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माघ मेला- अब प्रयागराज और हरिद्वार में धूनी रमाएंगे साधु संत, सोरों से वापसी
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कासगंज सोरों का नागालैंड आश्रम
- फोटो : KASGANJ
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सोरों(कासगंज)। तीर्थनगरी के वार्षिक अमृत कुंभ में भाग लेने आए साधु-संत अब प्रमुख स्नानों के बाद लौटने लगे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण मेला मार्गशीर्ष आयोजित न होने की टीस उनके मन में साफ नजर आई। अब साधु संत प्रयागराज और हरिद्वार में जनवरी माह में आयोजित होने वाले माघ मेले में अपनी धूनी रमाएंगे।
मार्गशीर्ष माह में तीर्थनगरी सोरों में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसे में मार्गशीर्ष माह में देशभर के साधु संत यहां जुटते हैं। प्रतिवर्ष मेला मार्गशीर्ष का आयोजन होने पर 15 दिन तक साधुओं की धुनी यहां रमती थी, लेकिन इस बार मेला आयोजित न होने से आश्रमों में खास रौनक नजर नहीं आई। एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा सभी स्नान पर्व संपन्न होने के बाद अब साधु-संतों ने प्रस्थान शुरू कर दिया है।
साधुओं की बात-
- हरिपदी किनारे नागालैंड में डेरा डाले हैं। यहा मेले का आयोजन नहीं हुआ है। इसलिए अब हरिद्वार के माघ मेले में जाने की तैयारी कर रहे हैं। सोरों नागालैंड तो हम साधुओं का मुख्यालय है। सूकरक्षेत्र हरिपदी में नित्य स्नान कर पुण्य संचित करते हैं।
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- महंत प्रेमशंकर गिरी, अतरौली।
- अपने शिष्यों सहित परशुराम मंदिर में अब तक डेरा डाला। विशेष महत्व वाले वाले सूकरक्षेत्र में स्नान और प्रवास पूर्व जन्म के अच्छे संस्कार का फल है। अब यहां से अपने स्थान दातागंज जा रहे हैं। इसके बाद वहां से प्रयागराज के कुंभ में जाएंगे।
- सदानंद महाराज, दातागंज।
- शिष्यों के साथ छावनी धर्मशाला के निकट डेरा है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से पौष मास कृष्णपक्ष पंचमी तक प्रतिवर्ष सूकर क्षेत्र हरिपदी किनारे कल्पवास करते हैं। अब यहां से जाने के बाद हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में वास करेंगे।
- सोमवार मुनि, लहराघाट।
- मंदिर प्रांगण में प्रवास करने दूर-दूर से महात्मा आए हैं। धर्मप्रेमियों ने सहयोग कर उनके लिए अन्नक्षेत्र चला रखा है। अब धीमे धीमे साधु संत प्रयागराज और हरिद्वार के लिए प्रस्थान करने लगे हैं।
- महंत प्रकाशदास, भैरोनाथ मंदिर।
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मार्गशीर्ष माह में तीर्थनगरी सोरों में स्नान का विशेष महत्व है। ऐसे में मार्गशीर्ष माह में देशभर के साधु संत यहां जुटते हैं। प्रतिवर्ष मेला मार्गशीर्ष का आयोजन होने पर 15 दिन तक साधुओं की धुनी यहां रमती थी, लेकिन इस बार मेला आयोजित न होने से आश्रमों में खास रौनक नजर नहीं आई। एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा सभी स्नान पर्व संपन्न होने के बाद अब साधु-संतों ने प्रस्थान शुरू कर दिया है।
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साधुओं की बात-
- हरिपदी किनारे नागालैंड में डेरा डाले हैं। यहा मेले का आयोजन नहीं हुआ है। इसलिए अब हरिद्वार के माघ मेले में जाने की तैयारी कर रहे हैं। सोरों नागालैंड तो हम साधुओं का मुख्यालय है। सूकरक्षेत्र हरिपदी में नित्य स्नान कर पुण्य संचित करते हैं।
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- महंत प्रेमशंकर गिरी, अतरौली।
- अपने शिष्यों सहित परशुराम मंदिर में अब तक डेरा डाला। विशेष महत्व वाले वाले सूकरक्षेत्र में स्नान और प्रवास पूर्व जन्म के अच्छे संस्कार का फल है। अब यहां से अपने स्थान दातागंज जा रहे हैं। इसके बाद वहां से प्रयागराज के कुंभ में जाएंगे।
- सदानंद महाराज, दातागंज।
- शिष्यों के साथ छावनी धर्मशाला के निकट डेरा है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से पौष मास कृष्णपक्ष पंचमी तक प्रतिवर्ष सूकर क्षेत्र हरिपदी किनारे कल्पवास करते हैं। अब यहां से जाने के बाद हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में वास करेंगे।
- सोमवार मुनि, लहराघाट।
- मंदिर प्रांगण में प्रवास करने दूर-दूर से महात्मा आए हैं। धर्मप्रेमियों ने सहयोग कर उनके लिए अन्नक्षेत्र चला रखा है। अब धीमे धीमे साधु संत प्रयागराज और हरिद्वार के लिए प्रस्थान करने लगे हैं।
- महंत प्रकाशदास, भैरोनाथ मंदिर।