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UP: 7वीं पास किस तरह बन गया करोड़पति...MLM चेन सिस्टम को समझा, फिर क्रिप्टो में निवेश; ऐसे कमाए 50 करोड़ रुपये
Sat, 13 Dec 2025 03:10 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 13 Dec 2025 03:10 PM IST
सार
आगरा पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर करोड़ों की ठगी का खुलासा किया है। 7वीं पास ने मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) के पुराने अनुभव का फायदा उठाकर हाईटेक गैंग बनाया। साथियों के साथ मिलकर विदेशी सर्वर पर फर्जी एएसटी क्रिप्टो कॉइन की वेबसाइट तैयार की और फिर ठगी का खेल शुरू कर दिया।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
क्रिप्टोकरेंसी की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने आरोपी ने 2002 में आई इबिज और स्पीक एशिया नाम की मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनियों में काम सीखा। इसके बाद सातवीं पास अजय ने चेन सिस्टम से लोगों को जोड़कर ठगी करने का प्लान बनाया। फिर गैंग तैयार कर लोगों को जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ठग लिए।
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एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार ने बताया कि पूछताछ में ठगी के मुख्य आरोपी अजय ने बताया कि 2002 में आगरा में एक कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनकर काम करने के दौरान उसकी मुलाकात नरेंद्र सिसौदिया से हुई। नरेंद्र एमएलएम का अच्छा जानकार था। कुछ समय बाद दूसरी कंपनी में काम किया तो वहां गोपाल मिला। गोपाल के जरिये ही विनय और विनोद से मुलाकात हुई।
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गोपाल ने उसे विनोद के क्रिप्टो की फर्जी कंपनी बनाकर लोगों से ठगी करने योजना के बारे में बताया। उसने सबके साथ मिलकर यूएस के एएसटी कॉइन के नाम से फर्जी वेबसाइट और ईमेल आईडी बनाई। वेबसाइट को चलाने के लिए डोमेन की जरूरत थी। नोएडा की कंपनी से डोमेन लेकर लिक्विड वेब कंपनी से विदेशी सर्वर लिया जिसका यूजरनेम एएसटी वैप था। वेबसाइट और सर्वर अपडेट होने के बाद वह वेबसाइट पर आईडी लेने वाले को फर्जी बैलेंस, कॉइन के बढ़ते हुए दाम और ई-वालेट में रकम दिखाने लगे।
ऐसे बनाते थे चेन
आरोपी पहले सात गुना मुनाफे का लालच देकर 8,500 रुपये लेकर वेबसाइट पर आईडी बनवाते थे। इसके बाद रेफरल कोड से कम से कम 11 लोगों को जुड़वाने के बाद अपने निवेश और जुड़े हुए लोगों के निवेश में मुनाफा मिलने का लालच देते थे। अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर अधिक मुनाफे के लालच में लोग अपने परिचितों को भी भरोसे में लेकर वेबसाइट से जोड़कर निवेश कराने लगते थे। कुछ ही माह में आरोपियों ने 1500 से अधिक लोगों को जोड़कर 1.27 करोड़ रुपये सिर्फ आईडी बनवाने के नाम पर जमा करा लिए। इसके बाद निवेश के नाम पर ठगी की।
आरोपी पहले सात गुना मुनाफे का लालच देकर 8,500 रुपये लेकर वेबसाइट पर आईडी बनवाते थे। इसके बाद रेफरल कोड से कम से कम 11 लोगों को जुड़वाने के बाद अपने निवेश और जुड़े हुए लोगों के निवेश में मुनाफा मिलने का लालच देते थे। अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर अधिक मुनाफे के लालच में लोग अपने परिचितों को भी भरोसे में लेकर वेबसाइट से जोड़कर निवेश कराने लगते थे। कुछ ही माह में आरोपियों ने 1500 से अधिक लोगों को जोड़कर 1.27 करोड़ रुपये सिर्फ आईडी बनवाने के नाम पर जमा करा लिए। इसके बाद निवेश के नाम पर ठगी की।
तीन साल की दिलाते थे शपथ
