खतरनाक
डॉ. अभिषेक ने कहा कि भोजन सही ढंग से चबाने में दिक्कत होने से पेट में संक्रमण, एसिड बनना, पेट फूलना, मोटापा, आंत संबंधी बीमारियां भी मिलीं। मोटा अनाज से दूरी, फल-सलाद को काटकर खाने और कम चबाने की आदत से बच्चों, किशोरों और युवाओं में भी मसूड़े कमजोर मिल रहे हैं। कार्यशाला में इंडियन डेंटल एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष डॉ. विवेक शाह, सचिव डॉ. एनएस लोधी, एसएन कॉलेज के दंत रोग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कठारिया, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. राघवेंद्र दुबे, डॉ. गुलशन सिंह आदि मौजूद रहे।
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डॉ. अभिषेक ने कहा कि भोजन सही ढंग से चबाने में दिक्कत होने से पेट में संक्रमण, एसिड बनना, पेट फूलना, मोटापा, आंत संबंधी बीमारियां भी मिलीं। मोटा अनाज से दूरी, फल-सलाद को काटकर खाने और कम चबाने की आदत से बच्चों, किशोरों और युवाओं में भी मसूड़े कमजोर मिल रहे हैं। कार्यशाला में इंडियन डेंटल एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष डॉ. विवेक शाह, सचिव डॉ. एनएस लोधी, एसएन कॉलेज के दंत रोग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कठारिया, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. राघवेंद्र दुबे, डॉ. गुलशन सिंह आदि मौजूद रहे।
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रूट कैनाल कराने की दर हुई दोगुना
दिल्ली के डॉ. प्रशांत भसीन ने बताया कि रूट कैनाल कराने की दर बीते 10 साल में डेढ़ से दोगुना तक बढ़ गई है। पहले खुली आंखों से रूट कैनाल किए जाते थे। इससे दोबारा संक्रमण का खतरा रहता था। अब माइक्रोस्कोप से रूट कैनाल हो रहे हैं। इसमें दांत के अंदर तक संक्रमण और अन्य परेशानियां देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि रूट कैनाल लेजर तकनीकी से भी किया जा रहा है। माइक्रोस्कोप-लेजर तकनीकी से रूट कैनाल करने से लगभग 25-30 साल तक आसानी से दांत कार्य करते रहते हैं।
बचाव के ये उपाय
- तंबाकू, पान मसाला, शराब, धूम्रपान और जंक-फास्ट फूड से बचें।
- फल, गाजर-मूली को चाकू से काटने के बजाय साबुत ही दांतों से काटकर खाएं।
- खाने के बाद कुल्ला करें। हल्के हाथों से रोजाना सुबह-शाम ब्रश करें।
- तीन मिनट से अधिक समय तक ब्रश न करें, दांतों पर दबाव न डालें।
- काला मंजन इस्तेमाल न करें, अंगुली से रगड़कर दांतों को साफ न करें।
- दांतों में गंदगी, सूजन समेत कोई दिक्कत होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
दिल्ली के डॉ. प्रशांत भसीन ने बताया कि रूट कैनाल कराने की दर बीते 10 साल में डेढ़ से दोगुना तक बढ़ गई है। पहले खुली आंखों से रूट कैनाल किए जाते थे। इससे दोबारा संक्रमण का खतरा रहता था। अब माइक्रोस्कोप से रूट कैनाल हो रहे हैं। इसमें दांत के अंदर तक संक्रमण और अन्य परेशानियां देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि रूट कैनाल लेजर तकनीकी से भी किया जा रहा है। माइक्रोस्कोप-लेजर तकनीकी से रूट कैनाल करने से लगभग 25-30 साल तक आसानी से दांत कार्य करते रहते हैं।
बचाव के ये उपाय
- तंबाकू, पान मसाला, शराब, धूम्रपान और जंक-फास्ट फूड से बचें।
- फल, गाजर-मूली को चाकू से काटने के बजाय साबुत ही दांतों से काटकर खाएं।
- खाने के बाद कुल्ला करें। हल्के हाथों से रोजाना सुबह-शाम ब्रश करें।
- तीन मिनट से अधिक समय तक ब्रश न करें, दांतों पर दबाव न डालें।
- काला मंजन इस्तेमाल न करें, अंगुली से रगड़कर दांतों को साफ न करें।
- दांतों में गंदगी, सूजन समेत कोई दिक्कत होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।