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Mainpuri: फर्जी जाति प्रमाणपत्र प्रकरण में दोषी अफसरों पर प्रशासन मेहरबान, अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

Tue, 21 Jun 2022 12:14 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 21 Jun 2022 12:14 AM IST
सार

फर्जी जाति प्रमाणपत्र के मामले में प्रधान को पद से हटाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी गई, लेकिन दोषी अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

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No action has been taken on the accused officers in the fake caste certificate case in mainpuri
मैनपुरी कलेक्ट्रेट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैनपुरी के विकास खंड किशनी की ग्राम पंचायत अरसारा में फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने पर शासन ने जिलाधिकारी को दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। मामले में प्रधान को पद से हटाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी गई, लेकिन दोषी अधिकारियों पर जिला प्रशासन मेहरबान है। अब तक उन पर न तो उन पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, न ही कोई अन्य कार्रवाई की गई है। 

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ग्राम पंचायत अरसारा के राजेश बाबू ने अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ा और निर्वाचित भी हुए। उनका प्रमाण पत्र फर्जी होने की शिकायत अमित दिवाकर ने की थी। सुनवाई के बाद तत्कालीन डीएम ने प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। राजेश की अपील पर राज्य स्तरीय स्क्रूटिनी कमेटी ने डीएम के आदेश को बरकरार रखा और दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसमें तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल पर कार्रवाई के लिए भी लिखा था। 
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राज्य स्तरीय स्क्रूटिनी कमेटी के अध्यक्ष प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग हिमांशु कुमार के पांच मई 2022 को आए आदेश के बाद डीएम ने प्रधान राजेश बाबू को पद से हटा दिया, लेकिन दोषी अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि मामले में लेखपाल को तत्कालीन डीएम निलंबित कर चुके हैं। 

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तीन लोगों पर दर्ज है एफआईआर 

छह जून 2022 को थाना किशनी में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में तत्कालीन तहसीलदार कमल सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें राजेश बाबू के अलावा गांव अरसारा निवासी हरेंद्र यादव और एटा के गांव बनिया निवासी विमलचंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। 

ये होती है विधिक कार्रवाई 

राज्य स्क्रूटिनी कमेटी ने डीएम को निर्देशित किया था कि वे तत्कालीन तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करें। जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) अजीत नरायन चौहान के अनुसार विधिक कार्रवाई में एफआईआर के साथ विभागीय कार्रवाई भी शामिल है। शासकीय कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आवश्यक है। इसीलिए स्क्रूटिनी कमेटी ने विधिक कार्रवाई के आदेश दिए होंगे। 

किशनी के एसडीएम जयप्रकाश ने कहा कि राज्य स्क्रूटिनी कमेटी ने तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। कानूनगो की जाति प्रमाणपत्र जारी करने में कोई भूमिका नहीं है। लेखपाल को पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है। तहसीलदार पर शासनस्तर से ही कार्रवाई की जाएगी। 

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