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राजनरायण जूनियर हाईस्कूल की फर्जी जमीन का 2011 में हो गया था खुलासा
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मैनपुरी। राजनरायण जूनियर हाईस्कूल पेराराशाहपुर बरनाहल के नाम दर्ज जमीन अवैध है। इसका खुलासा वर्ष 2011 में तत्कालीन एसडीएम करहल ने कर दिया था। जिस भूमि पर स्कूल बना हुआ है वह कन्या पाठशाला के नाम से संरक्षित है। विभागीय लापरवाही के चलते विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण में 11 साल लग गए।
राजनरायण सिंह जूनियर हाईस्कूल के लिए सांसद निधि से नवंबर वर्ष 2011 में दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रस्तावित की गई थी। परियोजना निदेशक ने विद्यालय प्रबंधक द्वारा उपलब्ध कराई खतौनी को प्रमाणित करने के लिए एसडीएम करहल को भेजा। तत्कालीन एसडीएम ने वर्ष 2012 में परियोजना निदेशक को उपलब्ध कराई रिपोर्ट में बताया कि स्कूल के नाम जो खतौनी उपलब्ध कराई गई है वह फर्जी है। एसडीएम की रिपोर्ट के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया और विद्यालय का संचालन बदस्तूर जारी रहा। वर्ष 2014 में आजाद हिंद इंटर कॉलेज करहल के प्रबंधक शिवनाथ दुबे ने मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने जब कार्रवाई न होने पर सचिव बेसिक शिक्षा को बुलाया तो कार्रवाई हो सकी।
1962 में हुई थी चकबंदी
एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1962 में चकबंदी के दौरान जिस जमीन को कन्या विद्यालय के नाम संरक्षित किया गया था। उसी जमीन पर फर्जीवाड़ा करके राजनरायाण सिंह जूनियर स्कूल का भवन तैयार कर दिया गया।
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1986 से मिल रहा है अनुदान
राजनरायण जूनियर हाईस्कूल पेराराशाहुपर वर्ष 1986 में अनुदानित हो गया। प्रबंधतंत्र ने अनुदान के दौरान भी फर्जी खतौनी लगा दी। बेसिक शिक्षा विभाग में मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2018 में प्रबंधक और प्रधानाध्यापक को भूमि व मान्यता संबंधी अभिलेखों सहित उपस्थित होने को कहा गया तो प्रबंधक उपस्थित नहीं हुए। प्रधानाध्यापक ने जो खतौनी उपलब्ध कराई उसके अनुसार 12 जनवरी 2016 को जमीन का बैनामा विद्यालय के नाम किया गया जबकि अनुदान वर्ष 1986 से मिल रहा था। बेसिक शिक्षा विभाग ने कहा कि वर्ष 1986 में जब विद्यालय को स्थाई मान्यता दी गई तो उसके नाम जमीन ही नहीं थी। ऐसे में मान्यता गलत खतौनी के आधार पर ले ली गई है।
सभी सहायता प्राप्त स्कूलों की जमीन का होगा सत्यापन
मैनपुरी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने जिले में संचालित सभी सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की जमीन का सत्यापन कराने के आदेश दिए हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के निर्देश के बाद बीएसए दीपिका गुप्ता ने प्रबंधकों और प्रधानाध्यापकों से विद्यालय के नाम जमीन की खतौनी उपलब्ध कराने को कहा है।
बीएसए दीपिका गुप्ता ने जिले में संचालित सभी 30 सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी करते किया है। निर्देश दिए स्कूल की जमीन की खतौनी सत्यापित कराते हुए उनके कार्यालय को उपलब्ध कराएं। बताया कि शासन ने सहायता जमीन का सत्यापन कराने का आदेश जारी किया है। सचिव के आदेशानुसार सत्यापित खतौनी मंगाईं हैं। इसके बाद राजस्व विभाग को भेजकर जांच कराई जाएगी। बीएसए ने तीन दिन के अंदर अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है जिससे सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को समय से जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। संवाद
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राजनरायण सिंह जूनियर हाईस्कूल के लिए सांसद निधि से नवंबर वर्ष 2011 में दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रस्तावित की गई थी। परियोजना निदेशक ने विद्यालय प्रबंधक द्वारा उपलब्ध कराई खतौनी को प्रमाणित करने के लिए एसडीएम करहल को भेजा। तत्कालीन एसडीएम ने वर्ष 2012 में परियोजना निदेशक को उपलब्ध कराई रिपोर्ट में बताया कि स्कूल के नाम जो खतौनी उपलब्ध कराई गई है वह फर्जी है। एसडीएम की रिपोर्ट के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया और विद्यालय का संचालन बदस्तूर जारी रहा। वर्ष 2014 में आजाद हिंद इंटर कॉलेज करहल के प्रबंधक शिवनाथ दुबे ने मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने जब कार्रवाई न होने पर सचिव बेसिक शिक्षा को बुलाया तो कार्रवाई हो सकी।
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1962 में हुई थी चकबंदी
एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1962 में चकबंदी के दौरान जिस जमीन को कन्या विद्यालय के नाम संरक्षित किया गया था। उसी जमीन पर फर्जीवाड़ा करके राजनरायाण सिंह जूनियर स्कूल का भवन तैयार कर दिया गया।
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1986 से मिल रहा है अनुदान
राजनरायण जूनियर हाईस्कूल पेराराशाहुपर वर्ष 1986 में अनुदानित हो गया। प्रबंधतंत्र ने अनुदान के दौरान भी फर्जी खतौनी लगा दी। बेसिक शिक्षा विभाग में मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2018 में प्रबंधक और प्रधानाध्यापक को भूमि व मान्यता संबंधी अभिलेखों सहित उपस्थित होने को कहा गया तो प्रबंधक उपस्थित नहीं हुए। प्रधानाध्यापक ने जो खतौनी उपलब्ध कराई उसके अनुसार 12 जनवरी 2016 को जमीन का बैनामा विद्यालय के नाम किया गया जबकि अनुदान वर्ष 1986 से मिल रहा था। बेसिक शिक्षा विभाग ने कहा कि वर्ष 1986 में जब विद्यालय को स्थाई मान्यता दी गई तो उसके नाम जमीन ही नहीं थी। ऐसे में मान्यता गलत खतौनी के आधार पर ले ली गई है।
सभी सहायता प्राप्त स्कूलों की जमीन का होगा सत्यापन
मैनपुरी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने जिले में संचालित सभी सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की जमीन का सत्यापन कराने के आदेश दिए हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के निर्देश के बाद बीएसए दीपिका गुप्ता ने प्रबंधकों और प्रधानाध्यापकों से विद्यालय के नाम जमीन की खतौनी उपलब्ध कराने को कहा है।
बीएसए दीपिका गुप्ता ने जिले में संचालित सभी 30 सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी करते किया है। निर्देश दिए स्कूल की जमीन की खतौनी सत्यापित कराते हुए उनके कार्यालय को उपलब्ध कराएं। बताया कि शासन ने सहायता जमीन का सत्यापन कराने का आदेश जारी किया है। सचिव के आदेशानुसार सत्यापित खतौनी मंगाईं हैं। इसके बाद राजस्व विभाग को भेजकर जांच कराई जाएगी। बीएसए ने तीन दिन के अंदर अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है जिससे सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को समय से जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। संवाद