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UP: क्या हैं नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र...जिनके प्रयोग से यमुना होगी प्रदूषणमुक्त, गंगा का जल भी होगा अविरल
Thu, 16 Jan 2025 09:50 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
ज्योत्यवेंद्र दुबे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
ज्योत्यवेंद्र दुबे, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 16 Jan 2025 09:50 AM IST
सार
गंगा को अविरल और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए जैविक खेती और वनीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। कीटनाशक के स्थान पर नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घोलों का उपयोग करना है।
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यमुना नदी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
गंगा की धारा अविरल करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अब सहायक नदियों के किनारे प्राकृतिक खेती कराई जाएगी। आगरा में गंगा की सहायक नदी यमुना के किनारों पर किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। उन्हें रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर लाने का जिम्मा कृषि विभाग के साथ ही गंगा मिशन से जुड़े अधिकारियों को सौंपा गया है। इसके लिए काम भी शुरू हो गया है।
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गंगाजल को निर्मल बनाने के लगातार प्रयास जारी हैं। इसके तहत गंगा की सहायक नदियों को भी निर्मल बनाने की कवायद हो रही है। यमुना भी गंगा की सहायक नदियों में से एक है। ऐसे में अब यमुना के जल को भी निर्मल और स्वच्छ बनाने के लिए काम शुरू हो गया है।
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उप कृषि निदेशक पीके मिश्रा ने बताया कि यमुना के आसपास के खेतों में रासायनिक उर्वरकों से खेती की जाती है। बारिश में खेतों का पानी नदी में पहुंचता है इससे रासायनिक पदार्थ भी नदी के पानी में जाकर घुल जाते हैं। वहीं गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में भी ये एक बड़ा रोड़ा है। इसीलिए यमुना के दोनों किनारों के पांच किलोमीटर के क्षेत्र में किसानों को प्रशिक्षित कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है।
जीवामृत बढ़ाएंगे उपज, नीमास्त्र रोकेगा कीटों का प्रकोप
प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं होगा। फसलों की उपज बढ़ाने के लिए जीवामृत, बीजामृत और घनामृत का प्रयोग किया जाएगा। वहीं, कीटनाशक के स्थान पर नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घोलों का उपयोग करना है। इसकी उपलब्धता के लिए भी कृषि विभाग काम करेगा।
प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं होगा। फसलों की उपज बढ़ाने के लिए जीवामृत, बीजामृत और घनामृत का प्रयोग किया जाएगा। वहीं, कीटनाशक के स्थान पर नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घोलों का उपयोग करना है। इसकी उपलब्धता के लिए भी कृषि विभाग काम करेगा।
यमुना का पानी बेहद प्रदूषित
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध यमुना के प्रदूषण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। नवंबर माह में वाटरवर्क्स के पास से लिए गए नमूनों के परिणाम के अनुसार पानी में बायोकेमिकल समेत अन्य सभी आंकड़े ई श्रेणी से भी नीचे हैं। जिससे यमुना का पानी पीना तो दूर नहाने योग्य भी नहीं है। डिसॉल्वड बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड का आंकड़ा 7.6 मिली ग्राम प्रति लीटर है, जबकि यह अधिकतम 3 से 4 मिली ग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। वहीं कुल कोलीफॉर्म 15 हजार है जो अधिकतम 5 से 6 हजार तक ही होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध यमुना के प्रदूषण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। नवंबर माह में वाटरवर्क्स के पास से लिए गए नमूनों के परिणाम के अनुसार पानी में बायोकेमिकल समेत अन्य सभी आंकड़े ई श्रेणी से भी नीचे हैं। जिससे यमुना का पानी पीना तो दूर नहाने योग्य भी नहीं है। डिसॉल्वड बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड का आंकड़ा 7.6 मिली ग्राम प्रति लीटर है, जबकि यह अधिकतम 3 से 4 मिली ग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। वहीं कुल कोलीफॉर्म 15 हजार है जो अधिकतम 5 से 6 हजार तक ही होना चाहिए।