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प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण का मामला: एनजीटी सख्त, एडीए, नगर निगम समेत चार विभागों को नोटिस; मांगा जवाब
Wed, 26 Aug 2026 10:36 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 26 Aug 2026 10:36 AM IST
सार
प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण की मांग वाली याचिका पर एनजीटी ने एडीए, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने शहर में रोज निकलने वाले करीब आठ टन प्लास्टिक कचरे के खुले में पड़े रहने और जलाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
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प्लास्टिक के कचरेे से सड़क निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में किया जाए। इससे प्लास्टिक कचरा खत्म होने के साथ सड़कों को भी मजबूती मिलेगी। पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की इस याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एडीए, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई से जवाब मांगा है।
आगरा शहर में 800 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। एनजीटी में नगर निगम ने जवाब दिया कि वह पूरा कचरा प्रोसेसिंग कर देता है और कुछ भी नहीं बचता। इस पर याचिकाकर्ता डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने एनजीटी के सामने सवाल उठाया कि 250 मीट्रिक टन कचरा कुबेरपुर लैंडफिल साइट जाता ही नहीं है। ऐसे में प्लास्टिक कचरा शहर में ही खुले मैदानों, प्लॉट, खादर और सड़क किनारे खपा दिया जाता है, जहां से कबाड़ी इन्हें उठा ले जाते हैं। इस पर निगम के अधिवक्ता ने दो सप्ताह का समय मांगा है। वहीं, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने की छूट दी गई है। अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
सड़क पर प्लास्टिक कचरा खा रहे मवेशी
डॉक्टर संजय कुलश्रेष्ठ ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर दावा किया है कि हर दिन करीब आठ टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। सड़क किनारे और खुले स्थानों पर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा दिखाई देता है, जिसे जलाकर निस्तारित किया जा रहा है। कई जगह पॉलिथीन खाने से पशु बीमार हो रहे हैं। उन्होंने नगर निगम से अधिक से अधिक प्लास्टिक कचरा एकत्र कर सड़क निर्माण कराने की मांग की। उन्होंने एनजीटी के सामने प्लास्टिक कचरा जलाने और आवारा पशुओं के प्लास्टिक खाने की तस्वीरें भी पेश कीं। एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में स्वास्थ्य पर इसके असर का भी उल्लेख किया गया है।
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आगरा शहर में 800 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। एनजीटी में नगर निगम ने जवाब दिया कि वह पूरा कचरा प्रोसेसिंग कर देता है और कुछ भी नहीं बचता। इस पर याचिकाकर्ता डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने एनजीटी के सामने सवाल उठाया कि 250 मीट्रिक टन कचरा कुबेरपुर लैंडफिल साइट जाता ही नहीं है। ऐसे में प्लास्टिक कचरा शहर में ही खुले मैदानों, प्लॉट, खादर और सड़क किनारे खपा दिया जाता है, जहां से कबाड़ी इन्हें उठा ले जाते हैं। इस पर निगम के अधिवक्ता ने दो सप्ताह का समय मांगा है। वहीं, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने की छूट दी गई है। अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
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सड़क पर प्लास्टिक कचरा खा रहे मवेशी
डॉक्टर संजय कुलश्रेष्ठ ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर दावा किया है कि हर दिन करीब आठ टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। सड़क किनारे और खुले स्थानों पर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा दिखाई देता है, जिसे जलाकर निस्तारित किया जा रहा है। कई जगह पॉलिथीन खाने से पशु बीमार हो रहे हैं। उन्होंने नगर निगम से अधिक से अधिक प्लास्टिक कचरा एकत्र कर सड़क निर्माण कराने की मांग की। उन्होंने एनजीटी के सामने प्लास्टिक कचरा जलाने और आवारा पशुओं के प्लास्टिक खाने की तस्वीरें भी पेश कीं। एसएन मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में स्वास्थ्य पर इसके असर का भी उल्लेख किया गया है।
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