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#हिंदीहैंहम: हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर बने आईपीएस अधिकारी, रोशन किया क्षेत्र का नाम
Sat, 22 Aug 2020 06:27 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 22 Aug 2020 06:27 PM IST
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आधुनिक दौर में हिंदी क्षेत्र की प्रतिभाओं ने अपने ज्ञान कौशल से देश-दुनिया में अपना परचम लहराया है। फिरोजाबाद जिले के जसराना क्षेत्र के कई लोग हिंदी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर उच्च पदों पर कार्य करने के साथ शिक्षण कार्य भी कर रहे हैं। शुक्रवार को अमर उजाला संवाद में हिंदी से देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रहे ऐसे ही लोगों से बात की तो उन्होंने भी खुलकर अपनी बात रखी। कहा कि सरकार को हिंदी के उन्नयन एवं उत्थान के लिए साहित्यकारों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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हिंदी में मिले पाठ्य सामग्री तो बच्चे करेंगे नाम
मूल रुप से जसराना के भैंडी निवासी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी धर्मेंद्र सिंह की शिक्षा जसराना एवं शिकोहाबाद के हिंदी माध्यम स्कूलों में हुई। उन्होंने स्नातक की परीक्षा प्राइवेट छात्र के रूप में दी। उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में हिंदी माध्यम का होने के बाद भी झंडे गाडे़ और आईपीएस अधिकारी बने। धर्मेंद्र सिंह देश-विदेश में अपना एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर छात्रों को अंग्रेजी की तरह हिंदी में साहित्य मिले तो हिंदीभाषी छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अन्य भाषाओं का भी अध्ययन करना चाहिए।
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हिंदी के उत्थान एवं विकास के लिए बच्चियों को दिलाई हिंदी में शिक्षा
जसराना के लोक राष्ट्रीय महाविद्यालय में हिंदी विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. हरिविलास राजपूत ने बताया कि कई वर्षों से छात्रों को हिंदी की शिक्षा दे रहे हैं। हिंदी के उत्थान के लिए उन्होंने अपनी तीन बच्चियों को हिंदी माध्यम से शिक्षा दिलाने के साथ ही परास्नातक की पढ़ाई भी हिंदी से कराई। उन्होंने कहा कि उनकी तीनों बेटियों ने हिंदी विषय में गोल्ड मेडल हासिल किया है। वर्तमान में उनकी एक पुत्री राजकीय इंटर कॉलेज में हिंदी की प्रवक्ता हैं।
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अंग्रेजी में नहीं मिली कामयाबी तो हिंदी में किया लेखन कार्य
लोक राष्ट्रीय महाविद्यालय में प्राचार्य एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर सनिल कुमार अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों में जागरूकता लाने का कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रभक्ति के साथ भक्तिभाव एवं चरित्र निर्माण की कविताओं का लेखन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के युवकों एवं नागरिकों के चरित्र निर्माण के साथ राष्ट्रभावना जाग्रति करने के लिए लेखन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक दो हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं।
हिंदी ने दिलाया मान एवं सम्मान
मूल रुप से शिकोहाबाद के निवासी डॉ. निर्दोश कुमार प्रेमी जसराना के कुशियारी के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही कविताओं एवं साहित्य का लेखन कर रहे हैं। आकाशवाणी के साथ टीवी चैनलों में काव्यपाठ कर चुके निर्दोष कुमार प्रेमी ने बताया कि हिंदी के लिए कार्य करने पर उन्हें विक्रमशिला विद्यापीठ ने डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। उनकी एक किताब अहसास के लिए प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने कहा हिंदी के उत्थान एवं उन्नयन के लिए सरकारों को नए साहित्यकारों एवं कवियों को पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित करना चाहिए।
हिंदी ने दिलाया मान एवं सम्मान
मूल रुप से शिकोहाबाद के निवासी डॉ. निर्दोश कुमार प्रेमी जसराना के कुशियारी के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही कविताओं एवं साहित्य का लेखन कर रहे हैं। आकाशवाणी के साथ टीवी चैनलों में काव्यपाठ कर चुके निर्दोष कुमार प्रेमी ने बताया कि हिंदी के लिए कार्य करने पर उन्हें विक्रमशिला विद्यापीठ ने डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। उनकी एक किताब अहसास के लिए प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने कहा हिंदी के उत्थान एवं उन्नयन के लिए सरकारों को नए साहित्यकारों एवं कवियों को पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित करना चाहिए।