एडीसीपी ने बताया कि चेन बनाकर लोगों से निवेश कराने में समय लगता था। लोगों को जोड़ने के बाद आरोपी उन्हें नए ग्राहकों के साथ पांच सितारा होटल में बुलाते थे। वहां जुड़े हुए लोगों को शपथ दिलाते थे कि तीन साल तक अगर लोग नहीं भी जुड़ें तो वह निवेश करते रहेंगे और रकम वापस नहीं निकालेंगे। इस दौरान कम से कम एक हजार लोगों को साथ जोड़कर उन्हें अमीर बनाने में मदद करेंगे। इससे उन्हें अधिक लोगों को जाल में फंसाने का मौका मिल जाता था। इस बीच जिसकी रकम ज्यादा हो जाती और वह रुपये निकालने का प्रयास करता तो सर्वर पर दिखने वाला लाभ कम कर देते थे। निकासी की सुविधा बंद प्रदर्शित की जाती थी। तकनीकी परेशानी या बाजार भाव कम होने का बहाना बनाकर टहलाया जाता था। रकम को क्रिप्टो वालेट या किसी अन्य के खाते किराये पर लेकर ट्रांसफर कर दी जाती थी।
एडीसीपी ने बताया कि चेन बनाकर लोगों से निवेश कराने में समय लगता था। लोगों को जोड़ने के बाद आरोपी उन्हें नए ग्राहकों के साथ पांच सितारा होटल में बुलाते थे। वहां जुड़े हुए लोगों को शपथ दिलाते थे कि तीन साल तक अगर लोग नहीं भी जुड़ें तो वह निवेश करते रहेंगे और रकम वापस नहीं निकालेंगे। इस दौरान कम से कम एक हजार लोगों को साथ जोड़कर उन्हें अमीर बनाने में मदद करेंगे। इससे उन्हें अधिक लोगों को जाल में फंसाने का मौका मिल जाता था। इस बीच जिसकी रकम ज्यादा हो जाती और वह रुपये निकालने का प्रयास करता तो सर्वर पर दिखने वाला लाभ कम कर देते थे। निकासी की सुविधा बंद प्रदर्शित की जाती थी। तकनीकी परेशानी या बाजार भाव कम होने का बहाना बनाकर टहलाया जाता था। रकम को क्रिप्टो वालेट या किसी अन्य के खाते किराये पर लेकर ट्रांसफर कर दी जाती थी।
43 लोगों ने दर्ज कराई थी शिकायत
शिकायतकर्ता ठगी की रकम (रुपये में)
1. देवेंद्र कुमार– 50,00,000
2. मानसिंह – 2,00,000
3. मनमीत – 1,25,000
4. लोकेश गौड़ – 1,25,000
5. राजन सिंह – 1,40,000
6. मुनिता सिंह – 5,00,000
7. विक्रम सिंह – 7,00,000
8. पुष्पेंद्र सिंह – 50,00,000
9. लेखराज सिंह – 1,50,000
10. राघवेंद्र – 25,000
11. ओमकार सिंह – 1,00,000
12. भवेश्वर सिंह– 9,00,000
13. दीपक श्रीवास्तव सिंह – 3,00,000
14. इंद्रजीत सिंह पुत्र जयवीर – 3,00,000
15. रवि कुमार सिंह – 5,00,000
16. इंद्रजीत सिंह पुत्र ओमवीर– 5,00,000
17. निर्मल सिंह – 9,00,000
18. रवींद्र सिंह – 5,00,000
19. हरीओम सिंह – 3,50,000
20. देवकी – 3,50,000
21. विशाल– 2,00,000
22. साविता – 5,00,000
23. विनय – 4,00,000
24. साधना – 2,75,000
25. सतीश चंद्र – 50,000
26. विनोद – 2,00,000
27. अजय कुमार अमयाला – 4,50,000
28. मनमोहन सिंह – 3,00,000
29. रामरतन – 1,50,000
30. देवेंद्र सिंह – 2,50,000
31. ललित सिंह – 1,50,000
32. राजमती – 1,60,000
33. शिव सिंह – 3,50,000
34. दीपक त्यागी – 2,00,000
35. वेदांत – 2,00,000
36. रघुवीर – 7,00,000
37. अविनाश – 3,50,000
38. नितीश लोध – 1,50,000
39. अवतार सिंह – 8,00,000
40. शीलेंद्र – 1,00,000
41. मनमोहन सिंह – 5,00,000
शिकायतकर्ता ठगी की रकम (रुपये में)
1. देवेंद्र कुमार– 50,00,000
2. मानसिंह – 2,00,000
3. मनमीत – 1,25,000
4. लोकेश गौड़ – 1,25,000
5. राजन सिंह – 1,40,000
6. मुनिता सिंह – 5,00,000
7. विक्रम सिंह – 7,00,000
8. पुष्पेंद्र सिंह – 50,00,000
9. लेखराज सिंह – 1,50,000
10. राघवेंद्र – 25,000
11. ओमकार सिंह – 1,00,000
12. भवेश्वर सिंह– 9,00,000
13. दीपक श्रीवास्तव सिंह – 3,00,000
14. इंद्रजीत सिंह पुत्र जयवीर – 3,00,000
15. रवि कुमार सिंह – 5,00,000
16. इंद्रजीत सिंह पुत्र ओमवीर– 5,00,000
17. निर्मल सिंह – 9,00,000
18. रवींद्र सिंह – 5,00,000
19. हरीओम सिंह – 3,50,000
20. देवकी – 3,50,000
21. विशाल– 2,00,000
22. साविता – 5,00,000
23. विनय – 4,00,000
24. साधना – 2,75,000
25. सतीश चंद्र – 50,000
26. विनोद – 2,00,000
27. अजय कुमार अमयाला – 4,50,000
28. मनमोहन सिंह – 3,00,000
29. रामरतन – 1,50,000
30. देवेंद्र सिंह – 2,50,000
31. ललित सिंह – 1,50,000
32. राजमती – 1,60,000
33. शिव सिंह – 3,50,000
34. दीपक त्यागी – 2,00,000
35. वेदांत – 2,00,000
36. रघुवीर – 7,00,000
37. अविनाश – 3,50,000
38. नितीश लोध – 1,50,000
39. अवतार सिंह – 8,00,000
40. शीलेंद्र – 1,00,000
41. मनमोहन सिंह – 5,00,000