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भारत एक देश नहीं, बल्कि मजबूत राष्ट्र- जिला जज
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कासगंज में जिला जज ज्योत्सना शर्मा को स्मृति चिह्न प्रदान करते अधिवक्ता परिषद की पदाधिकारी
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। अधिवक्ता परिषद और सिविल बार एसोसिएशन ने जिला न्यायालय परिसर में सेमिनार का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने संवैधानिक दृष्टिकोण में राष्ट्रीय कर्तव्य बोध विषय पर आयोजित सेमिनार में अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य वक्ता जिला जज ज्योत्सना शर्मा, मुख्य वक्ता प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता श्रीकृष्ण पहल ने मां सरस्वती, भारत माता, संविधान निर्माता डा. बीआर आंबेडकर, पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद के चित्रों पर माल्यार्पण कर शुभारंभ किया।
जिला जज ज्योत्सना शर्मा ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं है। अपितु एक मजबूत राष्ट्र है। हमें राष्ट्रहित के मद्देनजर अपने कर्तव्य का शुचितापूर्ण निर्वहन करना चाहिए। महाधिवक्ता श्रीकृष्ण पहल ने कहा कि हमारे देश के संविधान में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। संविधान की मूल प्रति में भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, गुरुकुल, भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी, आदि अनेक भारतीय महापुरुषों के चित्र हैं, जो संविधान की मूल भावना को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम अध्यक्ष सेवानिवृत्त एडीजे उमाशंकर शर्मा ने कहा कि संविधान प्रदत्त अधिकार और स्वतंत्रता राष्ट्रहित में सर्वोपरि नहीं है। राष्ट्रहित में कार्य करते हुए अधिकार और स्वतंत्रता का विचार कर सकते हैं। संविधान निर्माण में डा. आंबेडकर, डा. राजेंद्र प्रसाद के अलावा अनेक विद्वानों ने परिश्रम किया। अपने संविधान व सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। विशेष न्यायाधीश कृपा शंकर, प्रधान न्यायाधीश विजेश कुमार, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुधांशु अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे।
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संचालन अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव यदुवंशी ने किया। एडीजे नवनीत कुमार, धीरेंद्र कुमार, राकेश कुमार, विकास गोस्वामी, गजेंद्र कुमार, भारत सिंह यादव, न्यायिक अधिकारी चेतना सिंह, अलका अग्रवाल, अर्पित पवार, अनुप्रिया, अनु एरावत, प्रव्यांशु गुप्ता, सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष शत्रुंजय गुप्ता, कासगंज बार एसोसिएशन अध्यक्ष जयकुमार सक्सेना, अधिवक्ता परिषद अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी, राजीव वशिष्ठ, संजीव दरक, एमपी सिंह वर्मा, उपेंद्र मिश्रा, रमेश गोला, अनिल यादव आदि मौजूद रहे।
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जिला जज ज्योत्सना शर्मा ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं है। अपितु एक मजबूत राष्ट्र है। हमें राष्ट्रहित के मद्देनजर अपने कर्तव्य का शुचितापूर्ण निर्वहन करना चाहिए। महाधिवक्ता श्रीकृष्ण पहल ने कहा कि हमारे देश के संविधान में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। संविधान की मूल प्रति में भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, गुरुकुल, भगवान बुद्ध, महावीर स्वामी, आदि अनेक भारतीय महापुरुषों के चित्र हैं, जो संविधान की मूल भावना को दर्शाते हैं।
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कार्यक्रम अध्यक्ष सेवानिवृत्त एडीजे उमाशंकर शर्मा ने कहा कि संविधान प्रदत्त अधिकार और स्वतंत्रता राष्ट्रहित में सर्वोपरि नहीं है। राष्ट्रहित में कार्य करते हुए अधिकार और स्वतंत्रता का विचार कर सकते हैं। संविधान निर्माण में डा. आंबेडकर, डा. राजेंद्र प्रसाद के अलावा अनेक विद्वानों ने परिश्रम किया। अपने संविधान व सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखना हमारी जिम्मेदारी है। विशेष न्यायाधीश कृपा शंकर, प्रधान न्यायाधीश विजेश कुमार, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुधांशु अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे।
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संचालन अपर जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव यदुवंशी ने किया। एडीजे नवनीत कुमार, धीरेंद्र कुमार, राकेश कुमार, विकास गोस्वामी, गजेंद्र कुमार, भारत सिंह यादव, न्यायिक अधिकारी चेतना सिंह, अलका अग्रवाल, अर्पित पवार, अनुप्रिया, अनु एरावत, प्रव्यांशु गुप्ता, सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष शत्रुंजय गुप्ता, कासगंज बार एसोसिएशन अध्यक्ष जयकुमार सक्सेना, अधिवक्ता परिषद अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी, राजीव वशिष्ठ, संजीव दरक, एमपी सिंह वर्मा, उपेंद्र मिश्रा, रमेश गोला, अनिल यादव आदि मौजूद रहे।