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आयकर दिवस: चार हजार गुना बढ़ा सरकार का खजाना, सात दशक में आगरा ने दिया ऐसा योगदान
Wed, 24 Jul 2019 12:09 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 24 Jul 2019 12:09 PM IST
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आयकर विभाग (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
159 साल पहले आयकर की शुरूआत हुई और आजादी के बाद आयकर सरकार के खजाने को भरने में सबसे प्रमुख रहा। आजादी के बाद के सात दशकों में आयकर से चार हजार गुना की बढ़ोतरी आगरा क्षेत्र में हुई है।
हालांकि 1951 से लेकर अब तक दो सौ गुना आयकरदाताओं की संख्या बढ़ी है। सात दशकों में 3716 के मुकाबले अब 6.35 लाख आयकर दाता अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के बाद मुगलिया शहर में तब पांच हजार रुपये से ज्यादा आय वालों की संख्या ज्यादा थी, जबकि पांच हजार से कम आय वाले संख्या में आधे ही थे। 1957 में न्यूनतम टैक्स आय 3 हजार रुपये कर दी गई थी। सराफा, जूता, फाउंड्री, आयातक तब प्रमुख आयकरदाताओं में थे।
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हालांकि 1951 से लेकर अब तक दो सौ गुना आयकरदाताओं की संख्या बढ़ी है। सात दशकों में 3716 के मुकाबले अब 6.35 लाख आयकर दाता अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के बाद मुगलिया शहर में तब पांच हजार रुपये से ज्यादा आय वालों की संख्या ज्यादा थी, जबकि पांच हजार से कम आय वाले संख्या में आधे ही थे। 1957 में न्यूनतम टैक्स आय 3 हजार रुपये कर दी गई थी। सराफा, जूता, फाउंड्री, आयातक तब प्रमुख आयकरदाताओं में थे।
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तब
1952 में 1611 आयकरदाता पांच हजार रुपये से कम थे, जिनसे सालाना 1.07 लाख टैक्स ही मिला, जबकि पांच हजार आय से अधिक के 2105 आयकरदाता थे, जिनसे 29.47 लाख रुपये आयकर जमा हुआ। 3716 आयकरदाताओं से तब 30.54 लाख रुपये आयकर विभाग को मिले थे।
अब
2018-19 में आगरा के सीआईटी-1 और सीआईटी-2 क्षेत्र में 6.35 लाख आयकरदाता हैं, जिन्होंने 1250 करोड़ रुपये टैक्स जमा किया। केवल एक साल में ही दोनों जोन में 57 हजार नए आयकर दाता बढ़े हैं। आयकर की लिमिट और रिटर्न दाखिल करने पर ही छूट के प्रावधान से यह संख्या बढ़ी है
फुटवियर, सराफा पीछे, पान मसाला उद्योग आयकर में आगे
ताजनगरी की अर्थ व्यवस्था में सबसे ज्यादा रोजगार और हिस्सेदारी रखने वाले फुटवियर तथा पर्यटन उद्योग आयकर जमा करने में काफी पीछे हैं। आगरा आयकर विभाग के दोनों ही क्षेत्रों में पान मसाला उद्योग सबसे आगे है।
फुटवियर टॉप 10 में तो है, लेकिन टॉप 3 में पान मसाला, पैकिंग और पैकेटबंद मीट, सर्जिकल आइटम्स आदि हैं। उत्तर भारत और देश के चांदी पायल में आगे आगरा के सराफा कारोबारी टैक्स देने में काफी पीछे हैं। यही हाल रियल इस्टेट का भी है। पांच साल पहले तक रियल इस्टेट से टैक्स अच्छी खासी संख्या में आता था, लेकिन मंदी के बाद ये सेक्टर टॉप 10 में नहीं बचा।
1952 में 1611 आयकरदाता पांच हजार रुपये से कम थे, जिनसे सालाना 1.07 लाख टैक्स ही मिला, जबकि पांच हजार आय से अधिक के 2105 आयकरदाता थे, जिनसे 29.47 लाख रुपये आयकर जमा हुआ। 3716 आयकरदाताओं से तब 30.54 लाख रुपये आयकर विभाग को मिले थे।
अब
2018-19 में आगरा के सीआईटी-1 और सीआईटी-2 क्षेत्र में 6.35 लाख आयकरदाता हैं, जिन्होंने 1250 करोड़ रुपये टैक्स जमा किया। केवल एक साल में ही दोनों जोन में 57 हजार नए आयकर दाता बढ़े हैं। आयकर की लिमिट और रिटर्न दाखिल करने पर ही छूट के प्रावधान से यह संख्या बढ़ी है
फुटवियर, सराफा पीछे, पान मसाला उद्योग आयकर में आगे
ताजनगरी की अर्थ व्यवस्था में सबसे ज्यादा रोजगार और हिस्सेदारी रखने वाले फुटवियर तथा पर्यटन उद्योग आयकर जमा करने में काफी पीछे हैं। आगरा आयकर विभाग के दोनों ही क्षेत्रों में पान मसाला उद्योग सबसे आगे है।
फुटवियर टॉप 10 में तो है, लेकिन टॉप 3 में पान मसाला, पैकिंग और पैकेटबंद मीट, सर्जिकल आइटम्स आदि हैं। उत्तर भारत और देश के चांदी पायल में आगे आगरा के सराफा कारोबारी टैक्स देने में काफी पीछे हैं। यही हाल रियल इस्टेट का भी है। पांच साल पहले तक रियल इस्टेट से टैक्स अच्छी खासी संख्या में आता था, लेकिन मंदी के बाद ये सेक्टर टॉप 10 में नहीं बचा।
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प्रधान आयकर आयुक्त-1 रेनू जौहरी ने बताया कि सरकार हर स्तर पर निगरानी रख रही है। ऐसे में टैक्स की चोरी करके बचना आसान नहीं है। व्यापारी और लोग अपना आयकर रिटर्न दाखिल करें और उचित कर दें। लगातार आयकर रिटर्न में सुधार हो रहे हैं।
जयंत मिश्र प्रधान आयकर आयुक्त-2 का कहना है कि आगरा में आयकर दाताओं की संख्या उम्मीद से कम है। कारोबार और अर्थ व्यवस्था में बढ़ोतरी देखते हुए नए आयकरदाताओं की संख्या भी कम है। हमारी अपील है कि जो लोग करयोग्य आय के दायरे में हैं, वह अवश्य कर चुकाएं।
जयंत मिश्र प्रधान आयकर आयुक्त-2 का कहना है कि आगरा में आयकर दाताओं की संख्या उम्मीद से कम है। कारोबार और अर्थ व्यवस्था में बढ़ोतरी देखते हुए नए आयकरदाताओं की संख्या भी कम है। हमारी अपील है कि जो लोग करयोग्य आय के दायरे में हैं, वह अवश्य कर चुकाएं।