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मिलावटी और जंक फूड से युवाओं के घुटने हो रहे खराब, अपनी सेहत का रखें विशेष ख्याल

Sun, 01 Mar 2020 02:28 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 01 Mar 2020 02:28 PM IST
सार

मिलावटी-जंक फूड से युवाओं के घुटने खराब हो रहे हैं। ऐसे 40-50 साल के लोगों में गठिया की परेशानी मिल रही है। इनमें पांच से आठ फीसदी लोगों को घुटना प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ रही है। 

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knee getting damage in young age due to adulterated and junk food
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा ऑर्थोपेडिक सोसाइटी और उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के बैनर तले फतेहाबाद रोड स्थित एक होटल में शनिवार को ऑर्थोप्लास्टी कान्क्लेव में वक्ताओं ने घुटना प्रत्यारोपण की नई तकनीक पर व्याख्यान दिए। ऑपरेशन का सजीव प्रसारण भी हुआ।
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रोहतक के डॉ. नरेंद्र रोहेला ने कहा कि खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक, जंक और फास्ट फूड में केमिकल और मिलावटी खाद्य सामग्री से युवाओं के जोड़ खराब हो रहे हैं। इसमें हानिकारक तत्वों से घुटने के कार्टिलेज खराब होत है और यह तेजी से घिसने लगते हैं। 
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एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीपी पाल ने बताया कि स्टेरॉयड के इस्तेमाल से कूल्हा कमजोर हो रहे हैं। इसमें बॉडी बिल्डिंग करने वाले युवा और झोलाछाप से इलाज कराने वाले मरीज ज्यादा रहते हैं। 
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कार्यशाला सचिव डॉ. अरुण गुप्ता ने बताया कि अब गोल्डन नी आ रहा है, जिसमें टाइटेनियम नियोबियम नाइट्रेट की सात लेयर होती हैं, इससे मेटल एलर्जी नहीं होती है और करीब 30 साल तक जोड़ चलता है।

आधुनिक जीवनशैली भी बना रही गठिया रोगी: डॉ. सतीश पटेल

अहमदाबाद के डॉ. सतीश पटेल ने आधुनिक जीवनशैली को भी गठिया की वजह बताया। अब लोग जमीन पर नहीं बैठते, पालती भी नहीं मारते, पैदल कम चलते हैं, लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर कार्य करते हैं, इससे घुटनों की नलिकाओं में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। पहले दर्द होता है, बाद में गठिया होने लगता है। इससे कूल्हों पर भी इसका असर पड़ता है।

घुटना बदलवाने से पहले मरीज ने देखी लाइव सर्जरी

सिकंदरा निवासी 65 साल के केके गुप्ता के घुटने खराब हो गए हैं। वो चिकित्सक के पास पहुंचे तो पता चला कि इस मामले में डॉक्टरों की कार्यशाला भी है, जहां ऑपरेशन होंगे और सजीव देखे जा सकेंगे। ऐसे में उन्होंने शनिवार को ऑपरेशन का सजीव हाल देखा। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन देखने के बाद उनका डर भी कम हुआ।

स्टेम सेल से जोड़ प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं: डॉ. योगीश कामत

मनीपाल यूनिवर्सिटी के डॉ. योगीश कामत ने बताया कि स्टेम सेल से गठिया रोग ठीक किया जा सकता है, इसमें जोड़ प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया चुनिंदा मरीजों में ही संभव है। इसमें बोनमेरो निकालकर घुटने में स्थापित किया जाता है। स्टेम सेल के जरिए दो महीने में कार्टिलेज बन जाती है। इसमें मरीज को चिकित्सकीय निगरानी में ही रखा जाता है।
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