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Agra News: दो साल में तीन पत्र जारी होने के बाद भी पटल नहीं छोड़ रहा बाबू
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मैनपुरी। स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण के नाम पर धंधा चल रहा है। एक बाबू जो पिछले तीन साल से अधिक समय से यहां जमा हुआ है, वह अधिकारियों के आदेश को हवा में उड़ा रहा है। पटल बदले जाने के बाद भी वह पटल नहीं छोड़ रहा है। कार्रवाई के नाम पर जमकर धन उगाही की जा रही है। सीएमओ कार्यालय में पिछले तीन साल से अधिक समय से संतोष वर्मा वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात हैं। उनके पास निजी क्लीनिक पंजीकरण और छोलाछाप से संबधित मामलों का प्रभार है। पिछले दो साल में तीन बार उन्हें यह प्रभार छोड़ने के लिए सीएमओ आदेश जारी कर चुके हैं। लेकिन मलाईदार प्रभार छोड़ने के लिए संतोष वर्मा तैयार नहीं है। सीएमओ के तीन-तीन आदेश पत्र के बाद भी वे उसी प्रभार की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि आखिर झोलाछाप और निजी पंजीकरण का प्रभार ही ऐसा है कि उसे कोई छोड़ें क्यों। एक-एक क्लीनिक से 50 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह वसूले जा रहे हैं। यहीं कारण है कि संबंधित बाबू इस प्रभार को छोड़ना नहीं चाह रहे हैं।
पांच मीटर की दूरी पर बैठकर निभा रहे जिम्मेदारी
संतोष वर्मा सीएमओ के कक्ष से मात्र पांच मीटर की दूरी पर अपने कक्ष में बैठते हैं और सीएमओ के आदेशों का ही पालन नहीं करते हैं। अधिकारी भले ही इस बात को मानने को तैयार न हों लेकिन कहीं न कहीं इसमें अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।
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कब-कब जारी हुए पत्र
31 अक्तूबर- 2022्र
31 अक्तूबर 2022 को सीएमओ द्वारा पत्र जारी किया गया। इसमें संतोष वर्मा को स्थापना द्वितीय एवं चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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06 अक्तूबर 2023
संतोष वर्मा से निजी क्लीनिक और झोलाछाप का प्रभारी मोहम्मद अकमल को आवंटित किया गया। लेकिन वरिष्ठ सहायक मोहम्मद अकमल को आज तक प्रभार नहीं मिला।
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02 दिसंबर- 2023
सर्वेश कुमार वरिष्ठ सहायक को निजी क्लीनिक और झोलाछाप का प्रभार दिया गया। लेकिन सर्वेश कुमार का भी आज तक यह प्रभार नहीं मिल सका।
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संतोष वर्मा से झोलाछाप और निजी अस्पतालों से संबंधित प्रभारी हटाने की कार्रवाई गतिमान थी लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण उसका पालन नहीं किया जा सका। चुनाव बाद उनसे ये प्रभार हटा दिए जाएंगे।
डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ
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विभागीय सूत्र बताते हैं कि आखिर झोलाछाप और निजी पंजीकरण का प्रभार ही ऐसा है कि उसे कोई छोड़ें क्यों। एक-एक क्लीनिक से 50 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह वसूले जा रहे हैं। यहीं कारण है कि संबंधित बाबू इस प्रभार को छोड़ना नहीं चाह रहे हैं।
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पांच मीटर की दूरी पर बैठकर निभा रहे जिम्मेदारी
संतोष वर्मा सीएमओ के कक्ष से मात्र पांच मीटर की दूरी पर अपने कक्ष में बैठते हैं और सीएमओ के आदेशों का ही पालन नहीं करते हैं। अधिकारी भले ही इस बात को मानने को तैयार न हों लेकिन कहीं न कहीं इसमें अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।
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कब-कब जारी हुए पत्र
31 अक्तूबर- 2022्र
31 अक्तूबर 2022 को सीएमओ द्वारा पत्र जारी किया गया। इसमें संतोष वर्मा को स्थापना द्वितीय एवं चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई।
06 अक्तूबर 2023
संतोष वर्मा से निजी क्लीनिक और झोलाछाप का प्रभारी मोहम्मद अकमल को आवंटित किया गया। लेकिन वरिष्ठ सहायक मोहम्मद अकमल को आज तक प्रभार नहीं मिला।
02 दिसंबर- 2023
सर्वेश कुमार वरिष्ठ सहायक को निजी क्लीनिक और झोलाछाप का प्रभार दिया गया। लेकिन सर्वेश कुमार का भी आज तक यह प्रभार नहीं मिल सका।
संतोष वर्मा से झोलाछाप और निजी अस्पतालों से संबंधित प्रभारी हटाने की कार्रवाई गतिमान थी लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण उसका पालन नहीं किया जा सका। चुनाव बाद उनसे ये प्रभार हटा दिए जाएंगे।
डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