Agra News: स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार का निधन, अमर उजाला से रहा गहरा नाता
स्वाधीनता आंदोलन में वे वर्ष 1943 में एक वर्ष तक जेल में रहीं। रविवार सुबह 4:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
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साहित्य से भी रहा जुड़ाव
रानी सरोज गौरिहार ने स्वाधीनता आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया था। उनका साहित्य से भी गहरा जुड़ाव था। नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने साहित्य के लिए भी कार्य किया। वह सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहती थीं।उनका जन्म जगन प्रसाद रावत और सत्यवती रावत के घर में हुआ था। स्वाधीनता आंदोलन में वे वर्ष 1943 में एक वर्ष तक जेल में रहीं। रविवार सुबह 4:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद उनके आवास पर लोग पहुंचना शुरू हो गए। शाम को ताजगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ।
मां तुझे प्रणाम की अलख जगा गईं रानी सरोज गौरिहार
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रानी सरोज गौरिहार का अमर उजाला से गहरा नाता रहा। अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ का आगाज हुआ तो आजादी की अलख जगाने के लिए वह मशाल लेकर आगरा कॉलेज के मैदान से रथ में सवार होकर शहीद स्मारक पहुंचीं। वह कहती थीं कि अमर उजाला ने शहरवासियों को स्वतंत्रता दिवस मनाना सिखा दिया।
रानी सरोज गौरिहार ने हर साल ‘मां तुझे प्रणाम’ में शामिल होकर शहरवासियों को अपना आशीर्वाद दिया। वह जीवन पर्यंत इस कार्यक्रम से जुड़ी रहीं। 18 अप्रैल 2022 में अमर उजाला के 75वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने शिरकत की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उनका अमर उजाला से पीढ़ियों का नाता रहा है।