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44 लाख रुपये की स्टांप चोरी, जुर्माना लिया न शुल्क वसूली
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आगरा। सात बैनामों में 44 लाख रुपये की स्टांप चोरी हो गई। स्टांप कमी और अर्थदंड अधिरोपित किया गया। लेकिन अपील में सहायक आयुक्त स्टांप, एडीएम वित्त एवं राजस्व और अपर आयुक्त कार्यालय में ‘खेल’ हो गया। 44 लाख रुपये के स्टांप मामलों में एक रुपये का जुर्माना नहीं लिया गया। बिना स्टांप शुल्क वसूली के फाइलें दाखिल दफ्तर हो गई। इस मामले में जिलाधिकारी ने सातों बैनामों की पुन: जांच की बात कही है।
बल्का बस्ती में मनीष वर्मा ने एक मकान 475.94 वर्ग मीटर का बैनामा कराया। जिसमें 254.16 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया था। जिसकी मालकियत 1.10 करोड़ रुपये थी। 7.70 लाख रुपये के स्टांप अदा किए। उप निबंधक ने संपत्ति का निरीक्षण किया, तो उक्त संपत्ति का सर्किल रेट जांच में 35 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर निकला। जिसके आधार पर संपत्ति की मालकियत 2.20 करोड़ रुपये मिली। जिसके आधार पर 7,71960 रुपये की स्टांप कमी और 1,92990 रुपये का अर्थदंड आरोपित किया। प्रतिवादी की आपत्ति के बाद उपायुक्त स्टांप कार्यालय ने स्टांप कमी के आरोप से उसे मुक्त कर दिया।
ऐसा ही मौजा रुनकता, किरावली के श्रीजती शू प्रा.लि. के बैनामे में हुआ। फर्म ने 9794 वर्ग मीटर जमीन का बैनामा कराया। जमीन की मालकियत 3.86 करोड़ रुपये आंकी गई। जिस पर 27.09 लाख रुपये का स्टांप दिया। जिलाधिकारी ने एडीएम प्रशासन से संपत्ति का सत्यापन कराया। सत्यापन के समय क्रेता-विक्रेता दोनों पक्ष हाजिर नहीं हुए। मौके पर संपत्ति के चारों ओर चहारदीवारी, पांच बबूल के पेड़, एक लोहे का गेट मिला। तहसीलदार ने रिपोर्ट में संपत्ति की कीमत 4.84 करोड़ रुपये निकाली। जिसके आधार पर 6.82 लाख रुपये की स्टांप कमी और 3.41 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। दो साल एडीएम वित्त एवं राजस्व कार्यालय में मुकदमा चला। जिसके बाद क्रेता को क्लीन चिट मिल गई। यहां भी बिना कोई स्टांप कमी व जुर्माना वसूले फाइल दाखिल दफ्तर हो गई।
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जिले में बड़े पैमाने पर बैनामों में स्टांप चोरी की गई। कहीं सर्किट रेट छिपाए, तो कहीं व्यावसायिक संपत्तियों का बैनामा खाली प्लॉट व आधी-अधूरे तथ्यों के आधार पर हुए। जब जुर्माना व स्टांप चोरी की वसूली का नंबर आया तो पहले फाइलें अपील में पड़ी रहीं। 44 लाख रुपये की स्टांप चोरी के सातों बैनामों में एक रुपये की वसूली नहीं की गई। निबंधन सूत्रों की मानें, तो स्टांप चोरी के मामलों को छोड़ने के एवज में अधिकारियोें की मिलीभगत से ‘खेल’ हो गया।
इन मामलों में ‘खेल’ की आशंका
- स्टांप वाद-02080/2019 श्रीजती शू प्रा.लि. - 6,82080 रुपये की स्टांप कमी और 341040 रुपये का अर्थदंड था।
- स्टांप वाद- 01656/2019 मनीष वर्मा - 771960 रुपये की स्टांप कमी और 192990 रुपये का अर्थदंड आरोपित था।
- स्टांप वाद- 00181/ 2019 प्रवीन गुप्ता - 334670 रुपये की स्टांप कमी और 30000 रुपये का अर्थदंड आरोपित था।
- स्टांप वाद- 00178/2020 रेखा मुनि एजूकेशनल महाविद्यालय - 501350 रुपये की स्टांप कमी व 501350 रुपये अर्थदंड।
- स्टांप वाद- 00439/2020 ताजनगरी सहकारी समिति - 280000 रुपये की स्टांप कमी व 280000 रुपये का अर्थदंड था।
- स्टांप वाद- 120/ 2020 सुरेंद्र कुमार अग्रवाल - 478900 रुपये की स्टांप कमी और 200000 रुपये का अर्थदंड आरोपित।
- स्टांप वाद- 633/ 2017 शशि सिकरवार - 464910 रुपये की स्टांप कमी और 500 रुपये का अर्थदंड आरोपित हुआ था।
दोबारा कराएंगे सत्यापन
