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यूपी: पढ़ाई के लिए वीजा लेकर आए दो विदेशियों ने 100 व्यापारियों से 15 करोड़ ठगे, ऐसे आए पकड़ में
Thu, 04 Apr 2024 03:54 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 04 Apr 2024 03:54 PM IST
सार
पढ़ाई के लिए वीजा लेकर आए दो विदेशी युवकों ने ऐसा गिरोह बना डाला, जिसके खुलासे के बाद पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
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पुलिस गिरफ्त में नाईजीरियाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा पुलिस को बड़ी सफलात मिली है। 100 व्यापारियों से 15 करोड़ रुपये की आनलाइन धोखाधड़ी करने वाले दो अफ्रीकी नागरिकों को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया है। आरोपी वेयर हाउस की फर्जी वेबसाइट बनाकर व्यापारियों को अलग-अलग प्रोडक्ट भेजने का झांसा देते थे। फर्जी नाम और पते पर खोले गए खातों में रकम जमा करा लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के 2 खातों को फ्रीज किया है। उनमें 15 दिन में 50 लाख का लेन-देन हुआ है।
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एसीपी साइबर क्राइम आदित्य कुमार ने बताया कि फतेहाबाद स्थित बलोखरा निवासी एग्रो इंडस्ट्रीज के मालिक राजीव पालीवाल से साइबर ठगी हुई थी। उन्होंने जूट के बोरे खरीदने के लिए गूगल पर सर्च किया था। नागालैंड की भीमराज इंडस्ट्रीज के नाम से रजिस्टर्ड वेबसाइट पर संपर्क करने पर 782000 रुपये जमा करा लिए गए। मगर, माल नहीं भेजा। मामले मेंं शिकायत पर साइबर क्राइम थाना में मुकदमा दर्ज हुआ।
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शिकायत पर साइबर क्राइम टीम ने जांच की। कारोबारी से मोबाइल नंबर, व्हाट्स एप नंबर पर बात हुई थी। कई खातों में रकम जमा कराई गई थी। इनकी जांच के बाद बुधवार को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 17 ए स्थित सुपरटेक अपकाउंट्री से अफ्रीका के कैमरून के रहने वाले अकुंबे बोमा और माइकल बूनेवा को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से ऑडी कार, लैपटॉप, मोबाइल, बॉडबैंड, वाईफाई डिवाइस् बरामद की गई। उनके नागालैंड की बैंकों के दो खातों को भी फ्रीज किया गया है।
स्टडी वीजा पर भारत आकर ठगी
एसीपी ने बताया कि आरोपी स्टडी वीजा पर भारत आकर ठगी कर रहे थे। अकुंबे 6 महीने पहले, जबकि माइकल 3 साल पहले आया था। दोनों ने अलग-अलग फर्जी वेबसाइट बना रखी हैं, जिन पर स्टील उत्पाद, इलेक्ट्रानिक उपकरण, सॉफ्ट ड्रिंक, कृषि उत्पाद आदि की बिक्री का झांसा देते हैं। गूगल पर सर्च करने के बाद व्यापारी जब वेबसाइट पर लिखे नंबर से संपर्क करते थे तो आरोपी ठगी किया करते थे। व्हाट्स एप पर अंग्रेजी और हिंदी में चैट और बातचीत करके डील पक्की करते थे। उत्पाद की फोटो मोबाइल पर भेजते थे। फर्जी नाम और पते पर खुले खातों में रकम जमा करा लेते थे। व्हाट्स एप पर ट्रक नंबर, इनवाइस, फर्जी ईवे बिल, पैकिंग नंबर आदि भेज देते हैं। बाद में माल रास्ते में पकड़े जाने का डर दिखाकर और रकम ले लेते हैं। व्यापारियों से ठगी की रकम से खुद मौज मस्ती करते थे। अकुंबे ने ऑडी कार खरीद रखी थी। पॉश सोसायटी के फ्लैट में रह रहे थे। महंगे कपड़े और जूते पहना करते थे। उनके और भी साथियों की जानकारी पुलिस जुटा रही है।
