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कार्डियक अरेस्ट: 5 मिनट तक शरीर में रहती है ऑक्सीजन...मुंह से दो बार सांस, 30 बार सीने की पंपिंग से बचेगी जान
Sun, 11 May 2025 12:16 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 11 May 2025 12:16 PM IST
सार
कार्डियक अरेस्ट के दाैरान मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसको लेकर एसएन मेडिकल काॅलेज में बेसिक लाइफ सपोर्ट और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण दिया गया।
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सीपीआर का प्रशिक्षण देते चिकित्सक।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
कार्डियक अरेस्ट में तत्काल मुंह से दो बार सांस देने और 30 बार सीने की पंपिंग करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। चिकित्सकों ने बताया कि इससे 80 फीसदी की जान बच जाती है। एसएन मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग में दो दिवसीय कार्यशाला कर बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस)और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (एएलएस) का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला संयोजक डॉ. अपूर्व मित्तल ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट होने पर शरीर में 5 मिनट तक ऑक्सीजन रहती है। दिमाग कार्य नहीं कर पाता है। अगर तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रक्रिया अपनाते हुए ही मुंह से दो बार सांस देने के बाद 30 बार सीने की पंपिंग करनी चाहिए। ये प्रक्रिया 100 बार करने से दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचने से मरीज की सांस लौट आती है।
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कार्यशाला संयोजक डॉ. अपूर्व मित्तल ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट होने पर शरीर में 5 मिनट तक ऑक्सीजन रहती है। दिमाग कार्य नहीं कर पाता है। अगर तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रक्रिया अपनाते हुए ही मुंह से दो बार सांस देने के बाद 30 बार सीने की पंपिंग करनी चाहिए। ये प्रक्रिया 100 बार करने से दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचने से मरीज की सांस लौट आती है।
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यही प्रक्रिया किसी के साथ हादसे के वक्त अपनानी चाहिए। इससे 80 फीसदी की जान बच जाती है। डॉ. अमृता गुप्ता, डॉ. राजीव पुरी और डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल ने बताया कि एएलएस के तहत इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी समेत अन्य जीवन रक्षक उपकरण और जांच कर भी जीवन बचाया जा सकता है। कार्यक्रम में उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. ब्रजेश शर्मा, डॉ. अंशु गुप्ता, डॉ. कामना सिंह, डॉ. रेनु अग्रवाल, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, डॉ. स्निग्धा सेन, डॉ. प्रीति भारद्वाज आदि मौजूद रहे।