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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Mig-21 bids farewell to Indian Air Force when it was purchased 63 years ago there was uproar in Lok Sabha

UP: इंडियन एयरफोर्स से मिग-21 की विदाई,  63 साल पहले जब हुई थी खरीद...तब लोकसभा में हुआ था हंगामा

Fri, 25 Jul 2025 12:04 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 25 Jul 2025 12:04 PM IST
सार

पहले फाइटर जेट मिग-21 की डील पर भी राफेल की तरह सवाल उठे थे। लोकसभा में वैसा ही हंगामा करते हुए सवाल उठे थे, जैसे राफेल फाइटर जेट की डील के दौरान हुआ था।

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Mig-21 bids farewell to Indian Air Force when it was purchased 63 years ago there was uproar in Lok Sabha
इंडियन एयरफोर्स से मिग-21 की विदाई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

देश के पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट मिग-21 की भारतीय वायुसेना से विदाई हो रही है। छह दशक की सेवा के बाद मिग-21 की उड़ान बंद करने का फैसला लिया गया है। 63 साल पहले वर्ष 1962 में जब सोवियत संघ सरकार से मिग-21 विमान खरीदने की डील हुई थी, तो विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में वैसा ही हंगामा करते हुए सवाल उठाए थे, जैसे राफेल फाइटर जेट की डील के दौरान हुआ था।

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अमर उजाला के पुराने पन्नों में दर्ज है कि लोकसभा में वर्ष 1962 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार से 25 विपक्षी सांसदों ने सोवियत संघ से मिग-21 खरीदने की डील का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की थी। मिग डील को लेकर सांसदों ने सवाल पूछे। 8 अगस्त 1962 को लोकसभा में रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन ने सांसदों के सवालों पर मिग-21 डील को लेकर कोई जवाब नहीं दिया था।
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वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर मिग की खरीद और टेक्नीशियनों के उपलब्ध न होने जैसे सवाल सांसदों ने उठाए थे। उसी साल तीन माह के बाद 10 नवंबर 1962 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लोकसभा में मिग डील पर कहा कि समय पर ही सोवियत संघ भारत को फाइटर जेट देगा। इसके अगले साल ही सोवियत संघ में बने मिकोयान गुरेविच (मिग)-21 भारतीय वायुसेना को सौंप दिए गए।
 

सात साल बाद भारत में बने मिग विमान
मिग-21 विमान पहले सोवियत संघ से भारत लाकर असेंबल किए गए, लेकिन तकनीकी हस्तांतरण के बाद हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड की नासिक फैक्टरी में इसका निर्माण शुरू हुआ। अमर उजाला आकाईव के मुताबिक 18 अक्तूबर 1970 को रक्षा उत्पादन मंत्री प्रकाश चंद्र ने एयरचीफ मार्शल पीसी लाल को भारत में बना पहला मिग-21 विमान सौंपा था। इसके तुरंत बाद से ही मिग-21 मार्क-2 विमानों को बनाने की कवायद शुरू हुई। 17 अप्रैल 1973 को प्रकाशित खबर में मिग-21 मार्क-2 के साथ चीता हेलिकॉप्टर का निर्माण शुरू होने की जानकारी दी गई।

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जिम्बाब्वे ने भारत से मांगे थे मिग-21 विमान
छह दशक में दुनिया के 60 से ज्यादा देशों तक मिग-21 विमान उड़ान भरते नजर आए। भारतीय वायुसेना में 62 साल की सेवा के बाद यह 19 सितंबर को रिटायर कर दिए जाएंगे। देश का पहला फाइटर जेट पाकिस्तान के साथ वर्ष 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी ताकत दिखा चुका है। लगातार क्रैश की घटनाओं के कारण इसे उड़ता ताबूत करार दिया गया, हालांकि जिम्बाब्वे ने भारत सरकार से वर्ष 1986 में दक्षिण अफ्रीका से व्यापार समझौता तोड़ने के बाद मिग-21 की मांग की थी।

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