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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Hologram fake mark sheets become "real"

होलोग्राम से फर्जी मार्कशीट बनेंगी ‘असली’

Mon, 23 Mar 2015 01:53 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Mon, 23 Mar 2015 01:53 AM IST
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में वेब मास्टर अभी जेल में है, लेकिन फर्जी मार्कशीट बनाने वाला कॉकस अपने काम को लगातार अंजाम दे रहा है। फर्जी मार्कशीट को ‘असली’ बनाने के लिए होलोग्राम चोरी कर लिए गए, लेकिन विश्वविद्यालय ने इस मामले में न तो कोई मुकदमा दर्ज कराया और न ही एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की। फर्जी मार्कशीट प्रकरण में ही सक्रिय रहे विश्वविद्यालय अधिकारियों की चुप्पी पर अब सवाल उठ रहे हैं।
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विश्वविद्यालय से होलोग्राम चोरी हुए, लेकिन अफसरों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों की मानें तो अक्तूबर में फर्जी मार्कशीट प्रकरण के खुलासे के दौरान बनाई गई फर्जी मार्कशीटों को चोरी किए गए होलोग्राम से असली बना दिया जाएगा। चार्टों में फेरबदल पहले ही ये कॉकस कर चुका है। विवि अफसर फर्जी मार्क शीट मामले में वेब मास्टर को ही मुख्य आरोपी माने बैठे हैं, लेकिन अब ये खेल किसने किया, इसकी जांच शुरू नहीं हुई। बीए, बीएससी और बीकॉम के साथ बीएड की सैकड़ों फर्जी मार्कशीट और डिग्रियों को जनरेट किया गया था। होलोग्राम से उन्हें असली बनाने का खेल अब शुरू होगा।
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विवि के आला अफसरों की मिलीभगत
अंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट के कॉकस को बढ़ाने में विवि के तीन आला अफसरों का हाथ रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. डीएन जौहर ने अंबेडकर चेयर में दो करोड़ रुपये की लागत से विश्वविद्यालय के लिए सर्वर लगवाया था। इसके  मेंटेनेंस के लिए वेब मास्टर की नियुक्ति की गई। मेंटेनेंस करने वाली कंपनी को ही विवि के अफसरों ने मार्कशीट का काम दे दिया। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी को ठेका देने से पहले 50 फीसदी कमीशन विवि के तीन अफसरों तक पहले ही पहुंच गया था। अब विश्वविद्यालय का सर्वर होने के बाद भी मार्कशीट के लिए एजेंसी की मदद ली जा रही है और यही फर्जी मार्कशीट की सबसे बड़ी वजह है।
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वेब मास्टर की जमानत के बाद खुलेंगे ‘राज’
फर्जी मार्कशीट प्रकरण अब फिर से तूल पकड़ने वाला है। मामले में जेल की सलाखों के पीछे रहे आरोपी जमानत पर रिहा हुए तो अब वेब मास्टर की भी जमानत हाईकोर्ट से हो गई है। हालांकि दूसरे मामले में एफआईआर के चलते रिहाई अब तक नहीं हो पाई, लेकिन जमानत के बाद से ही फर्जी मार्कशीट रैकेट में अब ‘खुलासों’ के खौफ का आलम है। 3 दिन पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वेब मास्टर अनुज अवस्थी की जमानत मंजूर कर ली। यह खबर जैसे ही विश्वविद्यालय में पहुंची, कॉकस में हड़कंप मच गया तो शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय रहा।
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