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पर्यूषण महापर्व: चंद्रप्रभु जैन मंदिर में स्थापित है भगवान की अद्भुत प्रतिमा, जानिए इतिहास
Tue, 03 Sep 2019 12:20 PM IST
मुकेश कुमार
दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद
दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 03 Sep 2019 12:20 PM IST
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चंद्रप्रभु जैन मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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महापर्व पर्यूषण शुरू हो गया है। जैन धर्मालंबियों का यह सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। 10 दिन तक भक्ति के साथ लोग आत्मसाधना में लीन रहेंगे। फिरोजाबाद के प्रमुख मंदिरों में पूजा पाठ के साथ साथ प्रवचन, जलधारा आदि कार्यक्रम होंगे। इस महापर्व के साथ अमर उजाला ने सोमवार से अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत प्रतिदिन आपको शहर के प्रमुख जैन मंदिरों से रूबरू कराएंगे।
सदर बाजार के निकट स्थित चंद्रप्रभु जैन मंदिर हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में स्थापित भगवान चंद्रप्रभु की स्फटिक मणि की प्रतिमा से कई चमत्कार और किदवंतियां जुड़ी हुई हैं। फिरोजाबाद बसने से पूर्व चंद्रवाड मुख्य शहर हुआ करता था। यहां के राजा चंद्रसेन जैन धर्म को मानते थे। उन्होंने चंद्रवाड़ में 51 पंच कल्याणक प्रतिष्ठाएं कराई थीं।
14वीं सदी में मुगल मोहम्मद गौरी की सेना जब चंद्रवाड पर हमला करते हुए मंदिरों को तहस-नहस करने लगी, तब भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमा को राजा चंद्रसेन ने यमुना में प्रवाहित करा दिया था। चंद्रप्रभु मंदिर का निर्माण करीब तीन सौ साल पूर्व हुआ था। एक माली का स्वप्न आया कि यमुना बीच पानी में भगवान की प्रतिमा है। यही अद्भुत प्रतिमा इस मंदिर में स्थापित है।
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सदर बाजार के निकट स्थित चंद्रप्रभु जैन मंदिर हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में स्थापित भगवान चंद्रप्रभु की स्फटिक मणि की प्रतिमा से कई चमत्कार और किदवंतियां जुड़ी हुई हैं। फिरोजाबाद बसने से पूर्व चंद्रवाड मुख्य शहर हुआ करता था। यहां के राजा चंद्रसेन जैन धर्म को मानते थे। उन्होंने चंद्रवाड़ में 51 पंच कल्याणक प्रतिष्ठाएं कराई थीं।
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14वीं सदी में मुगल मोहम्मद गौरी की सेना जब चंद्रवाड पर हमला करते हुए मंदिरों को तहस-नहस करने लगी, तब भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमा को राजा चंद्रसेन ने यमुना में प्रवाहित करा दिया था। चंद्रप्रभु मंदिर का निर्माण करीब तीन सौ साल पूर्व हुआ था। एक माली का स्वप्न आया कि यमुना बीच पानी में भगवान की प्रतिमा है। यही अद्भुत प्रतिमा इस मंदिर में स्थापित है।
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कई जैन संत कर चुके हैं वर्षायोग
जैन विद्वान अनूप चंद्र जैन एडवोकेट बताते हैं कि चंद्रप्रभु मंदिर का इतिहास काफी गौरवमयी है। यहां प्रमुख संत वर्षायोग कर चुके हैं। 1933 में आचार्य शांतिसागर महाराज ने चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा के दर्शन कर कहा था कि पूरे विश्व में स्फटिक मणि की ऐसी अद्भुत प्रतिमा नहीं है। 1956 में आचार्य विद्यानंद, 1975 में आचार्य विद्या सागर, 1986 में आचार्य विमल सागर जैसे संतों ने यहां वर्षायोग किया था।
चंद्रप्रभु मंदिर मे लगती है प्रमुख शास्त्र गद्दी
मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष ललित मोहन रपरिया ने बताया कि पर्यूषण पर्व में हर साल चंद्रप्रभु मंदिर में शास्त्र गद्दी लगती है। देश के ख्यातिप्राप्त जैन विद्वान यहां की शास्त्र गद्दी पर प्रवचन कर चुके हैं। पीलीकोठी निवासी अरुण जैन बताते हैं कि भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमा का दर्शन करने मात्र से पाप कर्मों का नाश हो जाता है।
चंद्रप्रभु मंदिर मे लगती है प्रमुख शास्त्र गद्दी
मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष ललित मोहन रपरिया ने बताया कि पर्यूषण पर्व में हर साल चंद्रप्रभु मंदिर में शास्त्र गद्दी लगती है। देश के ख्यातिप्राप्त जैन विद्वान यहां की शास्त्र गद्दी पर प्रवचन कर चुके हैं। पीलीकोठी निवासी अरुण जैन बताते हैं कि भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमा का दर्शन करने मात्र से पाप कर्मों का नाश हो जाता है।