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UP: महिलाओं में क्यों बढ़ रहा चिड़चिड़ापन, भूलने की भी हो रही बीमारी; चिकित्सकों ने दिए सुझाव

Sat, 05 Jul 2025 09:41 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 05 Jul 2025 09:41 AM IST
सार

महिलाओं में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। इसके साथ ही भूलने की भी बीमारी हो रही है। चिकित्सकों ने बताया कि ये सब हार्मोंस की कमी से हो रहा है। 
 

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irritability increasing in women and they are also getting amnesia doctors give suggestions
महिला (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

विस्तार

माहवारी बंद होने (मीनोपॉज) से महिलाओं की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। हार्माेंस की कमी से भूलने, चिड़चिड़ापन, पसीना आने की बीमारी हो रही है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से मानसिक सेहत भी बिगड़ जाती है।
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ये बातें फतेहाबाद रोड स्थित होटल में शुक्रवार को आगरा मीनोपॉज सोसाइटी की कार्यशाला में सामने आईं। ऐसे लोगों को विशेषज्ञ को दिखाने की जरूरत बताई गई। अध्यक्ष डॉ. संजना महेश ने बताया कि 35 से 50 साल की उम्र में ये दिक्कत पनपती है। माहवारी बंद होने से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्माेंस बंद होने लगते हैं। इससे महिला के व्यवहार में तेजी से बदलाव आता है। इसमें चिड़चिड़ापन, जल्दी गुस्सा आना, घबराहट, पसीना अधिक आना, घबराहट में नींद टूटने जैसी परेशानी होने लगती है।

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पूर्व अध्यक्ष डॉ. सविता त्यागी ने कहा कि कई महिलाएं इसे माहवारी संबंधी परेशानी मानकर नजरअंदाज करती हैं। इससे बीमारी बढ़ जाती है। मनोचिकित्सक डॉ. विशाल सिन्हा और न्यूरोफिजीशियन डॉ. एमपी सिंह ने मीनोपॉज के वक्त विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सीख दी।
सचिव डॉ. कीया पाराशर, डॉ. अंजू शर्मा, डॉ. निधि बंसल, डॉ. आरती गुप्ता, डॉ. गरिमा, डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. सुनीता पंजवानी, डॉ मधु राजपाल, डॉ. संतोष सिंघल, डॉ. रश्मि सिंह ने भी व्याख्यान दिए।

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चिकित्सकों ने दिए सुझाव
- रोजाना तेज गति से 10 हजार कदम चलें। योग-ध्यान करें।
- भोजन में प्रोटीनयुक्त और फाइबरयुक्त सामग्री अधिक बढ़ाएं।
- भोजन में सोयाबीन, छोले, राजमा, दाल, फल-सलाद बढ़ाएं।
- माहवारी में दिक्कत को नजरअंदाज न करें, चिकित्सक को दिखाएं।

 
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