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इस्कॉन के पीआर डायरेक्टर का कारनामा: भक्तों से वसूली दान की मोटी रकम, फर्जीवाड़े के बाद मंदिर ने की कार्रवाई
Mon, 05 Apr 2021 12:04 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 05 Apr 2021 12:04 AM IST
सार
- इस्कॉन मंदिर के सचिव ने कोतवाली में दर्ज कराया है मुकदमा
- पुलिस का कहना-जल्द गिरफ्तार होगा आरोपी
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इस्कॉन मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस्कॉन मंदिर के पीआर डायरेक्टर (पब्लिक रिलेशन निदेशक) सौरभ त्रिविक्रम दास के खिलाफ कोतवाली वृंदावन में फर्जीवाड़े और अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोप है कि गलत तरीके से रसीदें लेकर इस्कॉन के भक्तों से मोटी रकम भी वसूली है। फिलहाल इस्कॉन मंदिर प्रशासन ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
वृंदावन इस्कॉन मंदिर के सचिव देवाशीष घोष ने एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर से मुलाकात करके पूरे मामले की जानकारी दी। एसएसपी ने पूरे मामले की जांच कराई तो वास्तव में पीआर डायरेक्टर सौरभ त्रिविक्रम दास का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। एसएसपी के आदेश पर कोतवाली वृंदावन में शनिवार की देरशाम मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सचिव देवाशीष घोष ने बताया कि सौरभ ने 2017 में इस्कॉन मंदिर में आकर पीआर डायरेक्टर का पद संभाला था।
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उसके बाद कई बार उससे आईडी प्रूफ मांगा गया, पर उसने नहीं दिखाया। इतना जरूर है कि वह विश्वास जमाता चला गया। इसके बाद पीआर डायरेक्टर साल 2021 में इस्कॉन मंदिर की छपी रसीद अपने कब्जे में कर लीं। इसके बाद आने वाली दानदाताओं की रकम का कोई हिसाब मंदिर प्रशासन को नहीं दिया। सचिव ने बताया कि कई बार तो वह अपने व्यक्तिगत अकाउंट में भी भक्तों ने चंदा एकत्रित करके लेता था। सचिव ने बताया कि कई दानदाताओं से इस्कॉन मंदिर की एवज में लाखों रुपये वसूले हैं। अब यह दानदाताओं की दी गई रकम कभी मंदिर के खाते में जमा नहीं हो सकी। एसपी सिटी एमपी सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होगा।
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वृंदावन इस्कॉन मंदिर के सचिव देवाशीष घोष ने एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर से मुलाकात करके पूरे मामले की जानकारी दी। एसएसपी ने पूरे मामले की जांच कराई तो वास्तव में पीआर डायरेक्टर सौरभ त्रिविक्रम दास का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। एसएसपी के आदेश पर कोतवाली वृंदावन में शनिवार की देरशाम मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सचिव देवाशीष घोष ने बताया कि सौरभ ने 2017 में इस्कॉन मंदिर में आकर पीआर डायरेक्टर का पद संभाला था।
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उसके बाद कई बार उससे आईडी प्रूफ मांगा गया, पर उसने नहीं दिखाया। इतना जरूर है कि वह विश्वास जमाता चला गया। इसके बाद पीआर डायरेक्टर साल 2021 में इस्कॉन मंदिर की छपी रसीद अपने कब्जे में कर लीं। इसके बाद आने वाली दानदाताओं की रकम का कोई हिसाब मंदिर प्रशासन को नहीं दिया। सचिव ने बताया कि कई बार तो वह अपने व्यक्तिगत अकाउंट में भी भक्तों ने चंदा एकत्रित करके लेता था। सचिव ने बताया कि कई दानदाताओं से इस्कॉन मंदिर की एवज में लाखों रुपये वसूले हैं। अब यह दानदाताओं की दी गई रकम कभी मंदिर के खाते में जमा नहीं हो सकी। एसपी सिटी एमपी सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होगा।