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Dhruv Jurel: दूसरे टेस्ट से पहले जुरेल की खास ट्रेनिंग, गंभीर ने सिर्फ एक पैड पहनाकर कराई बल्लेबाजी
Thu, 20 Nov 2025 10:25 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 20 Nov 2025 10:25 AM IST
सार
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 22 नवंबर से शुरू होने वाले दूसरे मुकाबले के लिए ध्रुव जुरेल को खास ट्रेनिंग दी जा रही है।
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ध्रुव जुरेल
- फोटो : BCCI
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विस्तार
पहले टेस्ट में मिली हार के बाद टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 22 नवंबर से शुरू होने वाले दूसरे मुकाबले की तैयारियां तेज कर दी है। युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल को इस बीच कोच गौतम गंभीर अलग तरह की ट्रेनिंग करा रहे हैं।
ये बातें ध्रुव जुरेल के आगरा के कोच परवेंद्र यादव ने बताई। उन्होंने बताया कि गंभीर ने नेट सत्र में जुरेल को सिर्फ एक पैड पहनाकर बल्लेबाजी कराई। यह तकनीक भले आधुनिक क्रिकेट में कम दिखाई देती हो, लेकिन पुरानी क्रिकेट कोचिंग में इसे बल्लेबाज की फुटवर्क, बैट-एंगल और निर्णय क्षमता सुधारने के लिए सबसे असरदार अभ्यास माना जाता था।
दोनों पैड पहनने पर बल्लेबाज सुरक्षा के चलते फ्रंट पैड आगे कर देते हैं, जिससे बल्ला पीछे रह जाता है। गेंद पैड पर लगने से एलबीडब्ल्यू होने का खतरा बढ़ जाता है। एक पैड हटते ही बल्लेबाज स्वाभाविक रूप से बल्ला आगे लाकर खेलने को मजबूर होता है। चोट से बचने की प्रवृत्ति उसे गेंद को बैट से खेलने की ओर प्रेरित करती है।
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इससे आसमान में उछाल और टर्न को पढ़ने की क्षमता बढ़ती है। रक्षात्मक निर्णय अधिक तेजी से लेने में मदद मिलती है। परवेंद्र यादव का कहना है कि यह तकनीक जुरेल को और परिपक्व बनाएगी।
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ये बातें ध्रुव जुरेल के आगरा के कोच परवेंद्र यादव ने बताई। उन्होंने बताया कि गंभीर ने नेट सत्र में जुरेल को सिर्फ एक पैड पहनाकर बल्लेबाजी कराई। यह तकनीक भले आधुनिक क्रिकेट में कम दिखाई देती हो, लेकिन पुरानी क्रिकेट कोचिंग में इसे बल्लेबाज की फुटवर्क, बैट-एंगल और निर्णय क्षमता सुधारने के लिए सबसे असरदार अभ्यास माना जाता था।
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दोनों पैड पहनने पर बल्लेबाज सुरक्षा के चलते फ्रंट पैड आगे कर देते हैं, जिससे बल्ला पीछे रह जाता है। गेंद पैड पर लगने से एलबीडब्ल्यू होने का खतरा बढ़ जाता है। एक पैड हटते ही बल्लेबाज स्वाभाविक रूप से बल्ला आगे लाकर खेलने को मजबूर होता है। चोट से बचने की प्रवृत्ति उसे गेंद को बैट से खेलने की ओर प्रेरित करती है।
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इससे आसमान में उछाल और टर्न को पढ़ने की क्षमता बढ़ती है। रक्षात्मक निर्णय अधिक तेजी से लेने में मदद मिलती है। परवेंद्र यादव का कहना है कि यह तकनीक जुरेल को और परिपक्व बनाएगी।