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कोरोना वायरस का दुष्प्रभाव: संक्रमण के बाद गंजे हो रहे लोग, बाल बचाने को करा रहे पीआरपी थेरेपी
Thu, 26 Aug 2021 12:07 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 26 Aug 2021 12:07 PM IST
सार
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि संक्रमण से जिन मरीजों की हालत गंभीर रही, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और बालों की ग्रोथ फेज (टेलोजेन इफ्लुवियम) प्रभावित हुई। इस परेशानी के ओपीडी में रोजाना 35 से 50 मरीज आ रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद लोगों के बाल तेजी से गिर रहे हैं। बचे हुए बालों को बचाने के लिए लोग प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा (पीआरपी) थेरेपी करा रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद रोजाना दो से तीन मरीज थेरेपी के लिए पंजीकरण करा रहे हैं।
त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि संक्रमण से जिन मरीजों की हालत गंभीर रही, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और बालों की ग्रोथ फेज (टेलोजेन इफ्लुवियम) प्रभावित हुई। इस परेशानी के ओपीडी में रोजाना 35 से 50 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 15 से 20 लोग अप्रैल-मई में संक्रमित भी हुए थे। इनमें महिला-पुरुष की संख्या लगभग बराबर है। इनमें से आठ से 10 लोग पीआरपी थेरेपी कराने को कहते हैँ। प्लेटलेट्स की जांच के बाद दो-तीन लोग ही इस थेरेपी के योग्य मिलते हैं। पीआरपी कराने वालों में पुरुषों की संख्या अधिक है। बाल झड़ने वाले बाकी मरीजों को मल्टी विटामिन टैबलेट देने के साथ प्रोटीनयुक्त भोजन करने का परामर्श दे रहे हैं।
केस एक
मोती कटरा निवासी 36 साल का युवक मई में संक्रमित हुआ था। ठीक होने के बाद तेजी से बाल झड़े, डॉक्टर को दिखाने पर इनकी जांच में प्लेटलेट्स 2.57 लाख मिलने पर पीआरपी थेरेपी दी। अभी एक सिटिंग हुई है। बोले चिकित्सक ने बताया कि दूसरी-तीसरी सिटिंग के बाद असर दिखने लगेगा।
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केस दो
दयालबाग के 41 साल के युवक के संक्रमण से ठीक होने के बाद माथे के आगे से बाल गिरने लगे। सिर में हाथ लगाते तो कई बाल गिर जाते, दिखाने पर पीआपी के लिए प्लेटलेट्स की जांच का ली है। प्लेटलेट्स 2.53 लाख मिली है। एसएन में पीआरपी के लिए पंजीकरण करा दिया है।
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त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि संक्रमण से जिन मरीजों की हालत गंभीर रही, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और बालों की ग्रोथ फेज (टेलोजेन इफ्लुवियम) प्रभावित हुई। इस परेशानी के ओपीडी में रोजाना 35 से 50 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 15 से 20 लोग अप्रैल-मई में संक्रमित भी हुए थे। इनमें महिला-पुरुष की संख्या लगभग बराबर है। इनमें से आठ से 10 लोग पीआरपी थेरेपी कराने को कहते हैँ। प्लेटलेट्स की जांच के बाद दो-तीन लोग ही इस थेरेपी के योग्य मिलते हैं। पीआरपी कराने वालों में पुरुषों की संख्या अधिक है। बाल झड़ने वाले बाकी मरीजों को मल्टी विटामिन टैबलेट देने के साथ प्रोटीनयुक्त भोजन करने का परामर्श दे रहे हैं।
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केस एक
मोती कटरा निवासी 36 साल का युवक मई में संक्रमित हुआ था। ठीक होने के बाद तेजी से बाल झड़े, डॉक्टर को दिखाने पर इनकी जांच में प्लेटलेट्स 2.57 लाख मिलने पर पीआरपी थेरेपी दी। अभी एक सिटिंग हुई है। बोले चिकित्सक ने बताया कि दूसरी-तीसरी सिटिंग के बाद असर दिखने लगेगा।
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केस दो
दयालबाग के 41 साल के युवक के संक्रमण से ठीक होने के बाद माथे के आगे से बाल गिरने लगे। सिर में हाथ लगाते तो कई बाल गिर जाते, दिखाने पर पीआपी के लिए प्लेटलेट्स की जांच का ली है। प्लेटलेट्स 2.53 लाख मिली है। एसएन में पीआरपी के लिए पंजीकरण करा दिया है।
ऐसे दी जा रही पीआरपी थेरेपी
इसमें मरीज की प्लेटलेट्स की जांच कराई जाती है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या 2.50 लाख से अधिक मिलने वाले मरीजों को ही पीआरपी दी जाती है। पोस्ट कोविड के अधिकांश लोगों में अभी प्लेटलेट्स 2.50 लाख से अभी कम ही आ रही है, ऐसे में दो-तीन की ही इससे अधिक प्लेटलेट्स हैं। इसमें मरीज के रक्त को लेकर मशीन के जरिये तैयार ग्रोथ सीरम को इंजेक्शन के जरिये सिर में 100 से अधिक बार दिया जाता है। एक महीने में एक बार यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। पांच से छह महीने तक कोर्स चलता है।
ये भी पढ़ें: अलीगढ़ के बाद आगरा में जहरीली शराब से मौत: पुलिस के हाथ नहीं लगा विक्रेता, विसरा रिपोर्ट ने खोला 'राज'
इसमें मरीज की प्लेटलेट्स की जांच कराई जाती है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या 2.50 लाख से अधिक मिलने वाले मरीजों को ही पीआरपी दी जाती है। पोस्ट कोविड के अधिकांश लोगों में अभी प्लेटलेट्स 2.50 लाख से अभी कम ही आ रही है, ऐसे में दो-तीन की ही इससे अधिक प्लेटलेट्स हैं। इसमें मरीज के रक्त को लेकर मशीन के जरिये तैयार ग्रोथ सीरम को इंजेक्शन के जरिये सिर में 100 से अधिक बार दिया जाता है। एक महीने में एक बार यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। पांच से छह महीने तक कोर्स चलता है।
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