सब रजिस्ट्रार व तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद अर्थदंड व स्टांप कमी आरोपित की जाती है। ऐसे किसी मामले को नहीं छोड़ा जा सकता। जरूर कोई वसूली की गई होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ है तो उन बैनामों की दोबारा जांच कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी व स्टांप कलक्टर
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बल्का बस्ती में मनीष वर्मा ने एक मकान 475.94 वर्ग मीटर का बैनामा कराया। जिसमें 254.16 वर्ग मीटर कवर्ड एरिया था। जिसकी मालकियत 1.10 करोड़ रुपये थी। 7.70 लाख रुपये के स्टांप अदा किए। उप निबंधक ने संपत्ति का निरीक्षण किया, तो उक्त संपत्ति का सर्किल रेट जांच में 35 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर निकला। जिसके आधार पर संपत्ति की मालकियत 2.20 करोड़ रुपये मिली। जिसके आधार पर 7,71960 रुपये की स्टांप कमी और 1,92990 रुपये का अर्थदंड आरोपित किया। प्रतिवादी की आपत्ति के बाद उपायुक्त स्टांप कार्यालय ने स्टांप कमी के आरोप से उसे मुक्त कर दिया।
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ऐसा ही मौजा रुनकता, किरावली के श्रीजती शू प्रा.लि. के बैनामे में हुआ। फर्म ने 9794 वर्ग मीटर जमीन का बैनामा कराया। जमीन की मालकियत 3.86 करोड़ रुपये आंकी गई। जिस पर 27.09 लाख रुपये का स्टांप दिया। जिलाधिकारी ने एडीएम प्रशासन से संपत्ति का सत्यापन कराया। सत्यापन के समय क्रेता-विक्रेता दोनों पक्ष हाजिर नहीं हुए। मौके पर संपत्ति के चारों ओर चहारदीवारी, पांच बबूल के पेड़, एक लोहे का गेट मिला। तहसीलदार ने रिपोर्ट में संपत्ति की कीमत 4.84 करोड़ रुपये निकाली। जिसके आधार पर 6.82 लाख रुपये की स्टांप कमी और 3.41 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। दो साल एडीएम वित्त एवं राजस्व कार्यालय में मुकदमा चला। जिसके बाद क्रेता को क्लीन चिट मिल गई। यहां भी बिना कोई स्टांप कमी व जुर्माना वसूले फाइल दाखिल दफ्तर हो गई।
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जिले में बड़े पैमाने पर बैनामों में स्टांप चोरी की गई। कहीं सर्किट रेट छिपाए, तो कहीं व्यावसायिक संपत्तियों का बैनामा खाली प्लॉट व आधी-अधूरे तथ्यों के आधार पर हुए। जब जुर्माना व स्टांप चोरी की वसूली का नंबर आया तो पहले फाइलें अपील में पड़ी रहीं। 44 लाख रुपये की स्टांप चोरी के सातों बैनामों में एक रुपये की वसूली नहीं की गई। निबंधन सूत्रों की मानें, तो स्टांप चोरी के मामलों को छोड़ने के एवज में अधिकारियोें की मिलीभगत से ‘खेल’ हो गया।
इन मामलों में ‘खेल’ की आशंका
- स्टांप वाद-02080/2019 श्रीजती शू प्रा.लि. - 6,82080 रुपये की स्टांप कमी और 341040 रुपये का अर्थदंड था।
- स्टांप वाद- 01656/2019 मनीष वर्मा - 771960 रुपये की स्टांप कमी और 192990 रुपये का अर्थदंड आरोपित था।
- स्टांप वाद- 00181/ 2019 प्रवीन गुप्ता - 334670 रुपये की स्टांप कमी और 30000 रुपये का अर्थदंड आरोपित था।
- स्टांप वाद- 00178/2020 रेखा मुनि एजूकेशनल महाविद्यालय - 501350 रुपये की स्टांप कमी व 501350 रुपये अर्थदंड।
- स्टांप वाद- 00439/2020 ताजनगरी सहकारी समिति - 280000 रुपये की स्टांप कमी व 280000 रुपये का अर्थदंड था।
- स्टांप वाद- 120/ 2020 सुरेंद्र कुमार अग्रवाल - 478900 रुपये की स्टांप कमी और 200000 रुपये का अर्थदंड आरोपित।
- स्टांप वाद- 633/ 2017 शशि सिकरवार - 464910 रुपये की स्टांप कमी और 500 रुपये का अर्थदंड आरोपित हुआ था।
दोबारा कराएंगे सत्यापन
सब रजिस्ट्रार व तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद अर्थदंड व स्टांप कमी आरोपित की जाती है। ऐसे किसी मामले को नहीं छोड़ा जा सकता। जरूर कोई वसूली की गई होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ है तो उन बैनामों की दोबारा जांच कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी व स्टांप कलक्टर