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अमानवीय: एसएन इमरजेंसी परिसर में लावारिस की तड़प-तड़पकर मौत, नहीं पसीजा स्टॉफ का दिल
Wed, 19 Feb 2020 10:14 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 19 Feb 2020 10:14 AM IST
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स्टाफ ने इमरजेंसी से बाहर निकाला, अर्द्धनग्न हाल में घंटों पड़ा रहा
- फोटो : अमर उजाला
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एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में स्टाफ का अमानवीय चेहरा सामने आया। स्टाफ ने अर्द्धनग्न हाल में लावारिस को बाहर निकाल दिया। इमरजेंसी परिसर में वह दर्द से ढाई घंटे तक तड़पता रहा। किसी का दिल नहीं पसीजा। आखिरकर उसकी मौत हो गई। अब प्राचार्य प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
लगभग 28 साल का लावारिस इमरजेंसी में पांच फरवरी से भर्ती था। उसे संक्रमण होने के साथ अन्य बीमारी भी थी। पुलिस को जानकारी दी गई लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई। मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे स्टाफ ने उसे इमरजेंसी से बाहर निकाल दिया। वह अर्द्धनग्न हाल में इमरजेंसी के साइकिल स्टैंड के पास पड़ा रहा।
इमरजेंसी स्टाफ की ओर से बताया गया कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त भी था। काफी देर तक युवक जमीन पर ही पड़ा छटपटाता रहा। उसकी हालत देखकर अन्य तीमारदारों ने वार्ड ब्वाय और स्टाफ से उसे भर्ती करने की गुहार भी लगाई लेकिन सभी ने अनसुना कर दिया। लावारिस की करीब डेढ़ बजे मौत हो गई। मौत के बाद भी शव 10-15 मिनट तक परिसर में ही पड़ा रहा। जब आसपास भीड़ जुटने लगी तब जाकर स्टाफ ने शव को स्ट्रेचर पर ले जाकर पोस्टमार्टम गृह भेजा।
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लगभग 28 साल का लावारिस इमरजेंसी में पांच फरवरी से भर्ती था। उसे संक्रमण होने के साथ अन्य बीमारी भी थी। पुलिस को जानकारी दी गई लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई। मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे स्टाफ ने उसे इमरजेंसी से बाहर निकाल दिया। वह अर्द्धनग्न हाल में इमरजेंसी के साइकिल स्टैंड के पास पड़ा रहा।
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इमरजेंसी स्टाफ की ओर से बताया गया कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त भी था। काफी देर तक युवक जमीन पर ही पड़ा छटपटाता रहा। उसकी हालत देखकर अन्य तीमारदारों ने वार्ड ब्वाय और स्टाफ से उसे भर्ती करने की गुहार भी लगाई लेकिन सभी ने अनसुना कर दिया। लावारिस की करीब डेढ़ बजे मौत हो गई। मौत के बाद भी शव 10-15 मिनट तक परिसर में ही पड़ा रहा। जब आसपास भीड़ जुटने लगी तब जाकर स्टाफ ने शव को स्ट्रेचर पर ले जाकर पोस्टमार्टम गृह भेजा।
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एक के बाद एक लापरवाही, नोटिस तक कार्रवाई
एसएन में इलाज में लापरवाही की यह कोई पहली घटना नहीं है। घड़ी वाली इमारत से मरीज को सीटी स्कैन कराने के लिए ई-रिक्शा के फर्श पर लिटाकर ले जाना हो या फिर दवा लेने आए पुजारी का शव बेसमेंट में पांच दिन बाद मिलने का मामला हो, किसी मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। प्राचार्य की ओर से केवल नोटिस दिया जा रहा है। लापरवाह स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो रही।
एसएन में इलाज में लापरवाही की यह कोई पहली घटना नहीं है। घड़ी वाली इमारत से मरीज को सीटी स्कैन कराने के लिए ई-रिक्शा के फर्श पर लिटाकर ले जाना हो या फिर दवा लेने आए पुजारी का शव बेसमेंट में पांच दिन बाद मिलने का मामला हो, किसी मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। प्राचार्य की ओर से केवल नोटिस दिया जा रहा है। लापरवाह स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो रही।