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शस्त्र लाइसेंसः मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में हुआ कुछ ऐसा कि अब नहीं मिलेगा इन लोगों को असलाह
Wed, 17 Jul 2019 03:35 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 17 Jul 2019 03:35 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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शस्त्र लाइसेंस की चाह रखने वाले चार आवेदकों को निराशा हाथ लगी है। वह मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में फेल हो गए। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सकों ने रिपोर्ट आवेदक के सुपुर्द कर दी है।
शस्त्र लाइसेंस के लिए मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट भी अनिवार्य है। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में दो हजार प्रार्थनापत्र आए थे। इनमें से 1,941 आवेदक मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में पास हो गए। 55 आवेदक अभी प्रक्रिया में हैं।
चार आवेदक परीक्षण में मानसिक अस्वस्थ मिले। इनमें दो आवेदक शराब के आदी पाए गए। एक आवेदक का बौद्धिक स्तर औसत से कम पाया गया। इसका 70 से 90 आईक्यू के बीच पाया गया। सामान्य रूप से 90 आईक्यू होना जरूरी है। एक आवेदक गुस्सैल था। बात-बात पर आक्रोशित होकर नियंत्रण खो देता था।
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शस्त्र लाइसेंस के लिए मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट भी अनिवार्य है। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में दो हजार प्रार्थनापत्र आए थे। इनमें से 1,941 आवेदक मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में पास हो गए। 55 आवेदक अभी प्रक्रिया में हैं।
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चार आवेदक परीक्षण में मानसिक अस्वस्थ मिले। इनमें दो आवेदक शराब के आदी पाए गए। एक आवेदक का बौद्धिक स्तर औसत से कम पाया गया। इसका 70 से 90 आईक्यू के बीच पाया गया। सामान्य रूप से 90 आईक्यू होना जरूरी है। एक आवेदक गुस्सैल था। बात-बात पर आक्रोशित होकर नियंत्रण खो देता था।
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संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि चार आवेदक परीक्षण में फेल हो गए हैं। दो शराब के लती मिले, जो गुस्सा भी करते थे। हाथ-पैर कांपने लगते थे। एक का बौद्धिक स्तर कम मिला, उसके सोचने-समझने की क्षमता कम थी।
वह विषम परिस्थितियों में निर्णय लेने में सक्षम नहीं पाया। एक आवेदक की सहनशीलता क्षमता कम मिली, वह गुस्से में उत्तेजित होकर नियंत्रण खो देता था और उग्र रूप धारण कर लेता था।
ऐसे किया मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण
आवेदकों की 10 दिन की मानीटरिंग हुई। आवेदक के रिश्तेदार, पड़ोसियों, मित्रों के फोन नंबर से बातचीत कर इनके नियमित व्यवहार-संवाद के बारे में इनपुट लिया। ओपीडी में बुलाकर परीक्षण किया।
दूसरे चरण में परिवार वार्ड में ले जाकर आकलन किया। इनसे कई तरह के प्रश्न भी किए गए। चित्र और कहानी के जरिए इनके भाव जाने गए। दस दिन में अलग-अलग चिकित्सकों ने इनका परीक्षण किया। रक्त संबंधी जांच भी कराई गई।
वह विषम परिस्थितियों में निर्णय लेने में सक्षम नहीं पाया। एक आवेदक की सहनशीलता क्षमता कम मिली, वह गुस्से में उत्तेजित होकर नियंत्रण खो देता था और उग्र रूप धारण कर लेता था।
ऐसे किया मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण
आवेदकों की 10 दिन की मानीटरिंग हुई। आवेदक के रिश्तेदार, पड़ोसियों, मित्रों के फोन नंबर से बातचीत कर इनके नियमित व्यवहार-संवाद के बारे में इनपुट लिया। ओपीडी में बुलाकर परीक्षण किया।
दूसरे चरण में परिवार वार्ड में ले जाकर आकलन किया। इनसे कई तरह के प्रश्न भी किए गए। चित्र और कहानी के जरिए इनके भाव जाने गए। दस दिन में अलग-अलग चिकित्सकों ने इनका परीक्षण किया। रक्त संबंधी जांच भी कराई गई।