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Agra News: 122 साल पुराना है माता चामुंडा देवी का मंदिर
Tue, 21 Mar 2023 11:54 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Tue, 21 Mar 2023 11:54 PM IST
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कासगंज। शहर का माता चामुंडा मंदिर 121 साल पुुराना है। पीपल की जड़ में माता चामुंडा के चरण निकलने के बाद यहां पर मंदिर की स्थापना की गई। आज यह मंदिर काफी भव्य रुप ले चुका है। इस मंदिरमें अन्य देवी देवताओं की भी प्रतिमाएं स्थापित हैं। प्रत्येक सोमवार को मंदिर पर भक्त पहुंचकर माता के आगे शीश झुकाते हैं
मान्यता है कि तरौरा क्षेत्र के बाग में पीपल की जड़ में माता चामुंडा के चरण निकले। इसके बाद यहां पर 1901 में पहले एक छोटे मंदिर की स्थापना की गई और भक्तों का आना शुरू हो गया। भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने पर उनके द्वारा मंदिर परिसर में देवी देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापित करना शुरू कर दिया गया। धीरे धीरे इस मंदिर की ख्याति दूर दराज के क्षेत्रों में फैलने लगी। जिससे भक्तों की संख्या में तेजी से इजाफा होता गया। आज यह मंदिर काफी भव्य रूप ले चुका है। प्रत्येक सोमवार को मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त माता के दरबार में पहुंच कर अपनी मन्नत मांगते है।
नवरात्र पर्व पर तो यहां दूर दराज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर पर नवरात्र पर्व के दिनों में मेला लगता है। मान्यता है कि मंदिर पर सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से माता प्रसन्न होती हैं तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। यहां पर नवरात्र के दिनों में हवन कुंड में भक्तों के द्वारा आहुतियां भी चढ़ाई जाती हैं। दूर दूर तक यह मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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यहां है स्थित
माता का यह मंदिर फोरलेन मार्ग पर इस्माइलपुर रोड एवं अशोक नगर के मध्य स्थित है। बस स्टैंड से मंदिर की दूरी आधा किमी है। रेलवे स्टेशन से लगभग डेढ़ किमी दूर है। मंदिर के लिए शहर के लोग बिलराम गेट चौराहा, गली माता चामुंडा मंदिर, सोरों गेट अंबेडकर तिराहा आदि मार्गों से होकर जाते हैं।
माता चामुंडा मंदिर के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।सच्चे मन से माता से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। नवरात्र के दिनों में दूर दराज के क्षेत्र से भक्त आकर माता रानी की पूजा करते है। अनेक पाल सिंह,पुजारी
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मान्यता है कि तरौरा क्षेत्र के बाग में पीपल की जड़ में माता चामुंडा के चरण निकले। इसके बाद यहां पर 1901 में पहले एक छोटे मंदिर की स्थापना की गई और भक्तों का आना शुरू हो गया। भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने पर उनके द्वारा मंदिर परिसर में देवी देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापित करना शुरू कर दिया गया। धीरे धीरे इस मंदिर की ख्याति दूर दराज के क्षेत्रों में फैलने लगी। जिससे भक्तों की संख्या में तेजी से इजाफा होता गया। आज यह मंदिर काफी भव्य रूप ले चुका है। प्रत्येक सोमवार को मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त माता के दरबार में पहुंच कर अपनी मन्नत मांगते है।
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नवरात्र पर्व पर तो यहां दूर दराज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर पर नवरात्र पर्व के दिनों में मेला लगता है। मान्यता है कि मंदिर पर सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से माता प्रसन्न होती हैं तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। यहां पर नवरात्र के दिनों में हवन कुंड में भक्तों के द्वारा आहुतियां भी चढ़ाई जाती हैं। दूर दूर तक यह मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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यहां है स्थित
माता का यह मंदिर फोरलेन मार्ग पर इस्माइलपुर रोड एवं अशोक नगर के मध्य स्थित है। बस स्टैंड से मंदिर की दूरी आधा किमी है। रेलवे स्टेशन से लगभग डेढ़ किमी दूर है। मंदिर के लिए शहर के लोग बिलराम गेट चौराहा, गली माता चामुंडा मंदिर, सोरों गेट अंबेडकर तिराहा आदि मार्गों से होकर जाते हैं।
माता चामुंडा मंदिर के दरबार से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।सच्चे मन से माता से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। नवरात्र के दिनों में दूर दराज के क्षेत्र से भक्त आकर माता रानी की पूजा करते है। अनेक पाल सिंह,पुजारी