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पुराने पन्नों से: यदि इंदिरा गांधी ने लिया होता ये फैसला, तो बसपा का चुनाव चिन्ह न होता हाथी
Thu, 18 Apr 2024 12:23 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
रूपाली यादव, आगरा
रूपाली यादव, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 18 Apr 2024 12:23 PM IST
सार
ये बात है 1977 के चुनाव की, जिसमें हार के बाद कांग्रेस का विभाजन हुआ। इसके बाद कांग्रेस (आई) का गठन किया। नई पार्टी के लिए चुनाव चिन्ह के विकल्प दिए गए, जिसमें इंदिरा गांधी ने पंजे को वरीयता देते हुए हाथी को छोड़ दिया था।
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इंदिरा गांधी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश के विधानसभा 1985 के चुनाव में आगरा में हाथी चुनाव चिह्न को लेकर उम्मीदवारों के बीच काफी रस्साकशी हुई थी। कई उम्मीदवारों ने हाथी चुनाव चिह्न पर दावा ठोका था। प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से मामले को सुलझाया था। कई प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्र में हाथी चुनाव चिह्न को प्रथम वरीयता दी थी। प्रत्याशियों में काफी कशमकश और विरोध के बाद आखिर में चुनाव चिह्न रिपब्लिकन पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी रनवीर सिंह वरुन को आवंटित कर दिया गया। चुनाव चिह्न का आवंटन निर्वाचन प्रतीक, आरक्षण तथा आवंटन आदेश 1968 के तहत किया गया। इस संबंध में अमर उजाला के 10 फरवरी 1952 के अंक में खबर प्रकाशित हुई।
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पहले आम चुनाव से अब तक रहा हाथी चिह्न
हाथी एक ऐसा चुनाव चिह्न है जो स्वतंत्रता बाद 1952 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर वर्तमान में किसी न किसी सियासी दल का चुनाव प्रतीक रहा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इसे 1984 में इसे अपना चुनाव चिह्न चुना। तब से यह बसपा का प्रतीक है।
हाथी एक ऐसा चुनाव चिह्न है जो स्वतंत्रता बाद 1952 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर वर्तमान में किसी न किसी सियासी दल का चुनाव प्रतीक रहा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इसे 1984 में इसे अपना चुनाव चिह्न चुना। तब से यह बसपा का प्रतीक है।
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बसपा से पहले 1952 और 1957 के चुनाव में यह ऑल इंडिया शेड्यूल कास्ट फेडरेशन का चुनावी निशान रहा। जो बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की पार्टी थी। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) ने 1962 में इसे अपना चुनाव चिह्न बनाया। इसके अलावा कई क्षेत्रीय दलों जैसे नगालैंड पीपुल्स पार्टी, सिक्किम संग्राम परिषद, पीएमके, असम गण परिषद के पास भी यह चुनाव चिह्न रहा।
हाथी को नहीं चुना कांग्रेस ने चुनाव चिह्न
1977 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस का विभाजन हुआ। जिसके बाद इंदिरा गांधी कांग्रेस (आई) का गठन किया। कांग्रेस (आई) के पास चुनाव चिह्न चुनने के तीन विकल्प थे जिसमें से इंदिरा गांधी ने पंजे को वरीयता देते हुए हाथी को छोड़ दिया।
1977 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस का विभाजन हुआ। जिसके बाद इंदिरा गांधी कांग्रेस (आई) का गठन किया। कांग्रेस (आई) के पास चुनाव चिह्न चुनने के तीन विकल्प थे जिसमें से इंदिरा गांधी ने पंजे को वरीयता देते हुए हाथी को छोड़ दिया।
छिन सकता था बसपा से हाथी चिह्न
मायावती ने सरकार में रहते हुए पार्कों में हाथियों की मूर्ति लगवा दी थीं जिसके कारण उनके चुनाव चिन्ह को जब्त करने की मांग उठने लगी थी। दिल्ली का एक गैर सरकारी संगठन ने न्यायालय में याचिका दायर कर बीएसपी से चिह्न छीनने की पेशकश की। इस मांग के पीछे सरकारी संगठन का कहना था कि पार्कों में जिस तरीके से हाथी के स्मारक बनाए गए हैं वो मतदाता के दिमाग पर असर डालते हैं। प्रस्तुति- रूपाली यादव, आगरा
मायावती ने सरकार में रहते हुए पार्कों में हाथियों की मूर्ति लगवा दी थीं जिसके कारण उनके चुनाव चिन्ह को जब्त करने की मांग उठने लगी थी। दिल्ली का एक गैर सरकारी संगठन ने न्यायालय में याचिका दायर कर बीएसपी से चिह्न छीनने की पेशकश की। इस मांग के पीछे सरकारी संगठन का कहना था कि पार्कों में जिस तरीके से हाथी के स्मारक बनाए गए हैं वो मतदाता के दिमाग पर असर डालते हैं। प्रस्तुति- रूपाली यादव, आगरा