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#हिंदीहैंहमः हिंदी मेरा ईमान है, हिंदी मेरी पहचान है, राष्ट्र भाषा का दर्जा न मिलने से खिन्न हिंदीप्रेमी

Wed, 26 Aug 2020 10:57 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 26 Aug 2020 10:57 AM IST
सार

आज मोबाइल हो या कुछ अन्यान्य, बिना हिंदी के आगे नहीं बढ़ा जा सकता। इस उक्ति का परिणाम है कि प्रधानमंत्री की वोकल-लोकल योजना और नूतन शिक्षा नीति में यह भाषा प्रतिबिंबित होती है।

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Hindi Demands hindi national language Samvad With Amar Ujala
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिंदी भाषा की सरलता ने ही इसे व्यापक बनाया है। देश-दुनिया में हिंदी के बढ़ते दायरे को देखकर प्रत्येक हिंदुस्तानी गर्व महसूस कर सकता है। हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा न मिलने से हिंदी प्रेमियों का मन खिन्न जरूर है लेकिन आज आवश्यकता है कि हिंदी के उत्थान के लिए प्रत्येक हिंदुस्तानी आगे आए। इसके बाद ही हम गर्व से कह सकते हैं कि हिंदी मेरा ईमान है, हिंदी मेरी पहचान है। ‘अमर उजाला’ के साथ हुए व्हाट्सएप संवाद में हिंदी के विशेषज्ञों ने अपनी राय साझा की।
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हिंदी है पूर्णरूपेण जीवंत भाषा
भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से हम अपने भावों और विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। यदि हम हिंदी की बात करें तो यह पूर्णरूपेण जीवंत भाषा है। आज का समय विज्ञान का है। इस कारण हिंदी भाषा में आंग्ल भाषा ने दखलंदाजी की है। बावजूद इसके हिंदी भाषा वैज्ञानिकता से ओतप्रोत है। आज मोबाइल हो या कुछ अन्यान्य, बिना हिंदी के आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
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इस उक्ति का परिणाम है कि प्रधानमंत्री की वोकल-लोकल योजना और नूतन शिक्षा नीति में यह भाषा प्रतिबिंबित होती है। हां ,एक बात अवश्य कहना चाहूंगा कि अपनी जमीन को कभी नहीं भूलना चाहिए तभी आप बड़ी अट्टालिका का निर्माण कर सकते हैं। कोई भी राष्ट्र अपनी भाषा के बिना उत्थान नहीं कर सकता। - अभय वशिष्ठ, सामाजिक कार्यकर्ता 
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Hindi Demands hindi national language Samvad With Amar Ujala
अभय वशिष्ठ, महेंद्र प्रताप सिंह और सीता अग्रवाल, दाएं से बाएं - फोटो : अमर उजाला
हिंदी के उत्थान को आना होगा आगे
किसी भी देश की भाषा उस देश पहचान और गौरव होती है। हिंदी हम हिंदुस्तानियों के लिए गर्व का विषय है। आज भी भारत के अधिकांश क्षेत्रों में हिंदी बोली व लिखी जाती है। हिंदी अन्य भाषाओं की तुलना में सरल और सुगम्य है।

वर्तमान में इसका उपयोग कंप्यूटर और इंटरनेट में बहुतायत में हो रहा है लेकिन ये हमारा दुर्भाग्य है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल सका है। अब आवश्यक है कि हम सब को एकजुट हों हिंदी के उत्थान के लिए आगे आना चाहिए। - सीता अग्रवाल, शिक्षाविद

हिंदी के उत्थान में योगदान जरूरी
हिंदी हमारी मातृभाषा है। हिंदी हमारी आत्मा है। मातृभाषा के बिना किसी भी देश का भविष्य नहीं होता है। हमें हमारी मातृभाषा पर गर्व करना चाहिए। हिंदी के बहिष्कार के बाद 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा और हिंदी सप्ताह का भी आयोजन किया जाने लगा। इसके तहत निबंध प्रतियोगिता, भाषण, काव्य गोष्ठी, वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं होती हैं, जिससे लोगों में भाषा के प्रति रुचि जागे।

वे इन प्रतियोगिताओं में भाग लें और वे भाषा के ज्ञान को बढ़ाएं। साथ ही साथ सभी सरकारी कार्यालयों मे हिंदी विभाग का गठन किया गया। इसका कार्य कार्यालय में सबको हिंदी सिखाना और हिंदी भाषा के महत्व को बढ़ाना है। इस प्रकार हम 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाते आए हैं। हिंदी के उत्थान में अपना योगदान दे रहे हैं। - महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, चेयरमैन, केडीएस इंटरनेशनल स्कूल
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