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Hathras Accident: मेरा सब कुछ लुट गया...गोद में खून से लथपथ मासूम की लाश, सुबक रहा था अनीश; फट रही थी छाती
Sat, 07 Sep 2024 03:34 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 07 Sep 2024 03:34 PM IST
सार
अनीश ने जिन बच्चों को गोद में खिलाया, उनकी खून से लथपथ लाश गोद में थी। वो सुबक रहा था। होंठ उसका साथ नहीं दे रहे थे। बस बोल रहा था कि मेरा तो सबकुछ लुट गया। कभी छाती से लगाता तो कभी चूमता।
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Hathras accident
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिन्हें गोद में खिलाया उन्हीं मासूमों के शव खून से लथपथ थे। कंपकंपाते हाथों से कभी चेहरे से कफन हटाते तो कभी चेहरा देखकर माथा चूमते। फिर शव को छाती से लिपटाकर अचानक अनीश दहाड़े मारकर रो पड़े। ढांढस बंधाने पर बोले, मैं कैसे सब्र करूं, मेरा सब कुछ तो लुट गया। वह बार-बार यही कह रहे थे कि हाय अल्लाह, तुझे इन बच्चों पर भी रहम न आया।
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देर रात हाथरस से पोस्टमार्टम होने के बाद 5 साल के शोएब और 4 साल के सूफियान का शव लेकर अनीश गांव पहुंचे। परिवार में कोहराम मच गया। परिजन रोने और चीखने-चिल्लाने लगे। हालत यह रही कि दुख के मारे छाती पीटते तो कभी हाथ जमीन पर पटकते। बिलखते हुए वे उस पल को कोस रहे थे जब वह सभी चालीसा में गए थे।
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अनीस ने बताया कि उनके बड़े भाई टल्ली के बच्चे हैं। इनको मैं अपनी गोद में खिलाता था, कंधे पर झुलाता था, आज इनकी लाश मेरी गोद में है। सब्र नहीं कर पा रहा हूं। दूसरे कोने में मासूम की लाश को छाती से लगाए पिता मुश्ताक अली सुबक रहा था। कुछ बोलने की कोशिश करता, लेकिन होंठ साथ नहीं दे रहे थे। खून से लथपथ बच्चों को देख उसकी छाती फटी जा रही थी।
मुश्ताक कभी मासूम के हाथ-पैरों पर लगे खून को साफ करता, कभी गले से लगाकर फफक पड़ता। बदहवास हाल में कहता अब कैसे हम जिएंगे, हमारे खिलौने छिन गए। ये कहते ही शवों को दुलारने लगा। माहौल देखकर आसपास के लोगों की आंखें भर आईं। सभी यही कह रहे कि किसी को ऐसा दिन न देखना पड़े।