एसीपी ने बताया कि आरोपी स्टडी वीजा पर भारत आकर ठगी कर रहे थे। अकुंबे 6 महीने पहले, जबकि माइकल 3 साल पहले आया था। दोनों ने अलग-अलग फर्जी वेबसाइट बना रखी हैं, जिन पर स्टील उत्पाद, इलेक्ट्रानिक उपकरण, सॉफ्ट ड्रिंक, कृषि उत्पाद आदि की बिक्री का झांसा देते हैं। गूगल पर सर्च करने के बाद व्यापारी जब वेबसाइट पर लिखे नंबर से संपर्क करते थे तो आरोपी ठगी किया करते थे। व्हाट्स एप पर अंग्रेजी और हिंदी में चैट और बातचीत करके डील पक्की करते थे। उत्पाद की फोटो मोबाइल पर भेजते थे। फर्जी नाम और पते पर खुले खातों में रकम जमा करा लेते थे। व्हाट्स एप पर ट्रक नंबर, इनवाइस, फर्जी ईवे बिल, पैकिंग नंबर आदि भेज देते हैं। बाद में माल रास्ते में पकड़े जाने का डर दिखाकर और रकम ले लेते हैं। व्यापारियों से ठगी की रकम से खुद मौज मस्ती करते थे। अकुंबे ने ऑडी कार खरीद रखी थी। पॉश सोसायटी के फ्लैट में रह रहे थे। महंगे कपड़े और जूते पहना करते थे। उनके और भी साथियों की जानकारी पुलिस जुटा रही है।
फर्जी एजेंट ने की थी व्यापारी से बात
फतेहाबाद स्थित बलोखरा निवासी राजीव पालीवाल की एग्रो इंडस्ट्री है। उन्होंने बताया कि उन्हें जूट की बोरियों की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया। उन्हें भीमराज इंडस्ट्रीज के नाम से रजिस्टर्ड वेबसाइट मिली। यह नागालैंड में पंजीकृत थी। इसमें ईमेल आईडी, जीएसटी नंबर आदि था। उन्होंने कॉल किया। एक नंबर पर बात हुई। इसके बाद व्हाट्स एप पर नीलजन धखर के मैसेज आने लगे। कम कीमत होने की वजह से डील कर ली। इस पर ईमेल आईडी पर 3.80 लाख बोरों को आर्डर दिया। इनकी कीमत 4.52,200 रुपये आनलाइन खाते में जमा करा लिए गए। बाद में लॉजिस्टिक और अन्य सुविधाओं के नाम पर 226100 रुपये और जमा करा लिए। रकम वापसी का आश्वासन देकर 96900 रुपये और ले लिए। मगर, माल की डिलीवरी नहीं की गई। इस पर व्यापारी ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत की।
फतेहाबाद स्थित बलोखरा निवासी राजीव पालीवाल की एग्रो इंडस्ट्री है। उन्होंने बताया कि उन्हें जूट की बोरियों की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने गूगल पर सर्च किया। उन्हें भीमराज इंडस्ट्रीज के नाम से रजिस्टर्ड वेबसाइट मिली। यह नागालैंड में पंजीकृत थी। इसमें ईमेल आईडी, जीएसटी नंबर आदि था। उन्होंने कॉल किया। एक नंबर पर बात हुई। इसके बाद व्हाट्स एप पर नीलजन धखर के मैसेज आने लगे। कम कीमत होने की वजह से डील कर ली। इस पर ईमेल आईडी पर 3.80 लाख बोरों को आर्डर दिया। इनकी कीमत 4.52,200 रुपये आनलाइन खाते में जमा करा लिए गए। बाद में लॉजिस्टिक और अन्य सुविधाओं के नाम पर 226100 रुपये और जमा करा लिए। रकम वापसी का आश्वासन देकर 96900 रुपये और ले लिए। मगर, माल की डिलीवरी नहीं की गई। इस पर व्यापारी ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत की।
150 फर्जी वेबसाइट
पुलिस की पूछताछ में आरोपी विदेशी नागरिकों ने बताया कि अब तक गूगल पर 100 से 150 फर्जी व्यापारिक वेबसाइट बनाई हैं। इनके माध्यम से कॉपर, कृषि, जूतों सहित अन्य व्यापार का झांसा देकर 100 व्यापारियों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। इनसे तकरीबन 15 करोड़ की कमाई भी कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल का मकसूद अली खाते उपलब्ध कराता है। उसे एक खाते के 4 हजार रुपये तक देते हैं। रकम खातों में जमा होने पर मनी एक्सचेंज के माध्यम से अपने देश कैमरून भेज देते हैं। आरोपियों से बरामद मोबाइल की व्हाटस एप 70 व्यापारियों की चैट मिली है। इसकी पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस की पूछताछ में आरोपी विदेशी नागरिकों ने बताया कि अब तक गूगल पर 100 से 150 फर्जी व्यापारिक वेबसाइट बनाई हैं। इनके माध्यम से कॉपर, कृषि, जूतों सहित अन्य व्यापार का झांसा देकर 100 व्यापारियों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। इनसे तकरीबन 15 करोड़ की कमाई भी कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल का मकसूद अली खाते उपलब्ध कराता है। उसे एक खाते के 4 हजार रुपये तक देते हैं। रकम खातों में जमा होने पर मनी एक्सचेंज के माध्यम से अपने देश कैमरून भेज देते हैं। आरोपियों से बरामद मोबाइल की व्हाटस एप 70 व्यापारियों की चैट मिली है। इसकी पुलिस जांच कर रही है।