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कंक्रीट के जंगल में बदल रहा आगरा: हर साल रोपी जा रही हरियाली, फिर भी धरती का दामन खाली

Fri, 02 Jun 2023 12:23 PM IST
धीरेन्द्र सिंह ममता त्रिपाठी, आगरा
ममता त्रिपाठी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 02 Jun 2023 12:23 PM IST
सार

आगरा में एक भी घना जंगल नहीं है। सिर्फ 6.50 प्रतिशत हरित क्षेत्र है, जबकि मानकों के अनुसार यह 33 प्रतिशत होना चाहिए। 
 

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More than 1.35 crore saplings were planted within five years most of them could not become trees
सूखे पौधे (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपना शहर कंक्रीट के जंगल में बदलता जा रहा है। तमाम वादों और दावों के बावजूद न तो शहर की हरियाली बढ़ी न हरियाली का क्षेत्र। हालत ये हैं कि पिछले पांच सालों में सवा करोड़ से ज्यादा पौधों को शहर में लगाया जा चुका है। बावजूद इसके शहर का हरित क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का मात्र 6.50 प्रतिशत है। जबकि मानकों के अनुसार यह 33 प्रतिशत होना चाहिए।

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ताज ट्रिपेजियम जोन में होने के कारण शहर में पेड़ों को काटना आसान नहीं है फिर भी शहर के विकास की कीमत हरे-भरे पेड़ों की बलि देकर चुकानी पड़ती है। पिछले पांच सालों से हर साल शहर में लाखों पौधे रोपे जा रहे हैं मगर हरित क्षेत्र एक प्रतिशत भी नहीं बढ़ा। वन विभाग के अनुसार जिले में साल 2018 में 20 लाख, 2019 में 28 लाख, 2020 में 38 लाख और 2021 में कुल 49 लाख पौधे रोपे गये। यानि पांच साल में एक करोड़ 35 लाख पौधे। लेकिन शहर का वन क्षेत्र 2019 से जस का तस 6.50 प्रतिशत पर अटका पड़ा है। 
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जिला वन अधिकारी आदर्श कुमार कहते हैं कि विभाग पूरी शिद्दत से जुटा है लेकिन कभी सिक्स लेन तो कभी मेट्रो के चलते तमाम बड़े पेड़ काट दिए गए। विभाग को उम्मीद है कि पिछले पिछले पांच सालों लगाए गए पौधे अब वृक्ष बन गए हैं। ऐसे में 2023 की रिपोर्ट में शहर का वन क्षेत्र बढ़ने की पूरी संभावना है।
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आठ साल में घट गई 0.28 प्रतिशत हरियाली

साल 2015 में आगरा का वन क्षेत्र 6.78 प्रतिशत था जो साल 2017 में घटकर 6.73 प्रतिशत रह गया। इसके बाद साल 2019 में यह और घटा और सिर्फ 6.50 प्रतिशत रह गया। 2021 में वन क्षेत्र न तो घटा और न ही बढ़ा और यह 6.50 प्रतिशत पर स्थिर रहा।


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