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फर्जी एनओसी से नक्शा पास: जांच में जुटा प्रशासन और एडीए, कई अफसरों और कर्मचारियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Sun, 11 Oct 2026 10:27 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 11 Oct 2026 10:27 AM IST
सार

जूल विभाग ने स्पष्ट किया कि 1929-30 की सर्वे शीट के अनुसार भूखंड नजूल का हिस्सा है, इसलिए एनओसी देना असंभव है। अब प्रशासनिक जांच में यह साफ हो गया है कि एडीए में जिस पत्र को आधार बनाकर नक्शा पास किया गया, वह नजूल विभाग से भेजा ही नहीं गया था। 

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Investigation intensifies into case of getting building plans approved using forged NOC in Agra
आगरा विकास प्राधिकरण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के एमजी रोड पर धाकरान चौराहे के पास एक संपत्ति के नक्शा पास कराने के मामले में प्रशासनिक जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में जिस पत्र के आधार पर नक्शा पास किया गया था, वह नजूल विभाग द्वारा कभी जारी ही नहीं किया गया था। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि तहसील और एडीए के कर्मचारियों ने निर्माण की मंजूरी हासिल करने के लिए बिल्डर के साथ मिलकर मिलीभगत से नक्शा पास कराया। विभाग अब एनओसी जारी होने के समय तैनात कर्मियों की भूमिका की जांच कर रहा है। साथ ही प्राधिकरण को भी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए कहा है।
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बता दें, संपत्ति मालिक ने ओबीपास पोर्टल पर 4 जनवरी 2025 की एनओसी अपलोड कर मानचित्र स्वीकृत कराया था। पहले यह दावा किया गया कि भूमि नजूल या राजकीय आस्थान की नहीं है। हालांकि, बाद में नजूल विभाग ने स्पष्ट किया कि 1929-30 की सर्वे शीट के अनुसार यह भूखंड नजूल का हिस्सा है, इसलिए एनओसी देना असंभव है। अब प्रशासनिक जांच में यह साफ हो गया है कि एडीए में जिस पत्र को आधार बनाकर नक्शा पास किया गया, वह नजूल विभाग से भेजा ही नहीं गया था। 
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नजूल विभाग द्वारा केवल एक ही वास्तविक पत्र जारी किया गया था जो प्राधिकरण को प्राप्त हुआ था। इसके बावजूद बिना प्रामाणिक पत्र के नक्शा कैसे पास हुआ और निर्माण की अनुमति कैसे दी गई, यह गंभीर जांच का विषय बन गया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि फर्जी एनओसी के जरिये नक्शे की मंजूरी ली गई है, तो इसमें संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित आवेदक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्राधिकरण भी आंतरिक जांच करने में जुटा है।
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