{"_id":"642b09f33975a5d43f03fc20","slug":"nala-dhanauli-agra-na-news-c-25-1-agr1011-113510-2023-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: 9 साल में नाला न बना, धनौली टापू बन गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: 9 साल में नाला न बना, धनौली टापू बन गया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलनिगम की सी एन्ड डी एस इकाई करा रही थी निर्माण
विधायक, सांसद, मंत्री कई बार जा चुके, पर नाला न बना
माई सिटी रिपोर्टर
आगरा।
धनौली रोड की कॉलोनियां और बस्तियां 9 साल से अधूरे नाले के कारण टापू की तरह बन गई है। साल 2014 से अब तक नाला पूरा नही बन पाया, दरअसल जलनिगम की सी एन्ड डी एस इकाई ने नाले का अधूरा एस्टीमेट बनाया, जिस वजह से नाले के लिए और बजट मांगा जा रहा है, पर 3 साल से बजट न मिलने से नाले का काम अधूरा पड़ा है। इस वजह से इस क्षेत्र के डेढ़ लाख लोग परेशान हैं।
धनौली रोड की गलियों में जलभराव है। 9 साल में पांच बार प्लान बदला। दो बार कार्यदायी संस्थाएं बदल गईं। 18 करोड़ रुपये लागत बढ़ गई। फिर भी समस्या जस की तस है। नाला नहीं बनने से धनौली, अजीजपुर, सिरौली, नरीपुरा, कमाल खां, राधे गली, शिव नगर, नगला बुद्धा, लेखराज, नगला प्यारे में लोग गंदगी व जलभराव से त्रस्त हैं
पहले पम्पिंग, फिर ग्रैविटी से बनना था नाला
सबसे पहले 2014 में जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नाला निर्माण के लिए 31.48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया। जिसमें जलभराव से जूझ रहीं धनौली क्षेत्र की बस्तियों के पानी की निकासी रोहता नहर में करनी थी। इसके लिए नाले के रास्ते पानी को पहले रोहता नहर किनारे इकठ्ठा किया जाता फिर पंपिंग स्टेशन से पानी को नहर में डाला जाता। पंपिंग स्टेशन संचालन के कारण संस्था बदली और काम सीएंडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को आवंटित हो गया। सीएंडडीएस ने दोबारा सर्वे किया और पंपिंग स्टेशन की बजाय ग्रेविटी फ्लो से नाला निकासी की योजना बनाई।
विज्ञापन
49.84करोड़ रुपये हुई लागत
साल 2017 में सीएंडडीएस ने 43.06 करोड़ का नया प्रस्ताव बनाया। 2018 में फिर प्रस्ताव बदला और जीएसटी व अन्य देय लगाकर तीसरी बार में लागत 49.58 करोड़ रुपये हो गई। अप्रैल 2018 में शासन से 20 करोड़ रुपये जारी हो गए। योजना में 6349 मीटर ट्रंक आरसीसी एवं 6563 मीटर ब्रांच आरसीसी प्रस्तावित थी। जिसमें से 5200 मीटर ट्रंक आरसीसी निर्माण का दावा किया जा रहा है। बाकी नाला अभी तक नहीं बना। 2019 में और फिर 2020 में पांचवीं बार लागत बढ़कर 49.84 करोड़ रुपये हो चुकी है। बीते सात साल में 18 करोड़ रुपये लागत बढ़ने के बाद भी नाला अधूरा पड़ा है।
कमिश्नर ने प्रमुख सचिव से मांगा बजट
धनौली नाले की समस्या का निदान करने के लिए कमिश्नर अमित गुप्ता ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर नए एस्टिमेट की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के लिए पत्र भेजा। इस बार की मण्डलीय समीक्षा बैठक में फिर से पत्र भेजने को कहा गया।
विरोध प्रदर्शन से भी न पड़ा असर
बीते साल धनौली क्षेत्र में नाला ना बनने पर गड्ढा खोदकर उसमें दो बुजुर्ग ने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन उसके बाद भी नाले में काम शुरू नहीं हो पाया
पार्षद, प्रधान से लेकर विधायक, सांसद और मंत्री तक यहां सैकड़ों बार निरीक्षण कर गए लेकिन हमारी समस्या का निदान नहीं हो पाया। 15 से ज्यादा गलियों में पानी भरा हुआ है
मनोज शर्मा, धनौली रोड
अधिकारी सिर्फ अपने कमीशन के चक्कर मे योजना बना रहे हैं। लोगों की समस्या दूर करने का उनका कोई इरादा नहीं है। इसलिए 9 साल में हमारा नाला पूरा नहीं बन पाया
सचिन शर्मा, धनौली रोड
विज्ञापन
विधायक, सांसद, मंत्री कई बार जा चुके, पर नाला न बना
माई सिटी रिपोर्टर
आगरा।
धनौली रोड की कॉलोनियां और बस्तियां 9 साल से अधूरे नाले के कारण टापू की तरह बन गई है। साल 2014 से अब तक नाला पूरा नही बन पाया, दरअसल जलनिगम की सी एन्ड डी एस इकाई ने नाले का अधूरा एस्टीमेट बनाया, जिस वजह से नाले के लिए और बजट मांगा जा रहा है, पर 3 साल से बजट न मिलने से नाले का काम अधूरा पड़ा है। इस वजह से इस क्षेत्र के डेढ़ लाख लोग परेशान हैं।
धनौली रोड की गलियों में जलभराव है। 9 साल में पांच बार प्लान बदला। दो बार कार्यदायी संस्थाएं बदल गईं। 18 करोड़ रुपये लागत बढ़ गई। फिर भी समस्या जस की तस है। नाला नहीं बनने से धनौली, अजीजपुर, सिरौली, नरीपुरा, कमाल खां, राधे गली, शिव नगर, नगला बुद्धा, लेखराज, नगला प्यारे में लोग गंदगी व जलभराव से त्रस्त हैं
विज्ञापन
पहले पम्पिंग, फिर ग्रैविटी से बनना था नाला
सबसे पहले 2014 में जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नाला निर्माण के लिए 31.48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया। जिसमें जलभराव से जूझ रहीं धनौली क्षेत्र की बस्तियों के पानी की निकासी रोहता नहर में करनी थी। इसके लिए नाले के रास्ते पानी को पहले रोहता नहर किनारे इकठ्ठा किया जाता फिर पंपिंग स्टेशन से पानी को नहर में डाला जाता। पंपिंग स्टेशन संचालन के कारण संस्था बदली और काम सीएंडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को आवंटित हो गया। सीएंडडीएस ने दोबारा सर्वे किया और पंपिंग स्टेशन की बजाय ग्रेविटी फ्लो से नाला निकासी की योजना बनाई।
विज्ञापन
49.84करोड़ रुपये हुई लागत
साल 2017 में सीएंडडीएस ने 43.06 करोड़ का नया प्रस्ताव बनाया। 2018 में फिर प्रस्ताव बदला और जीएसटी व अन्य देय लगाकर तीसरी बार में लागत 49.58 करोड़ रुपये हो गई। अप्रैल 2018 में शासन से 20 करोड़ रुपये जारी हो गए। योजना में 6349 मीटर ट्रंक आरसीसी एवं 6563 मीटर ब्रांच आरसीसी प्रस्तावित थी। जिसमें से 5200 मीटर ट्रंक आरसीसी निर्माण का दावा किया जा रहा है। बाकी नाला अभी तक नहीं बना। 2019 में और फिर 2020 में पांचवीं बार लागत बढ़कर 49.84 करोड़ रुपये हो चुकी है। बीते सात साल में 18 करोड़ रुपये लागत बढ़ने के बाद भी नाला अधूरा पड़ा है।
कमिश्नर ने प्रमुख सचिव से मांगा बजट
धनौली नाले की समस्या का निदान करने के लिए कमिश्नर अमित गुप्ता ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर नए एस्टिमेट की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के लिए पत्र भेजा। इस बार की मण्डलीय समीक्षा बैठक में फिर से पत्र भेजने को कहा गया।
विरोध प्रदर्शन से भी न पड़ा असर
बीते साल धनौली क्षेत्र में नाला ना बनने पर गड्ढा खोदकर उसमें दो बुजुर्ग ने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन उसके बाद भी नाले में काम शुरू नहीं हो पाया
पार्षद, प्रधान से लेकर विधायक, सांसद और मंत्री तक यहां सैकड़ों बार निरीक्षण कर गए लेकिन हमारी समस्या का निदान नहीं हो पाया। 15 से ज्यादा गलियों में पानी भरा हुआ है
मनोज शर्मा, धनौली रोड
अधिकारी सिर्फ अपने कमीशन के चक्कर मे योजना बना रहे हैं। लोगों की समस्या दूर करने का उनका कोई इरादा नहीं है। इसलिए 9 साल में हमारा नाला पूरा नहीं बन पाया
सचिन शर्मा, धनौली रोड