{"_id":"5ce2e26fbdec22074363909d","slug":"national-green-tribunal-hearing-of-yamuna-submerged-area","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बोतल से फिर निकला डूब क्षेत्र का 'जिन्न', जानिए आखिर एनजीटी में सुनवाई के दौरान क्या हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बोतल से फिर निकला डूब क्षेत्र का 'जिन्न', जानिए आखिर एनजीटी में सुनवाई के दौरान क्या हुआ
Mon, 20 May 2019 10:53 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 20 May 2019 10:53 PM IST
विज्ञापन
एनजीटी
- फोटो : SELF
यमुना किनारे बनी आवासीय योजनाओं पर एनजीटी ने प्रतिबंध लगा दिया था। जिसको लेकर एनजीटी में मामला विचाराधीन है। अब 31 मई को मामले की सुनवाई होगी। सोमवार को एनजीटी में डूब क्षेत्र की आठ आवासीय योजनाओं को लेकर सुनवाई हुई।
बता दें कि पर्यावरणविद डीके जोशी ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में वर्ष 2015 में यमुना में डूब क्षेत्र में किये जा रहे आवासीय निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की थी।
इस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने जिन जिन शहरों में यमुना नदी गुजर रही है। उन सभी शहरों में डूब क्षेत्र के निर्धारण होने तक सभी निर्माणों को प्रतिबंधित कर दिया था। उनकी बिक्री भी प्रतिबंधित कर दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि पर्यावरणविद डीके जोशी ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में वर्ष 2015 में यमुना में डूब क्षेत्र में किये जा रहे आवासीय निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
इस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने जिन जिन शहरों में यमुना नदी गुजर रही है। उन सभी शहरों में डूब क्षेत्र के निर्धारण होने तक सभी निर्माणों को प्रतिबंधित कर दिया था। उनकी बिक्री भी प्रतिबंधित कर दी थी।
विज्ञापन
Trending Videos
डूब क्षेत्र में निर्माण ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। आगरा में सिंचाई विभाग, नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण सहित संबंधित विभागों की टीम बनाई गई थी। टीम ने पैमाइश करके डूब क्षेत्र का निर्धारण किया था।
उधर बिल्डरों ने भी कोर्ट प्राधिकरण के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी। जिसमें से 11 बिल्डरों को सशर्त राहत दी है। वहीं आठ प्रोजेक्टों को लेकर सोमवार को सुनवाई थी। जिसमें एक बार फिर नई तारीख 31 मई दे दी गई है।
इस तरह लगाया था प्रतिबंध
स्थल पर कोई नया निर्माण, विकास कार्य नहीं किया जाएगा।
स्थल पर निर्मित भवन, कॉलोनी में किसी प्रकार की एक्यूप्रेंशसी अथवा कब्जा हस्तांतरित नहीं किया जाएगा।
निर्मित भवन, कॉलोनी के स्वामित्त में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
उधर बिल्डरों ने भी कोर्ट प्राधिकरण के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की थी। जिसमें से 11 बिल्डरों को सशर्त राहत दी है। वहीं आठ प्रोजेक्टों को लेकर सोमवार को सुनवाई थी। जिसमें एक बार फिर नई तारीख 31 मई दे दी गई है।
इस तरह लगाया था प्रतिबंध
स्थल पर कोई नया निर्माण, विकास कार्य नहीं किया जाएगा।
स्थल पर निर्मित भवन, कॉलोनी में किसी प्रकार की एक्यूप्रेंशसी अथवा कब्जा हस्तांतरित नहीं किया जाएगा।
निर्मित भवन, कॉलोनी के स्वामित्त में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा।