इस बार होली पर 500 साल बाद दुर्लभ योग बन रहा है। आगरा के बाह के ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर के मुताबिक होली पर्व पर चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा, मकर राशि में गुरु और शनि विराजमान होंगे। शुक्र और सूर्य मीन राशि में रहेंगे। मंगल और राहु वृषभ राशि, बुध कुंभ राशि और मोक्ष के कारण केतु वृश्चिक राशि में विराजमान होंगे।
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बांकेबिहारी मंदिर में होली के रंगों की वर्षा
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार ग्रहों की ऐसी स्थिति के कारण इसे ध्रुव योग कहा जाता है, जो 500 साल बाद बन रहा है। इससे पहले ग्रहों का यह योग 3 मार्च 1521 को बना था। इसके अलावा होली पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। दशकों बाद होली पर सूर्य, ब्रह्मा और अर्यमा के साक्षी रहेंगे। यह दुर्लभ योग होली पर शुभ फल देने वाले हैं।
ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर के मुताबिक इंसान के जीवन में रंगों गहरा प्रभाव रहता है, ऐसे में राशि के रंग से होली खेलने पर किस्मत बदल सकती है। बताया कि मेष राशि वाले लाल व पीले रंग से, वृषभ राशि वाले नारंगी व बैंगनी रंग से, मिथुन राशि वाले हरे रंग से, कर्क राशि वाले सफेद व नीले रंग से, सिंह राशि वाले लाल व नारंगी रंग से होली खेलेंगे।
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गुलाल बनाने के कार्य में जुटी महिलाएं
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इसी तरह कन्या राशि वाले भूरे व नारंगी रंग से, तुला राशि वाले हल्के गुलाबी रंग से, वृश्चिक राशि वाले लाल व पीले रंग से, धनु राशि वाले लाल व पीले रंग से, मकर राशि वाले नीले, काले रंग से, कुंभ राशि वाले बैंगनी, काले रंग से, मीन राशि वाले पीले रंग से होली खेलें तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
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होली के रंगों में रंग कर झूमते युवा
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कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते हुए होली का आनंद लें। भारत विकास परिषद सर्वोदय शाखा के होली मिलन में संस्थापक अजय गोयल ने यह संदेश दिया। उधर, डॉक्टरों का कहना है कि होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।