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Agra News: सरकारी जमीन पर जारी एनओसी व नक्शा निरस्त, बिल्डर व आर्किटेक्ट पर होगी प्राथमिकी
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आगरा। सरकारी नजूल भूमि पर कूटरचित दस्तावेज के आधार पर एनओसी प्राप्त कर अवैध निर्माण कराने के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देशों के बाद आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने संबंधित भूखंड को जारी एनओसी व स्वीकृत नक्शा निरस्त कर दिया। साथ ही फर्जीवाड़ा करने की आरोपी बिल्डर मालती शर्मा और आर्किटेक्ट गोविंद सिंह के खिलाफ प्राथमिकी के लिए थाने में तहरीर दी है।
पूरा प्रकरण कोतवाली वार्ड के अंतर्गत गुड़ की मंडी, हनुमान गली स्थित प्लॉट संख्या 14/265, 14/266 (भाग) व 14/270 से संबंधित है। अमर उजाला में 25 सितंबर के अंक में सरकारी जमीन पर दे दी एनओसी...बन गई अवैध इमारत शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम मनीष बंसल ने एडीएम प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार वर्मा और एडीए सचिव संजय कुमार की संयुक्त जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे।
दोनों अधिकारियों ने दस्तावेज और मौके का निरीक्षण किया। जांच में जमीन राजकीय आस्थान (नजूल भूखंड) के रूप में दर्ज मिली। आरोप है कि इसके बावजूद बिल्डर व आर्किटेक्ट ने मिलीभगत कर दस्तावेज में छेड़छाड़ कर कूटचरित दस्तावेज और फर्जी एनओसी पोर्टल पर अपलोड कर दिए। यही नहीं, प्राधिकरण से केवल आवासीय निर्माण की स्वीकृति मिलने के बावजूद स्वीकृत मानचित्र के विपरीत बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत खड़ी कर दी। अब जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कूटरचित दस्तावेजों से बनी इस अवैध इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर चलाने की प्रशासनिक तैयारी शुरू हो चुकी है।
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एक साल तक आंखें मूंदे रहे जिम्मेदार
जांच में पाया गया कि एडीए के जिम्मेदार अधिकारियों ने अभिलेखों का गहन परीक्षण किए बिना ही आनन-फानन में नक्शा स्वीकृत कर दिया और एक वर्ष तक अवैध व्यावसायिक निर्माण चलने पर भी आंखें मूंदे रहे। इस घोर लापरवाही और शिथिलता पर कार्रवाई करते हुए संबंधित सहायक अभियंता (एई), अवर अभियंता (जेई) और मानचित्र पटल के कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कठोर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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पूरा प्रकरण कोतवाली वार्ड के अंतर्गत गुड़ की मंडी, हनुमान गली स्थित प्लॉट संख्या 14/265, 14/266 (भाग) व 14/270 से संबंधित है। अमर उजाला में 25 सितंबर के अंक में सरकारी जमीन पर दे दी एनओसी...बन गई अवैध इमारत शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम मनीष बंसल ने एडीएम प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार वर्मा और एडीए सचिव संजय कुमार की संयुक्त जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे।
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दोनों अधिकारियों ने दस्तावेज और मौके का निरीक्षण किया। जांच में जमीन राजकीय आस्थान (नजूल भूखंड) के रूप में दर्ज मिली। आरोप है कि इसके बावजूद बिल्डर व आर्किटेक्ट ने मिलीभगत कर दस्तावेज में छेड़छाड़ कर कूटचरित दस्तावेज और फर्जी एनओसी पोर्टल पर अपलोड कर दिए। यही नहीं, प्राधिकरण से केवल आवासीय निर्माण की स्वीकृति मिलने के बावजूद स्वीकृत मानचित्र के विपरीत बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत खड़ी कर दी। अब जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कूटरचित दस्तावेजों से बनी इस अवैध इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर चलाने की प्रशासनिक तैयारी शुरू हो चुकी है।
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एक साल तक आंखें मूंदे रहे जिम्मेदार
जांच में पाया गया कि एडीए के जिम्मेदार अधिकारियों ने अभिलेखों का गहन परीक्षण किए बिना ही आनन-फानन में नक्शा स्वीकृत कर दिया और एक वर्ष तक अवैध व्यावसायिक निर्माण चलने पर भी आंखें मूंदे रहे। इस घोर लापरवाही और शिथिलता पर कार्रवाई करते हुए संबंधित सहायक अभियंता (एई), अवर अभियंता (जेई) और मानचित्र पटल के कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कठोर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।