{"_id":"ca8d3666db7bd9044a2fe7fecaa983f4","slug":"i-defeted-due-to-dm-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुझे तो डीएम ने हराया : गणेश ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुझे तो डीएम ने हराया : गणेश
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Wed, 04 Nov 2015 02:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो वोटों से मिली हार का ठीकरा गणेश यादव ने जिलाधिकारी पंकज कुमार के सिर फोड़ा है। उनका आरोप है कि जिलाधिकारी एक मतगणना टेबिल पर अपने हाथों से चार वोट उठाकर अलग रखे थे। उन्हें बुलाकर जबरन हराया गया है।
सुबह करीब 11:30 बजे से प्रारंभ हुई मतगणना करीब चार बजे तक चली। इसके आधे घंटे बाद जिलाधिकारी ने प्रत्याशी गणेश यादव और कुशल यादव के पति राजपाल यादव और वहां मौजूद तीसरे प्रत्याशी यदुवीर सिंह को एक कक्ष में बुला लिया। एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी सिटी और मीडिया कर्मी भी कक्ष में मौजूद थे। डीएम ने पुनर्गणना के परिणाम की एक-एक कापी तीनों प्रत्याशियों को सौंपी। परिणाम पर नजर डालते ही राजपाल का चेहरा खिल गया। हैरान-परेशान गणेश यादव ने जिलाधिकारी से कहा, ‘जब मुझे हराना ही था तो वोटों की गिनती की ड्रामा क्यों किया गया। राजपाल को यूं ही प्रमाणपत्र थमा दिया होता।’ डीएम ने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर निष्पक्ष गणना कराई गई है।
बाहर आते ही गणेश बिफर गए और मीडिया से बोले, ‘मुझे तो डीएम ने हराया है।’ इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के सवाल पर कहा, ‘अब देखेंगे क्या करना है।’ जब पूछा गया विरोधी प्रत्याशी और आप खुद भी सपा से जुड़े हैं तो क्या नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखेंगे? जवाब आया, ‘अब किसके सामने दुखड़ा रोएं, यहां तो खुला खेल हो रहा है। जब मैं जीत गया था तब मुझे प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया गया?’
विज्ञापन
निर्वाचन आयोग के आदेश के संबंध में गणेश यादव ने सवाल उठाया, ‘आयोग से रिकाउंटिंग का आदेश आया है तो अधिकारी उसकी प्रति क्यों नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। अब तो भगवान की शरण में जाऊंगा।’ तीसरे नंबर पर रहे यदुवीर सिंह ने भी गणेश के सुर में सुर मिलाते हुए कहा, ‘जब हम रिकाउंटिंग की मांग कर रहे थे तब प्रशासन ने एक न सुनी और राजपाल के कहने पर दो बार रिकाउंटिंग कराई गई।’
डीएम डटे रहे, ‘तीसरी आंख’ से भी निगरानी
मंगलवार को दूसरी बार हुई पुनर्मतगणना के दौरान डीएम पंकज कुमार और एसएसपी प्रीतिंदर सिंह मतगणना समाप्त होने तक केंद्र पर डटे रहे। गणना दो कक्षों में 16 टेबिल लगाकर कराई गई। करीब 10 वीडियो कैमरे लगे थे। दोनों प्रत्याशियों के एजेंट मौजूद रहे और मीडिया को भी हर तरह से निगरानी करने की छूट दी गई थी।
विज्ञापन
सुबह करीब 11:30 बजे से प्रारंभ हुई मतगणना करीब चार बजे तक चली। इसके आधे घंटे बाद जिलाधिकारी ने प्रत्याशी गणेश यादव और कुशल यादव के पति राजपाल यादव और वहां मौजूद तीसरे प्रत्याशी यदुवीर सिंह को एक कक्ष में बुला लिया। एसएसपी प्रीतिंदर सिंह, एसपी सिटी और मीडिया कर्मी भी कक्ष में मौजूद थे। डीएम ने पुनर्गणना के परिणाम की एक-एक कापी तीनों प्रत्याशियों को सौंपी। परिणाम पर नजर डालते ही राजपाल का चेहरा खिल गया। हैरान-परेशान गणेश यादव ने जिलाधिकारी से कहा, ‘जब मुझे हराना ही था तो वोटों की गिनती की ड्रामा क्यों किया गया। राजपाल को यूं ही प्रमाणपत्र थमा दिया होता।’ डीएम ने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर निष्पक्ष गणना कराई गई है।
विज्ञापन
बाहर आते ही गणेश बिफर गए और मीडिया से बोले, ‘मुझे तो डीएम ने हराया है।’ इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के सवाल पर कहा, ‘अब देखेंगे क्या करना है।’ जब पूछा गया विरोधी प्रत्याशी और आप खुद भी सपा से जुड़े हैं तो क्या नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखेंगे? जवाब आया, ‘अब किसके सामने दुखड़ा रोएं, यहां तो खुला खेल हो रहा है। जब मैं जीत गया था तब मुझे प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया गया?’
विज्ञापन
निर्वाचन आयोग के आदेश के संबंध में गणेश यादव ने सवाल उठाया, ‘आयोग से रिकाउंटिंग का आदेश आया है तो अधिकारी उसकी प्रति क्यों नहीं उपलब्ध करा रहे हैं। अब तो भगवान की शरण में जाऊंगा।’ तीसरे नंबर पर रहे यदुवीर सिंह ने भी गणेश के सुर में सुर मिलाते हुए कहा, ‘जब हम रिकाउंटिंग की मांग कर रहे थे तब प्रशासन ने एक न सुनी और राजपाल के कहने पर दो बार रिकाउंटिंग कराई गई।’
डीएम डटे रहे, ‘तीसरी आंख’ से भी निगरानी
मंगलवार को दूसरी बार हुई पुनर्मतगणना के दौरान डीएम पंकज कुमार और एसएसपी प्रीतिंदर सिंह मतगणना समाप्त होने तक केंद्र पर डटे रहे। गणना दो कक्षों में 16 टेबिल लगाकर कराई गई। करीब 10 वीडियो कैमरे लगे थे। दोनों प्रत्याशियों के एजेंट मौजूद रहे और मीडिया को भी हर तरह से निगरानी करने की छूट दी गई थी।