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Exclusive: यह है लाल किले का मुगलकालीन नक्शा, आगरा विश्वविद्यालय में पृथ्वीराज रासो को भी सहेजा गया

Sat, 12 Nov 2022 10:22 AM IST
मुकेश कुमार धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 12 Nov 2022 10:22 AM IST
सार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में दुर्लभ साहित्य और धरोहर की केमिकल क्लीनिंग शुरू हो गई है। नमूने के तौर पर तीन का संरक्षण हुआ है। अन्य 1433 दुर्लभ साहित्यों को भी सहेजा जाना है। 

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map of Red Fort and Prithviraj Raso saved in Dr. Bhimrao Ambedkar University Agra
लाल किले का मुगलकालीन नक्शा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में दुर्लभ साहित्य और धरोहर हैं, जिन पर कोई भी गौरवान्वित होगा। इनको आमजन तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय केमिकल क्लीनिंग कर संरक्षण करा रहा है। पृथ्वीराज रासो महाकाव्य, लाल किले के मुगलकालीन नक्शे और एक राजस्थानी ग्रंथ की केमिकल क्लीनिंग पूरी हो गई है।

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कन्हैयालाल माणिक लाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) के प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि विश्वविद्यालय के संस्थान केएमआई के पास 1436 दुर्लभ साहित्य और धरोहर हैं। इनको संरक्षित करने का काम अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में रखे मूल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की केमिकल क्लीनिंग करने वाली एजेंसी को दिया है। एजेंसी की तकनीकी टीम ने काम शुरू कर दिया है। 
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शुरुआत में नमूने के तौर पर चंदबरदाई के पृथ्वीराज रासो महाकाव्य, लाल किले के मुगलकालीन 400 साल पुराना नक्शे और 1707 की लिखित ढोला मारू री वार्ता (राजस्थानी प्रेमाख्यान काव्य) को रासायनिक लेप करते हुए संरक्षित किया है। एक प्रतिलिपि को संरक्षित करने में 5-7 दिन लगे। इस काम से संतुष्ट होने पर सभी धरोहर की केमिकल क्लीनिंग कराई जाएगी। 

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map of Red Fort and Prithviraj Raso saved in Dr. Bhimrao Ambedkar University Agra
दुर्लभ साहित्य की हो रही केमिकल क्लोनिंग - फोटो : अमर उजाला

ताड़पत्र, भोजपत्र और मुगलकालीन सिक्के

केएमआई के पास 1436 पुस्तकें और धरोहर हैं। इनमें मुगलकालीन के सोने और अन्य धातुओं के बने 26 सिक्के हैं। कनिष्क कालीन ताड़पत्र और भोजपत्र पर लिखे साहित्य और ग्रंथ हैं। इनको रासायनिक लेप से संरक्षित कर संग्रहालय में रखा जाएगा। ई-संग्रहालय बनाने की भी तैयारी है।

प्रोजेक्ट को संस्कृति मंत्रालय भेजेंगे

कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि विश्वविद्यालय के पास अति प्राचीन साहित्य और सिक्के हैं। सितंबर में विश्वविद्यालय के निरीक्षण के लिए आईं राज्यपाल ने भी इनको देखा था। उन्होंने इन्हें संरक्षित करने के लिए कहा। इस पर काम शुरू हो गया है। नमूने के तौर पर तीन कृतियों को संस्कृति-शिक्षा मंत्रालय भेजकर बजट की मांग करेंगे। 

ये हैं मुख्य प्राचीन साहित्य धरोहर

- संवत 1933 का पंचांग
- सूर के कूट पद
- संवत 1919 की गीता (संस्कृत) 
- रामचरित मानस  तुलसीदास 
- चाणक्य नीति
- विष्णु पुराण
- वेताल पच्चीसी
- आदि पुराण
- हीर रांझा छत्तीसी
- कबीर, रेदास, नामदेव की परची
 
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