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मेडिकल कॉलेज के गेट पर तोड़ा दम: अस्पताल था और डॉक्टर भी...नहीं थी इंसानियत, नवजात इलाज मिलता तो बच जाती जान

Mon, 23 Oct 2023 08:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 23 Oct 2023 08:10 PM IST
सार

नवरात्र के दिन जहां एक ओर घर-घर कन्याओं का पूजन हो रहा था, तो एक नवजात बच्ची ने मेडिकल कॉलेज के गेट पर दम तोड़ दिया। परिवार के लोगों का कहना है कि यदि बच्ची को भर्ती कर लिया जाता, तो उसकी जान बच जाती। 

 

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newborn girl had got treatment in Medical College Etah her life would have been saved
मेडिकल कॉलेज एटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एटा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव बाद हालत चिंताजनक बताते हुए प्रसूता और नवजात बच्ची को रेफर कर दिया गया। परिजन एटा मेडिकल कॉलेज लाए। लेकिन यहां करीब 45 मिनट तक इन्हें भर्ती ही नहीं किया गया। नवजात की नाजुक जान इतनी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी मौत हो गई। महिला का इलाज भी परिजन ने एक निजी अस्पताल में कराया। यहां खर्चा अधिक होने पर पूरा इलाज कराए बिना घर ले गए।
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जैथरा थाना क्षेत्र के गांव गढि़या सुहागपुर निवासी सुरजीत की पत्नी रूबी (25) को परिजन रविवार की शाम जैथरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाए। यहां उसका सामान्य प्रसव तो हो गया। लेकिन महिला में खून की कमी के कारण हालत बिगड़ गई। वहीं नवजात बच्ची में ऑक्सीजन की कमी स्टाफ ने बताई। दोनों को एटा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। परिजन भाड़े पर निजी गाड़ी कर शाम के समय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सुरजीत के चाचा रामविलास ने बताया कि इमरजेंसी केस होने के बावजूद अस्पताल का कोई स्टाफ पूछने तक नहीं आया। हम लोगों ने बात की तो खून की कमी बताकर भर्ती करने से ही इनकार कर दिया। कहा कि खून का इंतजाम कर लाओ, तभी भर्ती करेंगे। खून की व्यवस्था नहीं हो रही थी। कहा कि इस सबमें करीब 45 मिनट का समय बीत गया और बच्ची को भी इन लोगों ने भर्ती नहीं किया गया। 
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उन्होंने बताया कि हम लोग बच्ची को लेकर भवन के ऊपरी तल पर जाने लगे, इसी दौरान उसकी मौत हो गई। सुरजीत के भाई नवीन ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इलाज की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। साथ ही बच्ची की मौत से चिंता और बढ़ गई थी। बाद में भाभी को एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां भर्ती कर उपचार कराया। लेकिन वहां इलाज बहुत महंगा था। जिसके चलते सोमवार सुबह वहां से छुट्टी कराकर घर पर ले आए हैं। उनकी हालत बहुत अच्छी नहीं है। बच्ची का अंतिम संस्कार सोमवार को किया है। नवीन ने कहा कि यदि मेडिकल कॉलेज में समय से बच्ची को इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

एंबुलेंस तक नहीं मिली
गर्भवती और प्रसूताओं के लिए सरकार ने निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की हुई है। लेकिन इस मामले में इन लोगों को सरकारी एंबुलेंस तक नहीं मिल सकी। नवीन ने बताया कि जैथरा सीएचसी से रेफर किया गया। जब एंबुलेंस के बारे में पता किया तो बताया कि कोई और केस लेने गई है। इसके बाद 1200 रुपये भाड़े पर एक निजी गाड़ी से एटा मेडिकल कॉलेज पहुंचे।

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जांच के बाद होगी कार्रवाई
 मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया कि 'मैं और सीएमएस अवकाश पर हैं। जानकारी की जाएगी कि इस मामले में क्या रहा। उसके आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।'
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