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बैंकों के लिए 485 करोड़ रुपये की ऋण वसूली बन रही चुनौती
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कासगंज। जिले की बैंकों के सामने ऋण अदा न करने वाले कर्जदारों की लंबी फैरिस्त है। 485 करोड़ रुपये के ऋण की वसूली नहीं हो पा रही है। बैंकों के लिए डिफॉल्टर हुए कर्जदारों से वसूली करना चुनौती बना हुआ है। बैंक लगातार सुलह, समझौते व कानूनी तरीके इस्तेमाल करके वसूली की कोशिशों में जुटे हैं। गांव-गांव में बैंक मित्रों की टीमें सक्रिय की गई हैं। वहीं कर्जदारों के गारंटरों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
किसान, उद्यमी व अन्य योजनाओं के अंतर्गत बैंकों के द्वारा ऋण उपलब्ध कराया जाता है। ज्यादातर ऋण खातों में ऋण पर संपत्ति को भी बंधक किया जाता है और गारंटर भी रहते हैं, लेकिन जब कर्जदार ऋण नहीं चुका पाते तो ऐसी स्थिति में बैंक के सामने वसूली करना बड़ी समस्या बन जाता है। बैंक के प्रबंधक और फील्ड ऑफिसर ऋण वसूली के लिए ऋणदाता से संपर्क करते हैं तो वे मुंह छिपाए रहते हैं। जिले में अब तक सभी बैंकों के 485 करोड़ रुपये के ऋण खाते एनपीए (नॉन परफॉरमेंस एसेट) हो चुके हैं। इसमें राष्ट्रीयकृत बैंकें और ग्रामीण बैंके शामिल हैं। बैंके डिफॉल्टरों को लीगल नोटिस भी दे रही हैं। इसके साथ ही बैंकमित्र गांव-गांव पहुंचकर ऋणदाताओं और गारंटरों से संपर्क कर वसूली के लिए प्रेरित करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक आदेश दिया है जिसमें अब गारंटरों की जवाबदेही तय कर दी गई है। स्पष्ट कर दिया गया है कि जो डिफॉल्टर कर्जदार गायब हैं उनके गारंटर कर्ज की वसूली के जिम्मेदार होंगे। न्यायालय के इस आदेश के बाद बैंकों को पैसा वापसी की उम्मीद बढ़ गई है।
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आंकड़े की नजर से-
- 1379 करोड़ रुपये का कर्ज दे चुकी हैं बैंकें।
- 753 करोड़ रुपये का कर्ज है किसानों पर।
- 485 करोड़ रुपये के खाते हुए एनपीए।
बैंकों के जो कर्जदार डिफॉल्टर हैं उनके घरों तक नोटिस भेजे जा रहे हैं। एनपीए होने पर बैंक की ओर से कर्जदार के साथ साथ गारंटरों को भी नोटिस दिया जा रहा है। गारंटरों की जवाबदेही तय कराई जा रही है। जिले में 485 करोड़ रुपये के खाते एनपीए हो चुके हैं। - महेश प्रकाश, एलडीएम।
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किसान, उद्यमी व अन्य योजनाओं के अंतर्गत बैंकों के द्वारा ऋण उपलब्ध कराया जाता है। ज्यादातर ऋण खातों में ऋण पर संपत्ति को भी बंधक किया जाता है और गारंटर भी रहते हैं, लेकिन जब कर्जदार ऋण नहीं चुका पाते तो ऐसी स्थिति में बैंक के सामने वसूली करना बड़ी समस्या बन जाता है। बैंक के प्रबंधक और फील्ड ऑफिसर ऋण वसूली के लिए ऋणदाता से संपर्क करते हैं तो वे मुंह छिपाए रहते हैं। जिले में अब तक सभी बैंकों के 485 करोड़ रुपये के ऋण खाते एनपीए (नॉन परफॉरमेंस एसेट) हो चुके हैं। इसमें राष्ट्रीयकृत बैंकें और ग्रामीण बैंके शामिल हैं। बैंके डिफॉल्टरों को लीगल नोटिस भी दे रही हैं। इसके साथ ही बैंकमित्र गांव-गांव पहुंचकर ऋणदाताओं और गारंटरों से संपर्क कर वसूली के लिए प्रेरित करेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक आदेश दिया है जिसमें अब गारंटरों की जवाबदेही तय कर दी गई है। स्पष्ट कर दिया गया है कि जो डिफॉल्टर कर्जदार गायब हैं उनके गारंटर कर्ज की वसूली के जिम्मेदार होंगे। न्यायालय के इस आदेश के बाद बैंकों को पैसा वापसी की उम्मीद बढ़ गई है।
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आंकड़े की नजर से-
- 1379 करोड़ रुपये का कर्ज दे चुकी हैं बैंकें।
- 753 करोड़ रुपये का कर्ज है किसानों पर।
- 485 करोड़ रुपये के खाते हुए एनपीए।
बैंकों के जो कर्जदार डिफॉल्टर हैं उनके घरों तक नोटिस भेजे जा रहे हैं। एनपीए होने पर बैंक की ओर से कर्जदार के साथ साथ गारंटरों को भी नोटिस दिया जा रहा है। गारंटरों की जवाबदेही तय कराई जा रही है। जिले में 485 करोड़ रुपये के खाते एनपीए हो चुके हैं। - महेश प्रकाश, एलडीएम।